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वर्क फ्रॉम होम के नाम पर बेरोजगारों से ठगी, दो गिरफ्तार
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नई दिल्ली। वर्क फ्रॉम होम के नाम पर बेरोजगारों से ठगी करने वाले एक गैंग के दो लोगों को उत्तरी जिले की साइबर थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान गैंग लीडर यूपी के बरेली स्थित कर्मचारी नगर निवासी तुषार कुमार उर्फ ऋतिक और बरेली के सीवी गंज स्थित महेशपुर अटोरिया निवासी मो. अकरम अली के रूप में हुई है। तुषार को उत्तराखंड के उधम सिंह नगर से 19 मई को और मो. अकरम को बरेली से 21 मई को पकड़ा।
तुषार ने प्ले स्टोर पर एक एप FREELANCER.COM डाला हुआ था। इस एप में दावा किया जाता था कि यूके की कंपनी की ओर से वर्क फ्रॉम होम काम करवाया जा रहा है। एप पर कम से कम रुपयों में काम प्राप्त करने की बोली लगवाई जाती थी। सबसे कम बोली लगाने वाले व्यक्ति से संपर्क कर उससे अलग-अलग मदों में रुपये ऐंठ लिए जाते थे। शुरुआती जांच के बाद पुलिस को पता चला कि इन लोगों ने सैकड़ों लोगों से ठगी की। आरोपियों के पास से पुलिस ने एक लैपटॉप, 9 मोबाइल, 25 सिमकार्ड, 12 पहले से एक्टिवेट सिमकार्ड, 30 नॉन एक्टिवेटेड सिम, बायोमैट्रिक फिंगर डिवाइस और एक कार भी बरामद की है।
उत्तरी जिला पुलिस उपायुक्त सागर सिंह कलसी ने बताया कि पिछले दिनों उनको गृह मंत्रालय के साइबर क्राइम पोर्टल के जरिये बुराड़ी निवासी एक युवती ने ठगी की शिकायत दी थी। पीड़िता ने बताया कि उसने यू-ट्यूब पर एक वीडियो देखा था। वीडियो में यूके आधारित कंपनी के एप FREELANCER.COM के जरिये घर बैठे ही रुपये कमाने का दावा किया गया था। पीड़िता ने प्ले स्टोर से एप को डाउनलोड कर लिया। एप डाउनलोड करने के बाद अपनी पसंद के काम को चुनने के बाद पीड़िता से काम के बदले रुपयों की बोली लगाने के लिए कहा गया। पीड़िता ने बोली लगा दी। उसे काम मिल गया और काम पूरा भी कर दिया। इसके बाद उसके पास एक ईमेल और कॉल आई। कॉलर ने पीड़िता से काम के बदले रुपये लेने के लिए कुछ पैसों की मांग की। आरोपियों ने रजिस्ट्रेशन फीस, प्रोसेसिंग फीस, इंटरनेशनल बैंक ट्रांजेक्शन चार्ज व अन्य मद में करीब 12 हजार रुपये ठग लिए। पीड़िता की शिकायत पर साइबर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी।
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प्लेसमेंट एजेंसी में काम करने के दौरान आया था ठगी का आइडिया
साइबर थाना प्रभारी पवन तोमर व अन्य की टीम ने टेक्निकल सर्विलांस के जरिये जांच शुरू की। जिन खातों में रुपये ट्रांसफर हुए थे, उनकी भी पड़ताल की गई। जांच के बाद पुलिस को पता चला कि ठगी का धंधा उत्तराखंड से चल रहा है। पुलिस की एक टीम को उत्तराखंड के उधम सिंह नगर स्थित किच्छा भेजा गया। वहां से पुलिस ने 19 मई को आरोपी तुषार कुमार को गिरफ्तार कर लिया। इससे पूछताछ के बाद एक टीम को बरेली भेजा गया। ठगी के लिए सिम उपलब्ध करवाने वाले आरोपी मो. अकरम अली को 21 मई को गिरफ्तार कर लिया। दोनों के पास से पुलिस ने भारी मात्रा में सामान बरामद किया। पूछताछ के दौरान तुषार ने बताया कि वह पहले प्लेसमेंट एजेंसी में काम कर चुका था। यहां से उसे ठगी का आइडिया आया।
एप को सपोर्ट करने के लिए कुछ फर्जी वीडियो बनाकर यू-ट्यूब पर डाले
पुलिस की पूछताछ में आरोपी तुषार ने बताया कि उसने बेरोजगार लोगों से वर्क फ्रॉम होम के नाम से ठगी के लिए एक एप तैयार किया। इसे प्ले स्टोर पर डाल दिया गया। इसके अलावा एप को सपोर्ट करने के लिए कुछ फर्जी वीडियो बनाकर यू-ट्यूब पर डाल दिए गए। लोग इन वीडियो को देखकर उसके एप को डाउनलोड करते थे। एप को यूके बेस्ड बताया जाता था। काम करने के लिए वहां बोली लगाने की बात की जाती थी। सबसे कम बोली लगाने वाले को काम देने का नाटक कर उससे काम भी करवा लिया जाता था। जब पेमेंट करने की बारी आती थी, उस समय यह अलग-अलग मदों में यूपीआई लिंक के जरिये रुपये ट्रांसफर करवा लेेते थे। पीड़ित का विश्वास जीतने के लिए आरोपी यूके के फर्जी ईमेल भेजते थे। अकरम आरोपी तुषार को पहले से एक्टिवेडिट सिमकार्ड उपलब्ध करवाता था।
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तुषार ने प्ले स्टोर पर एक एप FREELANCER.COM डाला हुआ था। इस एप में दावा किया जाता था कि यूके की कंपनी की ओर से वर्क फ्रॉम होम काम करवाया जा रहा है। एप पर कम से कम रुपयों में काम प्राप्त करने की बोली लगवाई जाती थी। सबसे कम बोली लगाने वाले व्यक्ति से संपर्क कर उससे अलग-अलग मदों में रुपये ऐंठ लिए जाते थे। शुरुआती जांच के बाद पुलिस को पता चला कि इन लोगों ने सैकड़ों लोगों से ठगी की। आरोपियों के पास से पुलिस ने एक लैपटॉप, 9 मोबाइल, 25 सिमकार्ड, 12 पहले से एक्टिवेट सिमकार्ड, 30 नॉन एक्टिवेटेड सिम, बायोमैट्रिक फिंगर डिवाइस और एक कार भी बरामद की है।
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उत्तरी जिला पुलिस उपायुक्त सागर सिंह कलसी ने बताया कि पिछले दिनों उनको गृह मंत्रालय के साइबर क्राइम पोर्टल के जरिये बुराड़ी निवासी एक युवती ने ठगी की शिकायत दी थी। पीड़िता ने बताया कि उसने यू-ट्यूब पर एक वीडियो देखा था। वीडियो में यूके आधारित कंपनी के एप FREELANCER.COM के जरिये घर बैठे ही रुपये कमाने का दावा किया गया था। पीड़िता ने प्ले स्टोर से एप को डाउनलोड कर लिया। एप डाउनलोड करने के बाद अपनी पसंद के काम को चुनने के बाद पीड़िता से काम के बदले रुपयों की बोली लगाने के लिए कहा गया। पीड़िता ने बोली लगा दी। उसे काम मिल गया और काम पूरा भी कर दिया। इसके बाद उसके पास एक ईमेल और कॉल आई। कॉलर ने पीड़िता से काम के बदले रुपये लेने के लिए कुछ पैसों की मांग की। आरोपियों ने रजिस्ट्रेशन फीस, प्रोसेसिंग फीस, इंटरनेशनल बैंक ट्रांजेक्शन चार्ज व अन्य मद में करीब 12 हजार रुपये ठग लिए। पीड़िता की शिकायत पर साइबर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी।
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प्लेसमेंट एजेंसी में काम करने के दौरान आया था ठगी का आइडिया
साइबर थाना प्रभारी पवन तोमर व अन्य की टीम ने टेक्निकल सर्विलांस के जरिये जांच शुरू की। जिन खातों में रुपये ट्रांसफर हुए थे, उनकी भी पड़ताल की गई। जांच के बाद पुलिस को पता चला कि ठगी का धंधा उत्तराखंड से चल रहा है। पुलिस की एक टीम को उत्तराखंड के उधम सिंह नगर स्थित किच्छा भेजा गया। वहां से पुलिस ने 19 मई को आरोपी तुषार कुमार को गिरफ्तार कर लिया। इससे पूछताछ के बाद एक टीम को बरेली भेजा गया। ठगी के लिए सिम उपलब्ध करवाने वाले आरोपी मो. अकरम अली को 21 मई को गिरफ्तार कर लिया। दोनों के पास से पुलिस ने भारी मात्रा में सामान बरामद किया। पूछताछ के दौरान तुषार ने बताया कि वह पहले प्लेसमेंट एजेंसी में काम कर चुका था। यहां से उसे ठगी का आइडिया आया।
एप को सपोर्ट करने के लिए कुछ फर्जी वीडियो बनाकर यू-ट्यूब पर डाले
पुलिस की पूछताछ में आरोपी तुषार ने बताया कि उसने बेरोजगार लोगों से वर्क फ्रॉम होम के नाम से ठगी के लिए एक एप तैयार किया। इसे प्ले स्टोर पर डाल दिया गया। इसके अलावा एप को सपोर्ट करने के लिए कुछ फर्जी वीडियो बनाकर यू-ट्यूब पर डाल दिए गए। लोग इन वीडियो को देखकर उसके एप को डाउनलोड करते थे। एप को यूके बेस्ड बताया जाता था। काम करने के लिए वहां बोली लगाने की बात की जाती थी। सबसे कम बोली लगाने वाले को काम देने का नाटक कर उससे काम भी करवा लिया जाता था। जब पेमेंट करने की बारी आती थी, उस समय यह अलग-अलग मदों में यूपीआई लिंक के जरिये रुपये ट्रांसफर करवा लेेते थे। पीड़ित का विश्वास जीतने के लिए आरोपी यूके के फर्जी ईमेल भेजते थे। अकरम आरोपी तुषार को पहले से एक्टिवेडिट सिमकार्ड उपलब्ध करवाता था।