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2008 दिल्ली सीरियल ब्लास्ट: होश आया तो खुद को अस्पताल में पाया... काश अच्छे काम से जाना जाता बाटला हाउस
Tue, 16 Mar 2021 03:16 AM IST
Vikas Kumar
पुरुषोत्तम वर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
पुरुषोत्तम वर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Tue, 16 Mar 2021 03:16 AM IST
सार
-शकील अहमद बम धमाकों में बुरी तरह घायल हो गए थे और साढ़े तीन महीने वह राममनोहर लोहिया अस्पताल में रहे
-शकील अहमद साकेत कोर्ट का फैसला सुनने आए थे
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शकील अहमद
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
वर्ष 2008 में दिल्ली में हुए सीरियल बम धमाकों में बुरी तरह घायल हुए इटावा, यूपी निवासी शकील अहमद ने आरिज को फांसी की सजा सुनाने पर खुशी जताई। शकील अहमद बम धमाकों में बुरी तरह घायल हो गए थे और साढ़े तीन महीने वह राममनोहर लोहिया अस्पताल में रहे थे। शकील का कहना है कि उनका एक पैर करीब-करीब खराब हो चुका है और उनके मुंह से हर रोज आतंकियों के लिए बददुआ निकलती है। वह चाहते हैं कि सभी आतंकियों को जल्द से जल्द फांसी की सजा हो।
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शकील अहमद फैसला सुनने सोमवार को साकेत कोर्ट आए थे। हालांकि, वह फैसला आने से पहले ही कोर्ट से चले गए थे। शकील अहमद ने बताया कि वह रेलवे की कैटरिंग इंस्पेक्टर महिला की कार चलाते थे। वह मिंटो रोड स्थित रेलवे कॉलोनी में रहती थी। वह इंस्पेक्टर को घर छोड़कर गाजियाबाद स्थित अपने घर जाने के लिए बाराखंभा रोड पर बस पकड़ने पहुंचे थे। वह गाजियाबाद ट्रेन से जाते थे। मगर इंटरलॉकिंग का काम होने के कारण उस समय गाजियाबाद के लिए ट्रेनें बंद थीं। इस कारण वह बस से जाते थे। जब वह बाराखंभा रोड पर बस पकडने पहुंचे तो शाम के साढ़े पांच या पौने छह बजे होंगे। कूड़ेदान से जोरदार धमाका हुआ।
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धमाके के साथ ही वह हवा में उछल गया और सड़क पर जाकर गिरा। उसे अस्पताल में होश आया। वह आरएमएल अस्पताल में साढ़े तीन वर्ष रहा। आरएमएल के डॉक्टरों ने उसका पैर बचाया। वह स्टैचर पर ही गाजियाबाद स्थित अपने घर गया था। उसे पैर की वजह से सुबह वॉशरूम जाने में काफी परेशानी होती है। इस कारण उसके मुंह से हर रोज आतंकियों के लिए बददुआ निकलती हैं। शकील अहमद का कहना है कि उसके बच्चे बड़े हो गए हैं। घर में पैसे की तंगी रहती है। उसे अभी तक कोई मुआवजा नहीं मिला है।
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