Delhi: टैक्स, टोल और ट्रैफिक में फंसी राजधानी की रफ्तार, वाहन मालिकों पर खर्च की पड़ रही चौतरफा मार
राजधानी दिल्ली में वाहन खरीदना अब केवल सुविधा का साधन नहीं, बल्कि एक महंगा निवेश बनता जा रहा है। कोई भी व्यक्ति जब बाइक या कार खरीदता है तो उसे सिर्फ वाहन की मूल कीमत नहीं, बल्कि जीएसटी, रोड टैक्स, रजिस्ट्रेशन शुल्क, बीमा और अन्य शुल्क भी चुकाने पड़ते हैं।
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राजधानी दिल्ली में वाहन खरीदना अब केवल सुविधा का साधन नहीं, बल्कि एक महंगा निवेश बनता जा रहा है। कोई भी व्यक्ति जब बाइक या कार खरीदता है तो उसे सिर्फ वाहन की मूल कीमत नहीं, बल्कि जीएसटी, रोड टैक्स, रजिस्ट्रेशन शुल्क, बीमा और अन्य शुल्क भी चुकाने पड़ते हैं। राहत आगे भी नहीं मिलती, क्योंकि रोजमर्रा की जिंदगी में पार्किंग शुल्क, टोल टैक्स और पेट्रोल-डीजल पर कर का अतिरिक्त बोझ अलग से उठाना पड़ता है। इस सबके बावजूद दिल्लीवासियों को जाम से निजात नहीं मिल रही है। इससे लोगों को आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानी झेलनी पड़ रही है। एक सामान्य मध्यवर्गीय परिवार यदि 8 लाख रुपये की कार खरीदता है, तो उसकी ऑन-रोड कीमत करीब 9 लाख रुपये तक पहुंच जाती है। वहीं, 1 लाख रुपये की बाइक सड़क पर उतरते-उतरते लगभग 1.20 लाख रुपये की पड़ती है।
दिल और जेब दोनों को नुकसान पहुंचा रहा जाम समय की भी बर्बादी
राजधानी को जाम से राहत दिलानी है तो केवल सड़क चौड़ी करने से काम नहीं चलेगा। इसके लिए सार्वजनिक परिवहन को अधिक सुविधाजनक बनाना, पार्किंग नीति सख्ती से लागू करना, ट्रैफिक अनुशासन सुधारना और अलग-अलग एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी होगा। साथ ही पैदल चलने वालों के लिए बेहतर कॉरिडोर विकसित करने होंगे। --डॉ. अनिल छिकार, पूर्व उपायुक्त दिल्ली परिवहन विभाग
87 लाख तक हुए वाहन सड़कों का विस्तार सीमित
परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, राजधानी में पंजीकृत वाहनों की संख्या करीब 87 लाख पहुंच चुकी है जबकि सड़कों का विस्तार सीमित है। यही वजह है कि व्यस्त समय में शहर के प्रमुख मार्गों पर वाहन रेंगते नजर आते हैं।
समस्या की मूल वजहें
विशेषज्ञों के अनुसार, जाम की सबसे बड़ी वजह सड़कों की क्षमता से अधिक वाहनों का दबाव है। कई सड़कें पुराने ट्रैफिक ढांचे को ध्यान में रखकर बनाई गई थीं जबकि आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं।
निर्माण कार्य, अवैध पार्किंग, अतिक्रमण, गलत दिशा में वाहन चलाना और कमजोर ट्रैफिक प्रबंधन भी समस्या को गंभीर बना रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सड़कें चौड़ी करने से समाधान संभव नहीं है। सार्वजनिक परिवहन को अधिक प्रभावी बनाना और लास्ट माइल कनेक्टिविटी मजबूत करना समय की जरूरत है। लोग मेट्रो स्टेशन तक पहुंचने के लिए निजी वाहन इस्तेमाल करते हैं, जिससे सड़क पर अतिरिक्त दबाव बढ़ता है।
इन इलाकों में लगता है लंबा जाम
आश्रम चौक, आईटीओ, धौला कुआं, आजादपुर, मुकरबा चौक, अक्षरधाम, सराय काले खां, बदरपुर बॉर्डर, गुरुग्राम-दिल्ली सीमा, नोएडा लिंक रोड, नारायणा, रिंग रोड, आउटर रिंग रोड और एनएच-48 जैसे इलाके नियमित रूप से जाम की समस्या झेलते हैं। सुबह और शाम के समय यहां कई किलोमीटर लंबा जाम आम बात हो गई है।