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दिल्ली-एनसीआर में आज सभी व्यावसायिक वाहनों का चक्का जाम
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दिल्ली-एनसीआर में आज सभी व्यावसायिक वाहनों का चक्का जाम
नई दिल्ली। संशोधित मोटर वाहन अधिनियम समेत ट्रांसपोर्टरों के हितों से जुड़ी मांगों को लेकर यूनाइटेड फ्रंट ऑफ ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (यूएफटीए) ने केंद्र और दिल्ली सरकार के खिलाफ बृहस्पतिवार को चक्का जाम करने की घोषणा की है। ट्रांसपोर्ट संगठनों ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार जुर्माना बढ़ाने से पहले उन वादों को पूरा करे, जिन्हें यातायात ढांचे को सुसंगठित करने के लिए किया गया था। इस चक्का जाम के तहत दिल्ली-एनसीआर में ई-रिक्शा, ऑटो, आरटीवी, टैक्सी, ट्रक, बसें, मिनी बसें और स्कूल बसें सुबह 6 से रात 10 बजे तक बंद रहेंगी।
अनुमान है कि एक दिन में सरकार को वाहनों के बंद होने से 2300 हजार करोड़ का नुकसान हो सकता है। इस दौरान दिल्ली-एनसीआर में लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। यूएफटीए के अध्यक्ष डॉ. हरीश सभ्रवाल के नेतृत्व में बुधवार को चेम्सफोर्ड क्लब में प्रेस वार्ता बुलाई गई। इस प्रेसवार्ता में यूएफटीए के बैनर तले एकजुट होने वाले दिल्ली-एनसीआर के 41 व्यावसायिक ट्रांसपोर्ट संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। डॉ. हरीश सभ्रवाल ने कहा कि ट्रांसपोर्ट संगठन संशोधित मोटर वाहन अधिनियम के तहत लागू किए गए नए जुर्माने की राशि को कम करवाने के लिए पिछले कई दिनों से केंद्र और दिल्ली सरकार के साथ बैठकें कर रहे हैं, लेकिन उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। उन्होंने कहा कि सरकार ने विदेशों की तर्ज पर मोटर वाहन अधिनियम के तहत जुर्माने की राशि कई गुना बढ़ा दी, लेकिन विदेशों की तर्ज पर ट्रांसपोर्टरों को दी जाने वाली सुविधाओं के बारे में नहीं सोचा गया।
ये हैं मांगें
सरकार बढ़ाई गई जुर्माने की राशि को कम करे, थर्ड पार्टी बीमा की रकम की कैपिंग को हटाया जाए, सेक्शन 44-एई के तहत आयकर की दरों में तर्कहीन और अविश्वसनीय वृद्धि को घटाया जाए और चालकों एवं उनके परिवारों के लिए समाज सुरक्षा योजनाओं का क्रियान्वयन किया जाए। पार्किंग की सुविधा मुहैया कराई जाए।
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नई दिल्ली। संशोधित मोटर वाहन अधिनियम समेत ट्रांसपोर्टरों के हितों से जुड़ी मांगों को लेकर यूनाइटेड फ्रंट ऑफ ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (यूएफटीए) ने केंद्र और दिल्ली सरकार के खिलाफ बृहस्पतिवार को चक्का जाम करने की घोषणा की है। ट्रांसपोर्ट संगठनों ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार जुर्माना बढ़ाने से पहले उन वादों को पूरा करे, जिन्हें यातायात ढांचे को सुसंगठित करने के लिए किया गया था। इस चक्का जाम के तहत दिल्ली-एनसीआर में ई-रिक्शा, ऑटो, आरटीवी, टैक्सी, ट्रक, बसें, मिनी बसें और स्कूल बसें सुबह 6 से रात 10 बजे तक बंद रहेंगी।
अनुमान है कि एक दिन में सरकार को वाहनों के बंद होने से 2300 हजार करोड़ का नुकसान हो सकता है। इस दौरान दिल्ली-एनसीआर में लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। यूएफटीए के अध्यक्ष डॉ. हरीश सभ्रवाल के नेतृत्व में बुधवार को चेम्सफोर्ड क्लब में प्रेस वार्ता बुलाई गई। इस प्रेसवार्ता में यूएफटीए के बैनर तले एकजुट होने वाले दिल्ली-एनसीआर के 41 व्यावसायिक ट्रांसपोर्ट संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। डॉ. हरीश सभ्रवाल ने कहा कि ट्रांसपोर्ट संगठन संशोधित मोटर वाहन अधिनियम के तहत लागू किए गए नए जुर्माने की राशि को कम करवाने के लिए पिछले कई दिनों से केंद्र और दिल्ली सरकार के साथ बैठकें कर रहे हैं, लेकिन उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। उन्होंने कहा कि सरकार ने विदेशों की तर्ज पर मोटर वाहन अधिनियम के तहत जुर्माने की राशि कई गुना बढ़ा दी, लेकिन विदेशों की तर्ज पर ट्रांसपोर्टरों को दी जाने वाली सुविधाओं के बारे में नहीं सोचा गया।
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ये हैं मांगें
सरकार बढ़ाई गई जुर्माने की राशि को कम करे, थर्ड पार्टी बीमा की रकम की कैपिंग को हटाया जाए, सेक्शन 44-एई के तहत आयकर की दरों में तर्कहीन और अविश्वसनीय वृद्धि को घटाया जाए और चालकों एवं उनके परिवारों के लिए समाज सुरक्षा योजनाओं का क्रियान्वयन किया जाए। पार्किंग की सुविधा मुहैया कराई जाए।
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