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जंतर मंतर पर नारेबाजी मामला : सेव इंडिया फाउंडेशन के अध्यक्ष को मिली जमानत
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नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने जंतर मंतर पर एक समुदाय के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने के मामले में आरोपी एवं सेव इंडिया फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रीत सिंह की जमानत स्वीकार कर ली। आरोपी ने हाल ही में कहा था कि हिंदू राष्ट्र की मांग करना गैरकानूनी नहीं है।
न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने जमानत स्वीकार करते हुए कहा, पेश रिपोर्ट में स्पष्ट है कि आरोपी घटना स्थल से दोपहर 2 बजे चला गया था जबकि आपत्तिजनक नारेबाजी शाम 4 बजे शुरू हुई। अदालत ने कहा कि आरोपी को 9 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था और तभी से वह न्यायिक हिरासत में है। उससे पूछताछ की जरूरत नहीं है। ऐसे में वे जमानत स्वीकार करती हैं।
अदालत ने आरोपी की जमानत 50 हजार रुपये के निजी मुचलके व एक अन्य जमानत राशि पर स्वीकार की है। अदालत ने उसे बिना अदालत की इजाजत के देश से बाहर जाने पर रोक लगाते हुए जांच में सहयोग करने व गवाहों से संपर्क न करने का निर्देश दिया है।
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आरोपी की ओर से पेश अधिवक्ता विष्णु शंकर ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल को फर्जी मामले में फंसाया गया है। उनके मुवक्किल पर जंतर मंतर पर एक कार्यक्रम में एक समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक भाषण व टिप्पणियां करने का आरोप है जबकि उसने ऐसी कोई टिप्पणी नहीं की। इसके अलावा जेल में उनके मुवक्किल की तबीयत खराब हो रही है, इसे देखते हुए उसे जल्द जमानत प्रदान की जाए।
अदालत ने कहा था कि प्रथम दृष्टया रिकॉर्ड पर पेश साक्ष्यों व अभियोजन पक्ष के तर्कों से स्पष्ट है कि आरोपी ने कार्यक्रम के आयोजन के मुख्य आयोजक के रूप में सक्रिय भूमिका निभाई। हालांकि दिल्ली पुलिस ने इस आयोजन को मंजूरी देेने से इनकार कर दिया था। इसके अलावा यह आयोजन भारत सरकार द्वारा जारी किए गए कोविड-19 प्रोटोकॉल की पूर्ण अवहेलना करके जंतर मंतर पर आयोजित किया गया।
निचली अदालत ने प्रीत सिंह को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा था कि आरोपी स्पष्ट रूप से अन्य सहयोगियों के साथ भड़काऊ भाषणों में सक्रिय रूप से शामिल था। वह कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर दिए गए भाषणों में भड़काऊ भाषण से अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकता। इतना ही नहीं वह उक्त कार्यक्रम का सह-आयोजक भी था।
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न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने जमानत स्वीकार करते हुए कहा, पेश रिपोर्ट में स्पष्ट है कि आरोपी घटना स्थल से दोपहर 2 बजे चला गया था जबकि आपत्तिजनक नारेबाजी शाम 4 बजे शुरू हुई। अदालत ने कहा कि आरोपी को 9 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था और तभी से वह न्यायिक हिरासत में है। उससे पूछताछ की जरूरत नहीं है। ऐसे में वे जमानत स्वीकार करती हैं।
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अदालत ने आरोपी की जमानत 50 हजार रुपये के निजी मुचलके व एक अन्य जमानत राशि पर स्वीकार की है। अदालत ने उसे बिना अदालत की इजाजत के देश से बाहर जाने पर रोक लगाते हुए जांच में सहयोग करने व गवाहों से संपर्क न करने का निर्देश दिया है।
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आरोपी की ओर से पेश अधिवक्ता विष्णु शंकर ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल को फर्जी मामले में फंसाया गया है। उनके मुवक्किल पर जंतर मंतर पर एक कार्यक्रम में एक समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक भाषण व टिप्पणियां करने का आरोप है जबकि उसने ऐसी कोई टिप्पणी नहीं की। इसके अलावा जेल में उनके मुवक्किल की तबीयत खराब हो रही है, इसे देखते हुए उसे जल्द जमानत प्रदान की जाए।
अदालत ने कहा था कि प्रथम दृष्टया रिकॉर्ड पर पेश साक्ष्यों व अभियोजन पक्ष के तर्कों से स्पष्ट है कि आरोपी ने कार्यक्रम के आयोजन के मुख्य आयोजक के रूप में सक्रिय भूमिका निभाई। हालांकि दिल्ली पुलिस ने इस आयोजन को मंजूरी देेने से इनकार कर दिया था। इसके अलावा यह आयोजन भारत सरकार द्वारा जारी किए गए कोविड-19 प्रोटोकॉल की पूर्ण अवहेलना करके जंतर मंतर पर आयोजित किया गया।
निचली अदालत ने प्रीत सिंह को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा था कि आरोपी स्पष्ट रूप से अन्य सहयोगियों के साथ भड़काऊ भाषणों में सक्रिय रूप से शामिल था। वह कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर दिए गए भाषणों में भड़काऊ भाषण से अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकता। इतना ही नहीं वह उक्त कार्यक्रम का सह-आयोजक भी था।