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उपहार अग्निकांड : सुशील अंसल और गोपाल अंसल ने कानून के शासन की महिमा को कमजोर किया

Fri, 29 Oct 2021 12:06 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 29 Oct 2021 12:06 AM IST
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Sushil Ansal and Gopal Ansal undermine the glory of the rule of law
नई दिल्ली। सुशील अंसल और गोपाल अंसल ने कानून के शासन की महिमा को कमजोर किया है। उन्होंने न केवल दिल्ली की न्यायपालिका की संस्थागत अखंडता को क्षीण कर दिया बल्कि आपराधिक न्याय प्रणाली के प्रशासन पर भी गंभीर रूप से चोट पहुंचाई है। ऐसे दोषियों के सुुधार की संभावना नहीं है। दोषियों को आजीवन कारावास की सजा मिलनी चाहिए।
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उपहार केस के साक्ष्यों को नष्ट करने के मामले में दोषी ठहराए गए अंसल बंधुओं सहित अन्य की सजा निर्धारण पर दिल्ली पुलिस व पीड़ितों ने अदालत के समक्ष उक्त तर्क रखा।
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पटियाला हाउस अदालत के मुख्य महानगर दंडाधिकारी पंकज शर्मा के समक्ष उन्होंने कहा सुशील अंसल और गोपाल अंसल नाम के दोषियों से सुधार की उम्मीद नहीं की जा सकती। वे मुख्य मामले में भी दोषी ठहराए गए हैं और उनके खिलाफ कई अन्य आपराधिक मामले विचाराधीन हैं। इस मामले ने एक धारणा बनाई है कि अमीर और ताकतवर लोग किसी भी चीज से बच सकते हैं और वे न्यायिक व्यवस्था को अपने पक्ष में कर सकते हैं। अदालत के सम्मान के लिए इस धारणा को भी तोड़ना होगा। न्यायालय ऐसे गंभीर अपराध पर आंखें मूंद नहीं सकता।
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सजा मिले ताकि विश्वास कायम रहे
पुलिस और पीड़ितों ने कहा दोषियों के खिलाफ साबित अपराध अपनी तरह के सबसे गंभीरतम हैं। इन्होंने न्याय वितरण प्रणाली में आम आदमी के विश्वास को चकनाचूर किया है। लोगों के विश्वास को सुनिश्चित करने के लिए दोषियों को कड़ी सजा दी जानी चाहिए ताकि न्यायपालिका की ताकत बरकरार रहे और इसे हिलने नहीं दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा न्यायिक अभिलेखों का हिस्सा बनाने वाले साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करके दोषियों ने कानूनी प्रक्रिया में बाधा डालने और उसे विफल करने का प्रयास किया। उन्होंने न केवल न्याय की धारा को प्रदूषित किया बल्कि उन्होंने कानून के शासन की महिमा को भी कमजोर किया है।
उन्होंने सुशील अंसल और गोपाल अंसल की आयु का हवाला देते हुए दया की मांग पर आपत्ति जताते हुए कहा कि दोषियों से सुधार की उम्मीद नहीं की जा सकती। सुशील अंसल के खिलाफ 29 शिकायतें, 22 आईपीसी मामले और 19 शिकायतें 156 (3) सीआरपीसी लंबित हैं। उन्होंने कहा कि स्टेन स्वामी को आपराधिक मामले में 85 वर्ष की आयु में कोरोना महामारी के दौरान भीमा कोरेगांव मामले में गिरफ्तार किया गया था। वहीं हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला, पूर्व सांसद सज्जन कुमार को भी जेल में सजा काटनी पड़ी।
दोषियों ने दिए ये तर्क
वहीं अंसल बंधुओं के अधिवक्ता ने दया की अपील करते हुए कहा उनकी आयु 80 वर्ष से ज्यादा है और वे परिवार में कमाने वाले एक मात्र सदस्य हैं। उनकी दोनों बेटियां अलग रहती हैं। इसके अलावा पत्नी की देखभाल करनी है। उसने दो हजार लोगों को रोजगार दिया है।

उन्होंने कहा पीड़ितों को 30 करोड़ रुपये मुआवजा दिया है। उनके इस तर्क पर पीड़ित एसोसिएशन की अध्यक्ष नीलम कृष्णमूर्ति ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा वे अभी अदालत को गुमराह कर रहे हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने दोषियों पर यह राशि जुर्माने के रूप में लगाई थी। अदालत ने मामले की सुनवाई 30 अक्तूबर तय की है।
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