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मुसीबत: कोरोना से ठीक हुए मरीजों की फटी पित्त की थैली, ऑपरेशन कर बचाई जान, दावा-गैंग्रीन के देश में पहले पांच मामले

Fri, 17 Sep 2021 12:43 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: शाहरुख खान Updated Fri, 17 Sep 2021 12:43 AM IST
सार

कोरोना को हराने वाले पांच मरीजों में पित्त की थैली में गैंग्रीन मिला है। इनमें से चार रोगियों की पित्त की थैली पूरी तरह गल गई थी। ऑपरेशन कर मरीजों की जान बचाई गई है। 

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Torn gall sac of patients who were cured of corona, Survived by surgery at Delhi Sir Ganga Ram Hospital
गंगाराम अस्पताल - फोटो : Social media

विस्तार

कोरोना वायरस का संक्रमण ठीक होने के बाद लोगों को तरह-तरह की नई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ज्यादातर मरीजों को थकावट और कमजोरी की परेशानी है। वहीं, कई मामलों में मरीजों को ब्लैक, येलो या व्हृइट फंगस भी हुआ है। 
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अब कोरोना को हराने वाले पांच मरीजों में पित्त की थैली में गैंग्रीन मिला है। इनमें से चार रोगियों की पित्त की थैली पूरी तरह गल गई थी। ऑपरेशन कर मरीजों की जान बचाई गई है। दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में आए पांचों मरीजों को पेट दर्द, उल्टी की शिकायत थी। इनका सीटी स्कैन किया गया, जिसमें सभी रोगियों की पित्त की थैली में गैंग्रीन की पुष्टि हुई। 
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अस्पताल का दावा है की यह देश के इस प्रकार के पहले पांच मामले हैं जिनमें कोरोना से स्वस्थ होने के बाद पित्त की थैली में गैग्रीन हुआ है। इन मरीजों की उम्र 37 से -75 वर्ष की आयु के हैं। चार पुरूष और एक महिला थी। दो मरीजों को मधुमेह और एक को दिल की बीमारी भी थी। 
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तीन मरीजों ने कोरोना से संक्रमित होने के दौरान स्ट्रेरॉयड लिए थे। सीटी स्कैन में पिताशय की दिवार में सूजन और गेंग्रीन की पुष्टि हुई थी। इनमें सभी रोगियों की लैप्रोस्कोपिक सजर्री से पित्त की थैली निकाल दी गई। 

सर गंगाराम अस्पताल के इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर, गैस्ट्रोएंटरलॉजी विभाग के चेयरमैन प्रोफेसर डॉ. अनिल अरोड़ा ने बताया कि पांचों मरीजों की पित्त की थैली गल गई थी, जबकि चार मरीज ऐसे थे, जिनकी थैली फट चुकी थी और इनकी तुरंत सर्जरी जरूरी थी। साथ ही जो सूजन थी, वह अकैल्क्यूलस कोलीसिस्टाइटिस थी, जो कि सूजन का एक गंभीर प्रकार है। 

यह सूजन मुख्य रूप से कोई बड़ा ऑपरेशन होने, गंभीर शारीरिक चोट लगने, जलने, एचआईवी आदि के कारण होती है, लेकिन कोविड की वजह से ऐसी स्थिति पहली बार देखी गई है। जिस तरह से कोविड का संक्रमण फेफड़ों में पहुंच जाता है, उसकी तरह यह पित्त की थैली में भी पहुंच गया और गैंग्रीन बन गया। 

अस्पताल के पैथोलॉजी विभाग के डॉ़ शशि धवन ने बताया कि इस तरह के केस कोविड से ठीक हो चुके मरीजों में पहली बार ही देखने को मिले हैं। उन्होंने कहा कि पित्त की थैली में पथरी की समस्या आम है। लेकिन गैंगरीन पहली बार देखने को मिला है। 

लक्षण दिखने पर तुरंत लेनी चाहिए डॉक्टर की सलाह
डॉ. अरोड़ा ने बताया कि कोरोना को हराने वाले जिन भी मरीज में पेट में दर्द या उल्टी, भूख कम लगना जैसे लक्षण होते हैं।  उन्हें तत्काल अस्पताल जाना चाहिए और डॉक्टर की सलाह पर किसी इलाज शुरू करवाना चाहिए। डॉक्टर के मुताबिक, अगर किसी मरीज को पेट में दर्द या सूजन महसूस हो रही है तो उसे तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। कई मामलों में जल्दी जांच से एंटीबॉयोटिक दवाओं के माध्यम से मरीज को स्वस्थ किया जा सकता है। 

गैंग्रीन में क्या होती है दिक्कत
डॉक्टर ने बताया कि गैंग्रीन जिस स्थान पर होता है वह हिस्सा धीरे-धीरे गलने लगता है।  कुछ ही दिनों में शरीर का वह हिस्सा काला या बैंगनी रंग का दिखना शुरू हो जाता है। इसका एकमात्र इलाज ऑपरेशन ही होता है। इसके ऑपरेशन में शरीर के जितने हिस्से में गैंग्रीन का असर होता है उस हिस्से को काटकट हटा दिया जाता है।
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