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हेमैटो-ओंकोलॉजी के क्षेत्र में हुई तरक्की पर केंद्रित रहेगा आरजीकॉन 2020

Sat, 08 Feb 2020 01:05 PM IST
Trainee Trainee न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Trainee Trainee Updated Sat, 08 Feb 2020 01:05 PM IST
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Rajiv gandhi Cancer institute and research center organises Orzicon 2020 
राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर - फोटो : अमर उजाला
राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर (आरजीसीआईआरसी) द्वारा 7-9 फरवरी 2020 के दौरान नई दिल्ली में आयोजित होने जा रहे 119वें अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस आरजीकॉन 2020 में हेमैटो-ओंकोलॉजी सेक्टर में हुए सभी अहम अपडेट पर फोकस रहेगा। हेमैटो-ओंकोलॉजी में ल्युकेमिया, लिंफोमा, मायलोमा, एनीमिया, हीमोफीलिया, सिकल सेल डिजीज, थैलेसेमिया समेत अन्य अंगों के कैंसर शुमार हैं। 
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आरजीकॉन का संचालन 
आरजीकॉन 2020 के संचालक सचिव (ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी) और आरजीसीआईआरसी के हेमैटो-ओंकोलॉजी एवं बोन मैरो ट्रांसप्लांट विभाग के डायरेक्टर डॉ. दिनेश भूरानी ने कहा, “हेमैटोलॉजी, हेमैटो-ओंकोलॉजी और स्टेम सेल ट्रांसप्लांट के क्षेत्र के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ इलाज की वर्तमान पद्धतियों को लेकर अपने विचार साझा करने और लेक्चर देने के लिए कार्यक्रम में प्रतिभाग के लिए प्रतिबद्ध हैं। 
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इस बार आयोजन में खास बात यह भी होगी कि इसमें अमेरिकन सोसायटी ऑफ हेमैटोलॉजी (एएसएच) और अमेरिकन सोसायटी ऑफ क्लीनिकल ओंकोलॉजी (एएससीओ) और अन्य आयोजनों के नवीनतम अपडेट भी यहां चर्चा के केंद्र में रहेंगे।“
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आरजीसीआईआरसी में जेनिटो यूरो-ओंकोलॉजी सर्विसेज के प्रमुख व मेडिकल डायरेक्टर डॉ. सुधीर कुमार रावल ने कहा, “आरजीकॉन का लक्ष्य विगत वर्षों में ओंकोलॉजी एवं हेमैटोलॉजी के क्षेत्र में हुई तरक्की पर चर्चा के लिए देश-विदेश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों को एक मंच पर लाना तथा विशेषज्ञों एवं अन्य प्रतिनिधियों के बीच बेहतर परिचर्चा का अवसर देना है। आरजीकॉन 2020 में भी हमें देश-विदेश की प्रतिष्ठित हस्तियों को एक मंच पर लाने का सौभाग्य मिला है।“

आरजीकॉन 2020 की एक अन्य खूबी मायलोमा के मरीजों को साथ लाना भी है। इस दौरान कार-टी सेल ट्रीटमेंट पाने वाला चीन का एक मायलोमा मरीज भी उपस्थित रहेगा और अपना अनुभव साझा करेगा। डॉ. भूरानी ने बताया कि पिछले वर्षों में हेमैटो-ओंकोलॉजी के क्षेत्र में कुछ उल्लेखनीय कार्य हुए हैं। 

ब्लड कैंसर का इलाज कीमोथेरेपी से होता है, वहीं कुछ मामलों में बोन मैरो ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है। अब ब्लड कैंसर के इलाज के क्षेत्र में टार्गेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी तेजी से कीमोथेरेपी की जगह ले रहे हैं। इम्यूनोथेरेपी के तहत शरीर की अपनी टी-कोशिकाओं को कैंसर कोशिकाओं के खात्मे के लिए तैयार किया जाता है।

भारत में कुल कैंसर में 20 प्रतिशत मामले ब्लड कैंसर के होते हैं। अलग-अलग उम्र में अलग-अलग तरह के ब्लड कैंसर होते हैं। बच्चों में ल्यूकेमिया होता है, जबकि बड़ी उम्र में मुख्यतः लिंफोमा और मायलोमा होता है। ब्लड कैंसर के बारे में बताते हुए डॉ. भूरानी ने बताया कि आमतौर पर ब्लड कैंसर का कोई सीधा कारण नहीं हैं। कोशिकाओं में जेनेटिक बदलाव के कारण ब्लड कैंसर होता है और आमतौर पर ऐसी कोई वजह नहीं है, जिसका ध्यान रखते हुए इससे बचाव हो सके।

ब्लड कैंसर के लक्षणों में बुखार और ल्यूकेमिया के मामले में नाक, मुंह आदि से खून आना और लिंफोमा के मामले में गले में गांठ आदि शुमार हैं। राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर को वर्तमान समय में एशिया के प्रतिष्ठित कैंसर केयर सेंटर में शुमार किया जाता है। यहां इलाज के लिए नवीनतम टेक्नोलॉजी की सुविधा उपलबध है। 


साथ ही इलाज करने के लिए प्रतिष्ठित सुपर स्पेशलिस्ट भी हैं। अपनी शुरुआत से अब तक आरजीसीआईआरसी ने 2 लाख से ज्यादा मरीजों को इलाज उपलब्ध कराया है। आरजीसीआईआरसी ने ओंकोलॉजी, हेमैटोलॉजी और बोन मैरो ट्रांसप्लांटेशन के क्षेत्र में भारत के साथ-साथ दुनियाभर में सम्मान कराया है।
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