फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Petition dismissed by legal heir of Bahadur Shah Zafar second seeking the capture of Red Fort

दिल्ली: बहादुर शाह जफर द्वितीय की कानूनी उत्तराधिकारी द्वारा लाल किले पर कब्जा दिलवाने की मांग संबंधी याचिका खारिज

Mon, 20 Dec 2021 08:29 PM IST
सुशील कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: सुशील कुमार Updated Mon, 20 Dec 2021 08:29 PM IST
सार

अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आपने अपने इस दावे का समर्थन करने के लिए कोई दस्तावेज नहीं दिया कि याचिकाकर्ता अंतिम मुगल सम्राट से संबंधित है।

विज्ञापन
Petition dismissed by legal heir of Bahadur Shah Zafar second seeking the capture of Red Fort
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : प्रतापगढ़

विस्तार

उच्च न्यायालय ने अंतिम मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर द्वितीय की कानूनी उत्तराधिकारी का दावे कर लाल किले पर कब्जा दिलवाने की मांग संबंधी याचिका खारिज कर दी। याची सुल्ताना बेगम ने दावा किया है कि उत्तराधिकारी होने के चलते लाल किले पर उसका हक बनता है।

विज्ञापन


न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने सुनवाई के दौरान याची के अधिवक्ता से सवाल किया कि आपके मुवक्किल के परिवार को इस मुद्दे पर अपना हक जताने के लिए अदालत में आने में 150 साल से अधिक की देरी क्यों हुई। उन्होंने कहा मेरा इतिहास बहुत कमजोर है, लेकिन आप दावा करते हैं कि 1857 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा आपके साथ अन्याय किया गया था। देश के स्वतंत्र होने के बाद भी आपने ने चुप्पी साघे रखी, आपने 150 वर्षों से अधिक की देरी क्यों है? इतने सालों से आप क्या कर रहे थे?
विज्ञापन


अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आपने अपने इस दावे का समर्थन करने के लिए कोई दस्तावेज नहीं दिया कि याचिकाकर्ता अंतिम मुगल सम्राट से संबंधित है। इसके अलावा आपने कोई विरासत चार्ट दाखिल नहीं किया है। हर कोई जानता है कि बहादुर शाह जफर को अंग्रेजों ने निर्वासित कर दिया था, लेकिन अगर उनके वारिसों ने कोई याचिका दायर नहीं की तो क्या वह ऐसा कर सकती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


याचिकाकर्ता के वकील ने सुल्ताना बेगम को अनपढ़ महिला बताते हुए देरी को सही ठहराने की कोशिश की। हालांकि, अदालत ने तर्क को खारिज कर दिया और कहा कि समय पर कदम क्यों नहीं उठाए गए, इसका कोई औचित्य नहीं है। ऐसे में वे याचिका खारिज करती है। सुल्ताना बेगम ने अधिवक्ता विवेक मोरे के माध्यम से दायर अपनी याचिका में दावा किया कि वह बहादुर शाह जफर द्वितीय के परपोते की विधवा है। 


उन्होंने तर्क दिया कि 1857 में स्वतंत्रता के पहले युद्ध के बाद ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा उनके परिवार को उनकी संपत्ति से वंचित कर दिया गया था, जिसके बाद बहादुर शाह जफर को देश से निर्वासित कर दिया गया था और लाल किले का कब्जा मुगलों से छीन लिया गया। ऐसे में लालकिले पर उनकी मुवक्किला का परिवारिक हक बनता है और सरकार को कब्जा उनकी मुवक्किला को देने का निर्देश दिया जाए। अदालत द्वारा याचिका खारिज करने का फैसला सुनते ही केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने टिप्पणी की कि वह आभारी हैं कि सरकार लाल किले से वंचित नहीं रही।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed