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जीडीपी का छह फीसदी शिक्षा पर खर्च का कानून बने : मनीष सिसोदिया
Tue, 08 Sep 2020 01:27 AM IST
नोएडा ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 08 Sep 2020 01:27 AM IST
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दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया
- फोटो : Twitter
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दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने केंद्र से जीडीपी का छह फीसदी शिक्षा पर खर्च करने का कानून बनाने की मांग रखी है। सिसोदिया सोमवार को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर आयोजित डिजिटल सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हर घंटे एक छात्र आत्महत्या करता है। परीक्षा परक शिक्षा का दबाव खत्म होना चाहिए। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में अभी इसे लागू करने की कार्ययोजना का अभाव है। इस नीति को लागू करने पर अच्छी तरह चिंतन करके ठोस कार्ययोजना बनानी चाहिए, ताकि यह महज एक अच्छे विचार तक सीमित न रह जाए।
सिसोदिया ने कहा कि 20 साल शिक्षा लेने के बाद भी 80 फीसदी छात्रों को रोजगार योग्य नहीं समझा जाता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में वोकेशनल शिक्षा की बात कही गई है। अभी लगभग 80 फीसदी डिग्रीधारी युवाओं को रोजगार के योग्य नहीं समझा जाता है। हमें सोचना होगा कि 20 साल की पढ़ाई के बाद भी हमारे बच्चे यदि रोजगार प्राप्त नहीं कर सके, तो कहां कमी रह गई। वोकेशनल और किसी अन्य विषय में स्नातक डिग्री में कोई अंतर नहीं होना चाहिए।
सिसोदिया ने कहा कि आजादी के 73 साल बाद भी हम लॉर्ड मैकाले का नाम लेकर अपनी सरकारों की कमियां छिपाते हैं। वर्ष 1968 और 1986 में नई शिक्षा नीति बनाई गई। उन नीतियों का कार्यान्वयन नहीं करने की नाकामियों को छिपाने के लिए मैकाले का बहाना बनाया जाता है। आजादी के इतने साल बाद तक हमें अपनी शिक्षा नीति लागू करने से मैकाले ने नहीं रोका है। पिछली दो शिक्षा नीतियों का क्या किया गया, इस पर आत्ममंथन होना चाहिए। वहीं, उन्होंने नई शिक्षा नीति में छोटे बच्चों की शिक्षा को शामिल करने का स्वागत करते हुए कहा कि हमें शिक्षा के माध्यम से विकसित देशों का मुकाबला करना है।
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सिसोदिया ने कहा कि 20 साल शिक्षा लेने के बाद भी 80 फीसदी छात्रों को रोजगार योग्य नहीं समझा जाता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में वोकेशनल शिक्षा की बात कही गई है। अभी लगभग 80 फीसदी डिग्रीधारी युवाओं को रोजगार के योग्य नहीं समझा जाता है। हमें सोचना होगा कि 20 साल की पढ़ाई के बाद भी हमारे बच्चे यदि रोजगार प्राप्त नहीं कर सके, तो कहां कमी रह गई। वोकेशनल और किसी अन्य विषय में स्नातक डिग्री में कोई अंतर नहीं होना चाहिए।
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सिसोदिया ने कहा कि आजादी के 73 साल बाद भी हम लॉर्ड मैकाले का नाम लेकर अपनी सरकारों की कमियां छिपाते हैं। वर्ष 1968 और 1986 में नई शिक्षा नीति बनाई गई। उन नीतियों का कार्यान्वयन नहीं करने की नाकामियों को छिपाने के लिए मैकाले का बहाना बनाया जाता है। आजादी के इतने साल बाद तक हमें अपनी शिक्षा नीति लागू करने से मैकाले ने नहीं रोका है। पिछली दो शिक्षा नीतियों का क्या किया गया, इस पर आत्ममंथन होना चाहिए। वहीं, उन्होंने नई शिक्षा नीति में छोटे बच्चों की शिक्षा को शामिल करने का स्वागत करते हुए कहा कि हमें शिक्षा के माध्यम से विकसित देशों का मुकाबला करना है।
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