रविदास कैंप के लोगों को निर्भया के गुनहगारों की फांसी का बेसब्री से इंतजार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
निर्भया के गुनहगार पवन, मुकेश और विनय के कॉलोनी वासियों को उस पल का बेसब्री से इंतजार है जब गुनहगारों को फांसी के फंदे पर लटकाया जाएगा। दोषियों की फांसी की तारीख मुकर्रर होने के बाद शनिवार को अमर उजाला ने आरके पुरम स्थित रविदास कैंप का जायजा लिया।
इन दोषियों की वजह से कॉलोनी में रह रहे परिवारों के बच्चों की शिक्षा और नौकरी पर असर पड़ा है। बस्ती के प्रति नकारात्मक प्रभाव को लेकर यहां के लोग बेहद चिंतित दिखाई दिए। फांसी का समय नजदीक आने के साथ ही दोषियों के परिवारों का रवैया भी पड़ोसियों के साथ और खराब होता जा रहा है। इस कारण लोगों ने दोषियों और उनके परिवार के बारे में खुलकर बात करने से परहेज किया।
दिसंबर 2012 में निर्भया के साथ वसंत विहार इलाके में हुई दरिंदगी के दोषियों में से तीन पवन, मुकेश और विनय दिल्ली के आरके पुरम सेक्टर- 3 स्थित रविदास कैंप में रहते थे, जबकि चौथा दोषी अक्षय ठाकुर दिल्ली के अन्य इलाके में रहता था।
इस कॉलोनी में रहने वाले लोगों ने अमर उजाला से पहचान प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर बात की। उन्होंने कहा कि 7 जनवरी को पटियाला हाउस कोर्ट ने जब निर्भया के चारों दोषियों को फांसी देने का समय तय किया, तब से ही कैंप वासियों ने राहत की सांस ली है। उन्हें उस समय का बेसब्री से इंतजार है, जब दोषियों को फांसी होगी और उनकी बस्ती से रेपिस्ट की बस्ती का ठप्पा हटेगा।
बदला दोषियों के परिवारों का रवैया
दोषी विनय का परिवार रविदास कैंप में जे-105, मुकेश का परिवार जे- 49 और पवन का परिवार ए- 64 में रहता है। लोगों ने बताया कि जब से दोषियों को फांसी देने की तारीख मुकर्रर हुई है, तब से इनके परिवारों का रवैया लोगों के प्रति आक्रामक हो गया है।
वर्तमान में कोई भी पड़ोसी इन लोगों से बात नहीं करता। लोगों ने कहा कि दोषी मुकेश और पवन के परिवारों का रवैया सबसे ज्यादा खराब है।
बच्चों की पढ़ाई और नौकरी पर असर
रविदास कैंप में रहने वाले लोगों का कहना है कि दोषियों के घर यहां होने की वजह से उनके बच्चों के स्कूलों और दफ्तरों में चर्चाएं होती हैं। दोषियों के कुकृत्य के कारण बाहरी लोग यहां के बच्चों को भी वैसी ही नजर से देखते हैं।
लोग चाहते हैं कि जल्द से जल्द दोषियों की सजा पर अमल हो जाए और रविदास कैंप में रह रहे लोगों को बदनामी के ठप्पे से छुटकारा मिले।
कुछ लेंगे टीवी से अपडेट तो कुछ तिहाड़ भी पहुंचेंगे
लोगों ने कहा कि जब दोषियों को फांसी होगी तब वे लोग तिहाड़ जेल भी पहुंचेंगे और दोषियों की मौत का जश्न मनाएंगे। वहीं, कुछ लोगों ने कहा कि वे टीवी चैनलों पर दोषियों की सजा- ए- मौत की खबर देखेंगे।
दोषी मुकेश का परिवार इस झुग्गी बस्ती में 1992 में आया था। जबकि पवन का परिवार 2010-11 में यहां एक झुग्गी खरीदकर शिफ्ट हुआ था। बताया गया है कि पवन के परिवार का व्यवहार पहले से ही पड़ोसियों के प्रति बेहद खराब था और यहां करीब एक साल रहने के बाद ही पवन ने अपने साथियों के साथ मिलकर निर्भया केस को अंजाम दिया था।