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प्रदूषण: दिल्ली की हवा सिगरेट के धुएं से ज्यादा हानिकारक, बढ़ सकते हैं कोरोना के मामले, एम्स निदेशक ने किया आगाह
Sat, 06 Nov 2021 07:45 PM IST
सुशील कुमार कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सुशील कुमार कुमार
Updated Sat, 06 Nov 2021 07:45 PM IST
सार
रणदीप गुलेरिया ने बताया कि हर साल दिवाली और सर्दियों के समय उत्तरी भारत में पराली जलाने, पटाखों, दूसरी वजहों से दिल्ली और पूरे इंडो गैंजेटिक बेल्ट में स्मॉग होता है और कई दिनों तक विजिबिलिटी बहुत खराब रहती है।
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डॉ. रणदीप गुलेरिया, निदेशक, दिल्ली एम्स
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
दिवाली के बाद दिल्ली की हवा बेहद खराब हो गई है और एक्यूआई गंभीर श्रेणी में पहुंच गया है। लोगों की सांस और आंखों की खुजली की परेशानी बढ़ गई है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने आगाह करते हुए कहा कि प्रदूषण से कोरोना के मामले में बढ़ोतरी हो सकती है।
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उन्होंने कहा कि दिल्ली की हवा सिगरेट के धुएं से ज्यादा हानिकारक हो गई है। प्रदूषण के चलते लोगों का जीवनकाल भी काफी कम हो गया है। कहा कि अध्ययनों से पता चला है कि दिल्ली के निवासियों की जीवन अवधि काफी कम हो गई है।
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एक अंग्रेजी चैनल से खास बातचीत में एम्स निदेशक ने कहा कि प्रदूषित क्षेत्रों में कोविड की गंभीरता काफी बढ़ जाती है। मरीजों के फेफड़ों में अधिक सूजन हो जाती है। जिससे कोरोना के मामले में बढ़ोतरी हो सकती है।
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वहीं, दिल्ली की हवा लोगों के गले में खराश, आंखों में जलन, सांस में तकलीफ दो रही है। खासकर बुजुर्ग, छोटे बच्चे और हाल ही में कोरोना से ठीक हुए गंभीर मरीजों की दिक्कत बढ़ गई है। रणदीप गुलेरिया ने शुक्रवार को बताया कि हर साल दिवाली और सर्दियों के समय उत्तरी भारत में पराली जलाने, पटाखों, दूसरी वजहों से दिल्ली और पूरे इंडो गैंजेटिक बेल्ट में स्मॉग होता है और कई दिनों तक विजिबिलिटी बहुत खराब रहती है। इसका सांस के स्वास्थ्य पर बहुत असर होता है।
उन्होंने कहा कि हमने एक अध्ययन किया है, जिसमें हमने देखा कि जब भी प्रदूषण का स्तर ज्यादा होता है तो उसके कुछ दिन बाद बच्चों और व्यस्कों में सांस की समस्या की इमरजेंसी विजिट बढ़ जाती है। ये तय है कि प्रदूषण से सांस की समस्या बढ़ जाती है। डॉक्टरों के अनुसार, प्रदूषण के कारण दिल्ली के सभी अस्पतालों में मरीज पहुंच रहे हैं।