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दिल्ली : 74 परिवारों की खुशियां लौटाने वाली सुनीता को सलाम, कई बार मिला है सम्मान
Mon, 28 Feb 2022 05:34 AM IST
दुष्यंत शर्मा
पुरुषोत्तम वर्मा, नई दिल्ली
पुरुषोत्तम वर्मा, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 28 Feb 2022 05:34 AM IST
सार
दिल्ली पुलिस की महिला सिपाही ने आठ माह में ढूंढ निकाले हैं 74 बच्चे। अब तक सबसे ज्यादा बच्चे तलाशने का खिताब भी मिला।
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महिला सिपाही सुनीता
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
पश्चिमी जिले के एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (मानव तस्करी रोधी इकाई, एएचटीयू) में तैनात महिला सिपाही सुनीता दीदी के जज्बे को सलाम है। उन्होंने आठ माह में 74 परिवारों की खुशियां लौटाई हैं। अब तक सबसे ज्यादा बच्चों को ढूंढने वाली सुनीता दिल्ली पुलिस की पहली महिला सिपाही बन गई हैं। वह कहती हैं...दूसरों की खुशियां लौटाना ही उनका कर्तव्य है। जिले के पुलिस अधिकारियों ने उनके प्रमोशन के लिए मुख्यालय को पत्र लिखा है।
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राजस्थान के झुंझुनू की रहने वाली सुनीता 10 नवंबर, 2014 में दिल्ली पुलिस में बतौर सिपाही भर्ती हुई थी। वह पीसीआर, सी4आई, कमांड रूम सीपीसीआर, पीएचक्यू व पश्चिमी जिले के सीनियर सिटीजन में तैनात रही है। इसके बाद उनकी तैनाती पश्चिमी जिले के एएचटीयू में हुई है। इस दौरान उन्होंने महज आठ महीने में 74 बच्चों को उनके परिवारों से मिलवा दिया। इनमें से 15 बच्चे आठ वर्ष के हैं और अन्य की उम्र आठ से 16 वर्ष के बीच है।
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सुनीता के अनुसार, 13 सितंबर 2021 को उन्हें ऐसा लगा कि जैसे उनके परिवार में खुशियां लौट आई हैं। स्वरूप नगर से एक मूक बधिर किशोरी अपने घर से लापता हो गई थी। वह पढ़ी-लिखी भी नहीं थी। बच्ची के मिलने की आस छोड़कर उसके माता-पिता बिहार लौट चुके थे, लेकिन सुनीता ने किशोरी को हरी नगर से ढूंढ निकाला। उसके माता-पिता को बिहार से दिल्ली बुलाया और किशोरी को 13 सितंबर को उसके माता-पिता से मिलवा दिया।
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कई बार मिल चुका सम्मान
दिल्ली के किसी परिवार का बच्चा लापता होने की खबर जैसे ही सुनीता को मिलती है तो वह सक्रिय हो जाती हैं। एएचटीयू में तैनाती होने के कारण उनकी ड्यूटी गुम व अपहृत बच्चों को ढूंढने की है। वह कहती हैं कि दूसरों की खोई खुशियों को लौटाकर उन्हें अच्छा लगता है। वह जिपनेट से लापता हुए बच्चों की फोटो का स्क्रीनशॉट लेकर अपने मोबाइल व लैपटॉप में सेव कर लेती हैं। इसके बाद दिल्ली में स्थित आश्रम गृह में उनकी तलाश करती हैं। उन्होंने तीन दिन में ही चार बच्चों को खोज निकाला है। जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने सुनीता को कई बार कई प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया है।
50 बच्चे ढूंढने पर मिलती है बारी से पहले तरक्की
पूर्व पुलिस आयुक्त एसएन श्रीवास्तव ने वर्ष 2019 में एक नीति बनाई थी कि जो पुलिसकर्मी 50 से ज्यादा लापता या अपहृत बच्चों को ढूंढता तो उसे बारी से पहले तरक्की दी जाएगी। पश्चिमी जिले के पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सुनीता को भी बारी से पहले तरक्की देने के लिए पुलिस मुख्यालय को सिफारिश की जा रही है।
सीमा ढाका से मिली थी प्रेरणा
सुनीता कहती हैं कि उन्हें समयपुर बादली थाने में तैनात एएसआई सीमा ढाका से प्रेरणा मिली है। ढाका ने 53 से ज्यादा बच्चों को ढूंढा है। इतनी बढ़ी संख्या में बच्चों को ढूंढने में सीमा को बारी से पहली तरक्की देकर हवलदार से एएसआई बनाया गया था।