{"_id":"60a807bf8ebc3e2db80cf8a9","slug":"plea-to-fix-the-rate-of-hrct-ashram-news-noi583071517","type":"story","status":"publish","title_hn":"एचआरसीटी टेस्ट की दरें तय करने की मांग को लेकर जनहित याचिका दायर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एचआरसीटी टेस्ट की दरें तय करने की मांग को लेकर जनहित याचिका दायर
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नई दिल्ली। कोविड-19 लक्षणों वाले रोगियों के लिए राजधानी में हाई रेशोलेशन कंप्यूटरीकृत टोमोग्राफी (एचआरसीटी) परीक्षण, सीटी स्कैन की दरों को तय करने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। अदालत ने याचिका पर 31 मई तय की है।
दरअसल याचिका मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आई लेकिन उनके अवकाश पर होने के कारण सुनवाई 31 मई तय की गई है। हाल ही में इस मुद्दे पर एक अन्य खंडपीठ भी दिल्ली सरकार से जवाब मांग चुकी है।
याचिकाकर्ता शिवलीन पसरीचा ने अधिवक्ता अमरेश आनंद के माध्यम से दायर याचिका में कहा कि वर्तमान में दिल्ली में एचआरसीटी की कीमत अनियमित है। इसकी दरें पांच से साढ़े छह हजार रुपये के बीच हैं। यह आम व्यक्ति की भुगतान क्षमता से बाहर है। उन्होंने कहा कि एचआरसीटी/सीटी स्कैन/टेस्ट की कीमत को महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, पंजाब और मध्य प्रदेश की राज्य सरकारों ने पहले ही बहुत कम कीमत पर तय किया हुआ है जबकि दिल्ली के अस्पताल में ज्यादा कीमत वसूली जा रही है।
विज्ञापन
याची ने कहा वर्तमान कोविड-19 लहर में कई मामलों में जहां आरटी-पीसीआर जांच रिपोर्ट नकारात्मक आ रही हैं। वहीं कई रोगियों का एचआरसीटी जांच के बाद कोविड-19 का इलाज किया जा रहा है। ऐेसे में वर्तमान परिदृश्य में एचआरसीटी कोविड-19 रोगियों के इलाज, प्रबंधन और उपचार के लिए बहुत प्रासंगिक और महत्वपूर्ण हो गया है।
याची ने कहा कि एचआरसीटी न केवल फेफड़ों में वायरस की मौजूदगी का पता लगाता है बल्कि संक्रमण की गंभीरता को भी दर्शाता है। एचआरसीटी रिपोर्ट में मुख्य रूप से दो निष्कर्ष दिए गए हैं- एक सह-रेड स्कोर (कोविड-19 संक्रमण के संदेह का स्तर) और एक चक्र सीमा (सीटी) मूल्य स्कोर, जो रोग/संक्रमण की गंभीरता और विशिष्टता को निर्धारित करता है।
याची ने कहा कि वर्तमान कठिन समय के दौरान लोगों के वित्तीय बोझ को कम करने के लिए दिल्ली सरकार को इस टेस्ट के रेट तय करने का निर्देश दिया जाए।
विज्ञापन
दरअसल याचिका मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आई लेकिन उनके अवकाश पर होने के कारण सुनवाई 31 मई तय की गई है। हाल ही में इस मुद्दे पर एक अन्य खंडपीठ भी दिल्ली सरकार से जवाब मांग चुकी है।
विज्ञापन
याचिकाकर्ता शिवलीन पसरीचा ने अधिवक्ता अमरेश आनंद के माध्यम से दायर याचिका में कहा कि वर्तमान में दिल्ली में एचआरसीटी की कीमत अनियमित है। इसकी दरें पांच से साढ़े छह हजार रुपये के बीच हैं। यह आम व्यक्ति की भुगतान क्षमता से बाहर है। उन्होंने कहा कि एचआरसीटी/सीटी स्कैन/टेस्ट की कीमत को महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, पंजाब और मध्य प्रदेश की राज्य सरकारों ने पहले ही बहुत कम कीमत पर तय किया हुआ है जबकि दिल्ली के अस्पताल में ज्यादा कीमत वसूली जा रही है।
विज्ञापन
याची ने कहा वर्तमान कोविड-19 लहर में कई मामलों में जहां आरटी-पीसीआर जांच रिपोर्ट नकारात्मक आ रही हैं। वहीं कई रोगियों का एचआरसीटी जांच के बाद कोविड-19 का इलाज किया जा रहा है। ऐेसे में वर्तमान परिदृश्य में एचआरसीटी कोविड-19 रोगियों के इलाज, प्रबंधन और उपचार के लिए बहुत प्रासंगिक और महत्वपूर्ण हो गया है।
याची ने कहा कि एचआरसीटी न केवल फेफड़ों में वायरस की मौजूदगी का पता लगाता है बल्कि संक्रमण की गंभीरता को भी दर्शाता है। एचआरसीटी रिपोर्ट में मुख्य रूप से दो निष्कर्ष दिए गए हैं- एक सह-रेड स्कोर (कोविड-19 संक्रमण के संदेह का स्तर) और एक चक्र सीमा (सीटी) मूल्य स्कोर, जो रोग/संक्रमण की गंभीरता और विशिष्टता को निर्धारित करता है।
याची ने कहा कि वर्तमान कठिन समय के दौरान लोगों के वित्तीय बोझ को कम करने के लिए दिल्ली सरकार को इस टेस्ट के रेट तय करने का निर्देश दिया जाए।