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सुरक्षा उपकरण के बिना सेप्टिक टैंक की सफाई करते वक्त दो की मौत, पुलिस ने दर्ज किया लापरवाही का मामला

Sat, 27 Mar 2021 03:25 PM IST
प्राची प्रियम अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: प्राची प्रियम Updated Sat, 27 Mar 2021 03:25 PM IST
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Two died while doing cleaning work in septic tank in Patpadganj grand banquet hall
Septic Tank
पटपड़गंज औद्योगिक क्षेत्र स्थित पर्ल ग्रांड बैंक्वेट हॉल में गुरुवार रात सेप्टिक टैंक की सफाई करने उतरे लोकेश (35) और प्रेमचंद (45) की मौत हो गई। दोनों मजदूर त्रिलोकपुरी 8 ब्लॉक में परिवार के साथ रहते थे। दमकल की टीम ने उन्हें टैंक से निकालकर पास के अस्पताल पहुंचाया, जहां दोनों को मृत घोषित कर दिया गया। 
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उनके परिजनों ने बैंक्वेट हॉल मालिक पर लापरवाही का आरोप लगाया है। पुलिस ने लापरवाही का मामला दर्ज किया है। पुलिस के मुताबिक, दोनों की मौत जहरीली गैस से हुई या डूबकर, इसका खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट में होगा।
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जिला पुलिस उपायुक्त दीपक यादव के मुताबिक, मूलत: दौसा स्थित अलुदा गांव निवासी प्रेमचंद चार भाइयों, पत्नी और 15 व 12 साल के दो बेटों के साथ रहते थे। उधर, लोकेश पिता बाबू व अन्य परिजनों के साथ रहते थे। दोनों दिहाड़ी मजदूर थे। गुरुवार रात करीब साढ़े दस बजे पुलिस व दमकल विभाग को गाजीपुर गांव स्थित पर्ल बैंक्वेट हॉल में दो मजदूरों के सेप्टिक टैंक में डूबने की सूचना मिली। 
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मौके पर मिले राहुल ने बताया कि वह बैंक्वेट हॉल में साफ-सफाई करता है। भूतल स्थित सेप्टिक टैंक की सफाई के लिए उसने शाम साढ़े सात बजे दो लोगों को बुलाया था। दोनों साढ़े नौ बजे टैंक में घुसे और करीब आधे घंटे तक कोई हलचल नहीं हुई तो वह गया। काफी आवाज लगाने पर भी कोई जवाब न मिला तो उसने पुलिस को सूचना दी।

दमकल विभाग ने उपकरणों के जरिये काफी मशक्कत के बाद दोनों को निकाला तो उनके शरीर पर कीचड़ लगा था। पास के लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पूछताछ में राहुल ने बताया कि सेप्टिक टैंक में उतरने से मजदूरों को कोई सुरक्षा उपकरण नहीं दिया गया था।

काम के एवज में मिलने थे तीन हजार रुपये 

राहुल ने पुलिस को बताया कि टैंक की सफाई के लिए उसकी लोकेश से बात हुई थी। उन्हें सफाई के लिए तीन हजार रुपये मिलने थे। नियम के मुताबिक, सीवर या सेप्टिक टैंक की सफाई करने वाले मजदूरों के पास ऑक्सीजन मास्क, हेलमेट, ग्लव्स आदि सुरक्षा उपकरण होने चाहिए, लेकिन इन दोनों के पास कुछ नहीं था।

लोकेश की जिद के कारण गए प्रेमचंद
भाई चंद्र प्रसाद का कहना है कि प्रेमचंद का मन गुरुवार शाम सेप्टिक टैंक की सफाई करने के लिए जाने का नहीं था। लोकेश के जिद करने पर वह चले गए। लोकेश उनके घर जाकर प्रेमचंद को ले गए थे।

सेप्टिक टैंकों में होते रहे हादसे
11 अक्तूबर 2020 : बदरपुर के मोलड़बंद में सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान 2 की मौत, जहरीली गैस की वजह से घुटा दम। कर्मचारियों के बेहोश होने पर टैंक में उतरे मकान मालिक की भी मौत। 

19 अक्तूबर 2020 : आदर्श नगर में ज्वेलरी बनाने वाली फैक्टरी में सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान दो मजदूरों की मौत, तीन घायल।
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