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Delhi News: तरुण विजय ने कहा- दिल्ली कब्रिस्तान का नहीं, आनंद, कला और योद्धाओं का शहर है

Sun, 22 May 2022 04:55 AM IST
Jeet Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Sun, 22 May 2022 04:55 AM IST
सार

1200 साल पुरानी इस ऐतिहासिक लघु झील में नालियों का पानी गिरने के अलावा कई अतिक्रमण भी हुए हैं। इन सबको भी हटाया जाएगा। इसके अलावा नालियों से आने वाले गंदे पानी को गिरने से रोकने पर भी विशेष रूप से काम होगा। 

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Tarun Vijay said delhi is not a graveyard it is a city of joy art and warriors
तरुण विजय - फोटो : AmarUjala

विस्तार

राष्ट्रीय संस्मारक प्राधिकरण (एनएमए)के अध्यक्ष तरण विजय ने कहा कि दिल्ली कब्रिस्तानों का शहर नहीं है, जैसा कि बताया जाता रहा है। यह आनंद, कला, संस्कृति और सिख गुरु तेगबहादुर साहब और बंदा सिंह बहादुर, बाबा बघेल सिंह, मराठा प्रमुख महादाजी शिंदे जैसे योद्धाओं के बलिदानों का एक महान शहर है।  जिन्होंने दिल्ली को जीता और मुगलों को हराया। 

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उन्होंने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण(एएसआई) द्वारा 1993 में अनुभवी पुरातत्वविद डॉ. बीआर मणि के मार्गदर्शन में अनंग ताल में खुदाई करवायी गई थी। इस इलाके का विस्तृत सर्वेक्षण नक्शा एएसआई के पास है। इस नक्शे में ताल की ओर जाने वाली सुंदर सीढ़ियां और इनके माप शामिल हैं।  
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इसलिए अब इस ऐतिहासिक सत्य को उजागर करने का समय आ गया है। वे शनिवार को डीडीए के अध्यक्ष मुकेश गुप्ता और राष्ट्रीय संस्मारक प्राधिकरण की टीम के साथ 11 वीं सदी के स्मारक अनंगताल का सर्वेक्षण करने पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि अनंगताल की सफाई और सौंदर्यीकरण का काम होगा। 
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उन्होंने कहा कि 11वीं सदी के इस भव्य जलाशय की सफाई से लेकर सौंदर्यीकरण का काम अगले हफ्ते तक शुरू कर दिया जाएगा। इस दौरान अधिकारियों ने इस पूरे इलाके का विस्तृत सर्वेक्षण भी किया। 

टीम ने कहा कि 1200 साल पुरानी इस ऐतिहासिक लघु झील में नालियों का पानी गिरने के अलावा कई अतिक्रमण भी हुए हैं। इन सबको भी हटाया जाएगा। इसके अलावा नालियों से आने वाले गंदे पानी को गिरने से रोकने पर भी विशेष रूप से काम होगा। 

राष्ट्रीय संस्मारक प्राधिकरण (एनएमए)  के अध्यक्ष  तरुण विजय ने कहा कि अब ऐतिहासिक सत्य को उजागर करने का समय आ गया है। दिल्ली के संस्थापक शासक महाराजा अनंग पाल तोमर ने 1052 ईस्वी में महरौली इलाके में प्रसिद्ध 27 हिंदू-जैन मंदिरों के पीछे बनवाया था। 
अनंग पाल के विष्णु मंदिर के सामने स्थित विष्णु गरुड़ध्वज (लौह स्तंभ के रूप में लोकप्रिय) एक धार्मिक ध्वज था। बाद में इन मंदिरों को कुतुबुद्दीन ऐबक द्वारा ध्वस्त कर दिया गया और इसके अवशेषों का इस्तेमाल जामी मस्जिद के निर्माण के लिए किया गया, जिसे बाद में कुव्वतुल इस्लाम मस्जिद के रूप में जाना जाने लगा।


उन्होंने कहा कि मुझे खुशी  है कि राष्ट्रीय संस्मारक प्राधिकरण दिल्ली के संस्थापक राजा से जुड़े तथ्यों को सामने लाने में सफल रहा है। इस शहर को पहले ढिल्लिकापुरी के नाम से जाना जाता था, जैसा कि लॉर्ड कनिंघम द्वारा खुदाई के दौरान मिले पत्थर के शिलालेखों से पता चलता है। पत्थर के ये शिलालेख ब्रिटिश काल के भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई)के अधिकारियों को नई दिल्ली के निर्माण के दौरान पालम, नारायणा और सरबन (रायसीना) में मिले थे।

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