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नौकरी से निकालने से नाराज सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने कंपनी का डाटा उड़ाया
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नई दिल्ली। उत्तर पश्चिम जिला की साइबर सेल ने मरीजों का डाटा रखने वाली कंपनी के सिस्टम को हैक कर हजारों मरीजों के डाटा डिलीट करने वालेे उसी कंपनी के पूर्व साफ्टवेयर इंजीनियर शाहदरा निवासी विकास शर्मा को गिरफ्तार किया है। आरोपी कंपनी में काम कर चुका था और लॉकडाउन के दौरान वेतन पर असहमत होने पर कंपनी ने उसे नौकरी से निकाल दिया था। नाराज आरोपी कंपनी को आर्थिक नुकसान पहुंचाने के लिए डाटा उड़ा दिया। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से एक लैपटॉप और राउटर बरामद किया है।
जिला पुलिस उपायुक्त विजयंता आर्या ने बताया कि मरीजों का डाटा रखने वाली कंपनी इजी सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ कुणाल अग्रवाल ने आदर्श नगर थाने में कंपनी के सिस्टम पर साइबर अटैक कर कुछ कोविड व अन्य अस्पतालों के मरीजों के डाटा डिलीट होने की शिकायत की। पुलिस आईपी एड्रेस व फोन प्रदाता के जरिए शाहदरा निवासी विकास शर्मा तक पहुंची और उसे गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में विकास ने बताया कि एमएससी (आईटी) कर वह इजी सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में वरिष्ठ सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर कार्यरत था। लॉकडाउन के दौरान वेतन को लेकर असहमत होने पर उसे कंपनी ने नौकरी से निकाल दिया। काम करने के दौरान उसे कंपनी के वेबसाइट की खामियों का पता था। वह कंपनी को आर्थिक नुकसान पहुंचाना चाहता था। इसलिए उसने उसने कंपनी के वेबसाइट पर चार साइबर अटैक कर 18 हजार मरीजों का डाटा हटा दिया। करीब तीन लाख मरीजों के बिल में गड़बड़ी कर दी और करीब 22 हजार फर्जी मरीजों का डाटा डाल दिया।
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जिला पुलिस उपायुक्त विजयंता आर्या ने बताया कि मरीजों का डाटा रखने वाली कंपनी इजी सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ कुणाल अग्रवाल ने आदर्श नगर थाने में कंपनी के सिस्टम पर साइबर अटैक कर कुछ कोविड व अन्य अस्पतालों के मरीजों के डाटा डिलीट होने की शिकायत की। पुलिस आईपी एड्रेस व फोन प्रदाता के जरिए शाहदरा निवासी विकास शर्मा तक पहुंची और उसे गिरफ्तार कर लिया।
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पूछताछ में विकास ने बताया कि एमएससी (आईटी) कर वह इजी सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में वरिष्ठ सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर कार्यरत था। लॉकडाउन के दौरान वेतन को लेकर असहमत होने पर उसे कंपनी ने नौकरी से निकाल दिया। काम करने के दौरान उसे कंपनी के वेबसाइट की खामियों का पता था। वह कंपनी को आर्थिक नुकसान पहुंचाना चाहता था। इसलिए उसने उसने कंपनी के वेबसाइट पर चार साइबर अटैक कर 18 हजार मरीजों का डाटा हटा दिया। करीब तीन लाख मरीजों के बिल में गड़बड़ी कर दी और करीब 22 हजार फर्जी मरीजों का डाटा डाल दिया।
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