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Delhi News: वाहन के सॉफ्टवेयर को डिकोड कर चुराते थे वाहन, दो गिरफ्तार

Mon, 20 Nov 2023 12:49 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 20 Nov 2023 12:49 AM IST
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Used to steal vehicles by decoding the vehicle's software, two arrested
वाहन के सॉफ्टवेयर को डिकोड कर चुराते थे वाहन, दो गिरफ्तार
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दिल्ली-एनसीआर से 100 से ज्यादा वाहन चुरा चुके हैं आरोपी
सात लक्जरी गाड़ियां, तीन बाइक और मास्टर चाबी बरामद

अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। पुलिस की अपराध शाखा की साइबर सेल ने वाहन चुराने वाले गिरोह का पर्दाफाश कर उत्तराखंड निवासी जसप्रीत सिंह उर्फ खजान सिंह उर्फ जस्सी (30) और मुरादाबाद (यूपी) निवासी कमरुद्दीन उर्फ उस्मान (27) को गिरफ्तार किया है। आरोपी वाहन के सॉफ्टवेयर को डिकोड करके दूसरी चाबी बनाते थे फिर गाड़ियां चुरा लेते थे। आरोपी दिल्ली व एनसीआर से 100 से ज्यादा वाहन चुरा चुके हैं। इनके पास से सात लक्जरी कारें, तीन बाइक और मास्टर चाबियां बरामद की हैं। आरोपी जसप्रीत सिंह पर पांच और कमरुद्दीन पर छह केस दर्ज हैं।

अपराध शाखा के विशेष पुलिस आयुक्त रविंद्र सिंह यादव के अनुसार, एक सूचना पर एसीपी पवन कुमार की देखरेख में इंस्पेक्टर वीरेेंद्र सिंह के नेतृत्व में गठित एएसआई सतवंत सिंह, एएसआई जसबीर सिंह, संजय व प्रवेश कुमार राठी की टीम ने आईपी एस्टेट में घेराबंदी कर ग्राम बरखेड़ा पांडे, थाना आईटीआई, जिला-उधम सिंह नगर, उत्तराखंड निवासी जसप्रीत सिंह और ग्राम लक्ष्मीपुर कराई, पीओ अखिलाजी, थाना मूंढा पांडे, मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश निवासी कमरुद्दीन को गिरफ्तार कर लिया।
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आरोपियों ने बताया कि हाल ही साथियों मोहम्मद फैसल उर्फ बॉबी, जावेद, आरिफ और दिलशाद के साथ दिल्ली/एनसीआर के विभिन्न सुरक्षित क्षेत्रों से 15 से अधिक कारें चुराई हैं। उन कारों को दिल्ली/एनसीआर के विभिन्न क्षेत्रों में पार्क किया है। उनकी निशानदेही पर दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से में कई छापे मारे गए और 7 कार, 3 बाइक और मास्टर चाबी बरामद की गई।
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ऐसे चुराते थे गाड़ियां
आरोपी पहले उस क्षेत्र की रेकी करते हैं, जहां वाहन बिना किसी सुरक्षा के पार्क किए जाते हैं। सुरक्षा सुनिश्चित करने के बाद वे पार्क किए गए चिन्हित वाहनों को तड़के ही चुरा लेते हैं। कार की खिड़की के साइड क्वार्टर ग्लास को तोड़ कर मास्टर चाबी की मदद से लॉक खोलते थे, फिर टैबलेट की मदद से आरोपी वाहन के सॉफ्टवेयर को डिकोड करने के बाद उसकी एक नई चाबी तैयार करते हैं। इसके बाद मूल चाबी की प्रोग्रामिंग को बदल कर कार चुरा लेते हैं। चोरी करने के बाद वाहनों को दिल्ली की सीमाओं के पार्किंग स्लॉट में पार्क करते हैं। आगे इन चोरी के वाहनों को पूर्वी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और गुवाहाटी में बेच देते हैं।
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