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Hindi News ›   Delhi ›   Rohini Cyber police station arrested fraudster from Hyderabad

शातिर ठग का नया तरीका: कभी बनता दोस्त तो कभी रिश्तेदार, फिर मांगता पैसा; अंत में फोन कर देता बंद

Wed, 14 Jun 2023 06:52 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: अनुज कुमार Updated Wed, 14 Jun 2023 06:52 PM IST
सार

दिल्ली साइबर क्राइम टीम ने व्हाट्सएप पर खुद को दोस्त बताकर मेडिकल इमरजेंसी के नाम पर ठगी करने वाले को हैदराबाद से गिरफ्तार किया है। इसके पास से वारदात में इस्तेमाल मोबाइल और दो सिमकार्ड बरामद हुए हैं।

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Rohini Cyber police station arrested fraudster from Hyderabad
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

यदि आपके मोबाइल पर किसी अज्ञात नंबर से कोई कॉल आए और कॉलर खुद को आपके दोस्त का दोस्त बताकर मदद मांगे तो जरा सावधान हो जाएं। कहीं ऐसा न हो कि यह कोई शातिर ठग हो। जी हां... रोहिणी जिला के साइबर थाना पुलिस ने ऐसे ही ठगी करने वाले एक बदमाश को हैदराबाद इलाके से गिरफ्तार किया है।

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मेडिकल इमरजेंसी के नाम पर करता था ठगी
पकड़े गए आरोपी की पहचान महाराष्ट्र के बीड निवासी 31 वर्षीय विशाल लोडा के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपी के पास से वारदात में इस्तेमाल मोबाइल फोन और दो सिमकार्ड बरामद किए हैं। आरोपी पीड़ितों का विश्वास जीतने के लिए उनके दोस्त या रिश्तेदार की फोटो खुद की डीपी में लगा लेता था। इसलिए पीड़ित बड़े आराम से इसको रुपये दे भी देते थे।

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आरोपी को परिवार ने कर दिया था बेदखल
छानबीन के दौरान पता चला कि आरोपी को कसीनो जाकर जुआ खेलने की लत है। इसकी वजह से परिवार ने विशाल को घर से बेदखल भी कर रखा है। आरोपी अहमदाबादे, गोवा और हैदराबाद में अपनी लोकेशन जल्दी-जल्दी बदलता है। पुलिस पकड़े गए आरोपी से पूछताछ कर मामले की छानबीन कर रही है। रोहिणी जिला के पुलिस उपायुक्त डॉ. गुरइकबाल सिंह सिद्धू ने बताया कि पिछले दिनों रोहिणी निवासी अशोक कुमार अरोड़ा नामक व्यक्ति ने ठगी की शिकायत साइबर थाने को दी थी।

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पीड़ित ने बताया कि 12 मार्च को उनके मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉलर ने खुद को उनके ऑफिस में काम करने वाले व्यक्ति का दोस्त बताया। पीड़ित से आरोपी ने कहा कि वह इस समय विदेश में है, भारत में उसकी बहन का इलाज होना है। विदेश में नेटवर्क की वजह से वह बहन को पैसे नहीं दे पा रहा है। यदि संभव हो तो वह बहन के अकाउंट में पैसे डाल दे। भारत आते ही वह फौरन पैसे लौटा देखा। पीड़ित ने कॉलर की व्हाट्सएप डीपी देखी तो कॉलर सही लगा।

पैसे लेकर फोन कर देता था बंद
पीड़ित ने दो बार में आरोपी के खाते में 75 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए। रुपये भेजने के बाद उसने दोबारा पैसे मिले या नहीं जानने के लिए उसी नंबर पर कॉल किया, लेकिन नंबर नहीं मिला। पीड़ित ने अब अपने सहकर्मी के दोस्त को कॉल किया तो उसने बताया कि उसने कोई रुपये नहीं मांगे। मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई।

ऐसे पकड़ा गया आरोपी
जिन खातों में रकम ट्रांसफर हुई थी और जिन नंबरों से कॉल हुई। पुलिस ने उसकी जांच की। टेक्निकल सर्विलांस की मदद से पता चला कि बीड, महाराष्ट्र के एक गांव का रहने वाला है। वहां पहुंचने पर पता चला कि पिछले कई सालों से आरोपी अपने घर भी नहीं पहुंचा है। सीडीआर से उसकी लोकेशन का पता किया गया। जांच में पता चला कि आरोपी जल्दी-जल्दी अपनी लोकेशन बदलकर कभी अहमदाबाद, गोवा तो कभी हैदराबाद आता-जाता रहता है। पुलिस की एक टीम ने उसको ट्रेस करना शुरू किया। बाद में उसे हैदराबाद से दबोच लिया। आरोपी ने बताया कि जुए में भारी नुकसान होने के बाद उसने ठगी शुरू की। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है।

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