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क्या है कोरोना वायरस और साल 2020 का कनेक्शन, जानिए क्या कहती है न्यूमरोलॉजी

Thu, 09 Apr 2020 10:10 PM IST
Trainee Trainee न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Trainee Trainee Updated Thu, 09 Apr 2020 10:10 PM IST
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What is the corona virus and the connection of the year 2020 and know what says Numerology
डॉ. नवनिधि के वाधवा - फोटो : अमर उजाला

इन दिनों कोरोना वायरस का प्रकोप दुनियाभर को परेशान कर रहा है। वैज्ञानिक, डॉक्टर्स इसके वैक्सीन, एंटी-डॉट की खोजबीन और टेस्ट में लगे हैं। इसी बीच कोरोना को लेकर ज्योतिष विज्ञान में किस तरह की बातें की जा रही हैं, इसके बारे में बताया है, ज्योतिषी, न्यूमरोलॉजिस्ट, ग्राफोलॉजिस्ट, वास्तु और एनएलपी विशेषज्ञ डॉ. नवनिधि के वाधवा ने।

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डॉ. नवनिधि के वाधवा ने बताया कि साल 2020 में दो बार दो आते हैं। यह चंद्रमा का साइन है। चंद्रमा को शीतल माना जाता है। यह इंसानों की श्वसन प्रणाली, सर्दी-जुकाम, खांसी की समस्या को बढ़ाता है। जबकि जब इस साल के अंकों का योग निकालते हैं तो चार आता है।
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चार को राहु का संकेत मानते हैं। यह इंसानों को अस्थिर करता है। साथ ही कई अप्रत्याशित समस्याएं लाकर खड़ा कर देता है। सब ठीक चलता रहेगा, फिर अचानक सब खराब हो जाता है। बतौर न्यूमरोलॉजिस्ट मैं मौजूदा हालात को देख कह सकती हूं कि इस दौर पर राहु का काफी असर है।
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उन्होंने बताया कि राहु आमतौर पर आता है तो अपने साथ अंधेरा ओर धुंआ लेकर आता है। वह लोगों में भय, भ्रम पैदा करने में माहिर है। लेकिन चुनौती ये रहती है कि डर किस बात का है ये हमें दिखाई नहीं देता। एक अनकहा, अनजाना डर सताता रहता है। कोरोना भी यही डर लेकर आया है।

डॉ. वाधवा के अनुसार, सभी संज्ञा का अपना एक नंबर होता है। जब हमने कोरोना वायरस के अक्षरों और संज्ञा के अंकों का अध्ययन किया तो ये योग दो आता है। साल में दो बार अंक दो आना और कोरोना वायरस का अंक भी दो होना, यह मिलकर ज्यादा बड़ी परेशानी खड़ी करते हैं।

हालांकि भारत का योग तीन है। इसिलए ऐसी उम्मीद की जा रही है कि भारत इसे नियंत्रित करने में सफल हो जाएगा। क्योंकि तीन को बृहस्पति (गुरु) का साइन माना जाता है। इसे सबसे बड़ा ग्रह मानते हैं। साथ ही इसमें बहुत गर्मी भी है।

 इसलिए माना जाता रहा है कि चंद्र के प्रभाव को कम करने में भारत सक्षम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पांच अप्रैल की रात नौ बजे नौ मिनट दीया जलाने के फैसले को लेकर डॉ. वाधवा कहती हैं, न्यूमोरोलॉजी के अनुसार देखें तो नौ को वॉरियर का नंबर माना जाता है। 

इस पर मंगल का प्रभाव होता है। आमतौर इन्हें विजय भी मिलती है। पीएम मोदी ने इसीलिए नौ को दो बार नौ बजे नौ मिनट का आह्वान किया। इसमें जीत की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। इसी तरह लाइट बंद कराने के पीछे भी एक बड़ा तर्क है।

विद्युत के सामान में राहु वा वास रहता है। साथ ही अंधेरे में भी। लेकिन पीएम ने जब दरवाजे पर दीया जलाने को कहा तो इसका मतलब ये था कि वो घर से राहु को निकालकर दरवाजे के बाहर कराना चाहते हैं। आग असल में पूरी परिस्थिति को बदल देती है। 

इतना ही नहीं उन्होंने 21 दिन के लॉकडाउन के नंबर्स को लेकर भी कहा कि इनका योग तीन आता है। तीन भारत के लिए सबसे उचित स्थिति होती है, क्योंकि खुद भारत के अक्षरों का योग तीन है। तीन दुनिया के सबसे बड़े प्लेनेट को इंडिकेट करता है। 

ऐसे में पीएम ने 21 दिनों का आह्वान किया होगा। क्योंकि कोरोना से लड़ने के लिए यही नंबर सबसे मुफीद हो सकता था। साथ ही एक वैज्ञानिक मान्यता है कि किसी भी शख्स को किसी नई आदत को डालने के लिए कम से कम 21 दिनों तक नियमित उस काम को करना चाहिए। 

मुझे इसका कारण नहीं पता, वे ऐसा क्यों मानते हैं। लेकिन बतौर न्यूमोरोलॉजिस्ट मैं इस तथ्य के आधार पर मैं ये कह सकती हूं कि 21 दिन वाला फैसला लेकर पीएम लोगों को घरों में रहने की आदत डलवा देंगे।

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