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सख्ती: भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य गड़बड़ियों को रोकने के लिए लोकसभा में बिल पेश; मिलेगी सख्त सजा

Mon, 05 Feb 2024 05:41 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: आकाश कुमार Updated Mon, 05 Feb 2024 05:41 PM IST
सार

Bill On Paper Leak: केंद्र ने सरकारी भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक और फर्जी वेबसाइटों जैसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए सोमवार को लोकसभा में एक विधेयक पेश किया। इसमें इन अपराधों के लिए सख्त सजा का प्रावधान रखा गया है।

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Bill in Lok Sabha to check paper leaks, use of unfair means in govt recruitment exams
study - फोटो : Freepik

विस्तार

Paper Leak Bill: केंद्र ने सरकारी भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक और फर्जी वेबसाइटों जैसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए सोमवार को लोकसभा में एक विधेयक पेश किया। विधेयक में इस तरह के कृत्यों के लिए न्यूनतम तीन साल जेल की सजा और 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना शामिल है। 

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वर्तमान में, केंद्र सरकार और एजेंसियों द्वारा सार्वजनिक परीक्षाओं के संचालन में शामिल विभिन्न संस्थाओं द्वारा अपनाए गए अनुचित तरीकों या किए गए अपराधों से निपटने के लिए कोई विशिष्ट ठोस कानून नहीं है। 
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केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह द्वारा पेश किए गए सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक, 2024 में किसी व्यक्ति, व्यक्तियों के समूह या संस्थानों द्वारा किए गए अपराध के रूप में "प्रश्न पत्र या उत्तर कुंजी के लीक होने", "सार्वजनिक परीक्षा में अनाधिकृत रूप से किसी भी तरीके से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उम्मीदवार की सहायता करने" और "कंप्यूटर नेटवर्क या कंप्यूटर संसाधन या कंप्यूटर सिस्टम के साथ छेड़छाड़" करना शामिल है।
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इनके अलावा, "धोखा देने या आर्थिक लाभ के लिए फर्जी वेबसाइट बनाना", "फर्जी परीक्षा का संचालन, नकली प्रवेश पत्र जारी करना या धोखा देने या आर्थिक लाभ के लिए प्रस्ताव पत्र जारी करना" और "बैठने की व्यवस्था में हेरफेर, तारीखों और पाली का आवंटन" उम्मीदवारों को परीक्षाओं में अनुचित साधन अपनाने की सुविधा प्रदान करना भी प्रस्तावित कानून के तहत दंडनीय अपराधों में से एक है। 

विधेयक में कहा गया है, "इस अधिनियम के तहत अनुचित साधनों और अपराधों का सहारा लेने वाले किसी भी व्यक्ति या व्यक्तियों को कम से कम तीन साल की कैद की सजा दी जाएगी, जिसे पांच साल तक बढ़ाया जा सकता है और दस लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।" 

विधेयक में संगठित गिरोहों, माफिया तत्वों और कदाचार में लिप्त लोगों की पहचान करने और उनसे प्रभावी ढंग से निपटने का प्रावधान है। इनके साथ मिलीभगत में पाए गए सरकारी अधिकारियों को भी नहीं बख्शा जाएगा।

विधेयक "सार्वजनिक परीक्षा प्राधिकरण या सेवा प्रदाता या सरकार की किसी अधिकृत एजेंसी से जुड़े व्यक्तियों के जीवन, स्वतंत्रता को खतरे में डालना या गलत तरीके से रोकना, या सार्वजनिक परीक्षा के संचालन में बाधा डालना" को दंडनीय अपराध बनाता है। 

प्रस्तावित कानून में कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति या व्यक्तियों का समूह या संस्थान ऐसे किसी भी अनुचित साधन में लिप्त होने के लिए मिलीभगत या साजिश नहीं करेगा। 

विधेयक के उद्देश्यों और कारणों के विवरण में कहा गया है, "सार्वजनिक परीक्षाओं में कदाचार के कारण देरी होती है और परीक्षाएं रद्द हो जाती हैं, जिससे लाखों युवाओं की संभावनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।" 

इसमें कहा गया है कि विधेयक का उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षा प्रणालियों में अधिक पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता लाना है और युवाओं को आश्वस्त करना है कि उनके ईमानदार और वास्तविक प्रयासों को उचित पुरस्कार मिलेगा और उनका भविष्य सुरक्षित है। 

विधेयक राज्यों के लिए अपने यहां विवेक से अपनाने के लिए एक मॉडल मसौदे के रूप में काम करेगा।

पुलिस उपाधीक्षक या सहायक पुलिस आयुक्त के पद से नीचे का अधिकारी नहीं होगा। इसमें कहा गया है कि प्रस्तावित अधिनियम में उल्लिखित किसी भी अपराध की जांच करें। 


विधेयक में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी), कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी), रेलवे भर्ती बोर्ड (आरआरबी), बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान (आईबीपीएस) और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) सहित अन्य द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षाएं शामिल हैं।

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