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पुलिस पेश नहीं कर पाई देवांगना के भड़काऊ भाषण का कोई वीडियो, कोर्ट ने जमानत याचिका पर सुरक्षित रखा फैसला
Sat, 22 Aug 2020 03:01 AM IST
नोएडा ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 22 Aug 2020 03:01 AM IST
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देवांगना कलीता
- फोटो : सोशल मीडिया
हाईकोर्ट ने उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगा मामले में पुलिस से कहा कि वह कथित रूप से भड़काऊ भाषण देने के आरोप में गिरफ्तार पिंजरा तोड़ समूह की सदस्य देवांगना कलीता का लोगों की भड़काते हुए वीडियो पेश करे। इस दौरान अदालत ने कलीता की याचिका पर दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
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न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत ने जेएनयू की छात्रा एवं पिंजरा तोड़ समूह की सदस्य देवांगना कलीता की निचली अदालत में जमानत याचिका खारिज होने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की।
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याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पुलिस से उस वक्त का वीडियो पेश करने के लिए कहा जब कलीता कथित रूप से दंगे के दौरान लोगों को उपद्रव करने के लिए भड़का रही थीं। हालांकि पुलिस ने कहा कि दंगे के दौरान लोगों को भड़काने का वीडियो नहीं है, लेकिन 24 और 25 फरवरी को हुए दंगे से पहले के ऐसे वीडियो हैं, जिनमें वह भड़काऊ भाषण दे रही हैं।
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पुलिस ने कहा कि उसके पास 22 तथा 23 फरवरी के भी वीडियो हैं जब नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के बाहर बड़ी संख्या में लोग प्रदर्शन कर रहे थे। पुलिस ने आरोप लगाया कि कलीता ने लोगों को सीएए के विरोध में भड़काया था।
इस पर न्यायमूर्ति ने कहा कि मुझे उस भाषण का कोई अंश दिखाइए जिसे मीडिया या किसी अन्य ने रिकॉर्ड किया हो, जिसमें कलीता भीड़ को अपराध करने के लिए उकसा रही हों। कोर्ट ने कहा कि उस दौरान हर तरफ मीडिया की मौजूदगी थी और वे रिकार्डिंग कर रहे थे। कोर्ट जानना चाहती है कि कलीता ने क्या कहा जिससे भीड़ भड़की।
वहीं पुलिस की ओर से अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल एस वी राजू ने कहा कि 25 फरवरी को घटना के वक्त कोई मीडिया नहीं था और गवाहों के बयान भीड़ को उकसाने में कलीता की भूमिका को दर्शाते हैं। इसके बाद पीठ ने जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित लिया।