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बस रूट और एरिया के नाम के आधार पर स्कूल निर्धारित कर रहे दूरी

Thu, 25 Feb 2021 09:10 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 25 Feb 2021 09:10 PM IST
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schools determining distance on the basis of bus route and google map
नई दिल्ली। निजी स्कूलों में नर्सरी दाखिले की रेस जारी है। दाखिले की रेस में पड़ोस (दूरी) का मानक अभिभावकों को परेशान कर रहा है। दरअसल स्कूलों का दूरी को तय करने तरीका अलग-अलग है। स्कूलों ने जो अपने दाखिला मानक जारी किए हैं। उनमें कुछ स्कूल बस रूट, कुछ एरिया तो कुछ गूूगल मैप के आधार पर दूरी को नाप रहे हैं। इससे घर नजदीक होने के बावजूद भी बच्चे दूरी के अधिकतम अंकों से वंचित हो रहे हैं।
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स्कूल ने अपने मानकों में पड़ोस (नेबरहुड-दूरी) के लिए 20 से 80 अंक तक दे रहे हैं। कुछ स्कूल ऐसे हैं जिन्होंने इस मानक के लिए कॉलोनियों के नाम को शामिल किया है। पश्चिम विहार स्थित नियो कॉन्वेंट ने एरिया की लोकेशन और विकास पुरी स्थित ऑक्सफोर्ड सीनियर सेकेंडरी स्कूल ने एरिया के हिसाब से अंक तय किए हैं। मदर इंटरनेशनल स्कूल कॉलोनी से दूरी को नाप रहा है। वहीं माउंट कॉरमेल बस रूट के हिसाब से दूरी तय कर रहा है।
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स्कूलों ने पड़ोस के मानक में जिन कॉलोनियों को शामिल किया है, उसी के आधार पर बच्चे को अंक दे रहे हैैं। जिन कॉलोनी में बच्चे रह रहे हैं वह स्कूल की कॉलोनी की सूची में शामिल नहीं है। इस कारण स्कूल के पास रहने के बाद भी उन्हें इस मानक के अंक नहीं मिल रहे हैं।
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वहीं कुछ कॉलोनी ऐसी हैं जहां से स्कूल और घर की दूरी काफी कम है, लेकिन स्कूल की बस का रूट वहां नहीं है। इससे दूरी का दायरा ज्यादा हो रहा है। गूगल से दूरी मापने से इलाकों की दूरी अधिक हो रही है जबकि स्कूल के पास का इलाका है।

एडमिशन नर्सरी डॉट कॉम प्रमुख सुमित वोहरा कहते हैं कि दूरी तय करने का सबसे प्रामाणिक तरीका गूगल मैप है। यह भेदभावपूर्ण नहीं है क्योंकि इसमें कोई हेरफेर नहीं किया जा सकता है। जबकि बस मार्ग और इलाके की दूरी से अंक देने का तरीका सही नहीं है क्योंकि इससे आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले अभिभावकों के बच्चे भी अंकों से वंचित हो रहे हैं।
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