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दिल्ली के लिए नया नहीं है नर्स बनाम सरकारी अस्पताल विवाद, होते रहे हैं प्रदर्शन

Mon, 07 Jun 2021 05:34 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली 
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली  Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 07 Jun 2021 05:34 AM IST
सार

  • कई वर्षों से अलग अलग अस्पतालों में हो चुके हैं विरोध प्रदर्शन
  • केंद्र से लेकर दिल्ली सरकार और निगम तक के अस्पतालों में हुई हैं घटनाएं

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nurse vs government hospital controversy not new to Delhi
gb pant hospital - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जीबी पंत अस्पताल में क्षेत्रीय भाषा को लेकर उठा विवाद भले ही अब शांत हो चुका है लेकिन नर्सिंग कर्मचारियों को भी इस बात का पता है कि यह विवाद एक प्रशासनिक स्तर की गलती है जिसके तहत आदेश में क्षेत्रीय भाषा का नाम नहीं लिखना चाहिए था। मरीजों का हवाला देकर सामान्य भाषा का इस्तेमाल करना उचित है ताकि संवाद में कोई समस्या न आ सके। बहरहाल दिल्ली के लिए ऐसे मामले नए नहीं है। नर्सिंग बनाम डॉक्टर, नर्सिंग बनाम सरकारी अस्पताल की घटनाएं कई वर्षों से देखने को मिल रही हैं।

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 केंद्र से लेकर दिल्ली सरकार और नगर निगम के अस्पतालों तक में ऐसी घटनाएं हुई हैं। दो साल पहले सफदरजंग अस्पताल में कैनुला को लेकर डॉक्टर बनाम नर्स का मामला सामने आया था। इस दौरान यह कहते हुए विवाद शुरू हुआ कि मरीज को कैनुला लगाने का अधिकार हमारा नहीं है। इस बात पर विवाद इतना बढ़ा कि तीन दिन तक अस्पताल में हड़ताल चलती रही। 
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ठीक इसी तरह जीबी पंत अस्पताल में भी साल 2017 और 2018 में वेतन इत्यादि मांग कोलेकर भी प्रबंधन के खिलाफ काफी हंगामा हुआ और उस दौरान भी प्रबंधन के बेतुके आदेशों को वापस लेना पड़ा। साल 2018 में ही लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल में नर्सिंग बनाम अस्पताल की घटना हुई जब 100 बिस्तर वाले अस्पताल में बगैर नियुक्ति 195 बेड पर मरीजों को भर्ती किए जाने लगा। यह मामला भी कई दिनों तक सुर्खियों में रहा। 
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वहीं एम्स, आरएमएल सहित दूसरे अस्पतालों में भी ऐसी घटनाएं हुई हैं। बहरहाल दिल्ली नर्सेज फेडरेशन के सचिव लीलाधर बताते हैं कि जीबी पंत अस्पताल का आदेश एक अलग मुद्दा है जोकि प्रशासनिक तौर पर गलत किया गया लेकिन दिल्ली सरकार में पिछले 11 साल से नर्सिंग ऑफिसर का एक भी प्रमोशन नहीं हुआ है, छठवां वेतन को लेकर अब तक समाधान नहीं है। 15 सालों से ठेके पर काम कर रहे कर्मचारी अब तक नियमित नहीं हुए हैं। इन मुद्दों पर कभी इतनी बात नहीं की गई जितनी कि जीबी पंत की घटना को लेकर है। वहीं सफदरजंग अस्पताल से प्रेमरोज बताती हैं कि प्रबंधन से जुड़े मुद्दे लंबे समय से देखने को मिल रहे हैं। नर्सिंग कर्मचारियों को एक प्रकार से कमजोर समझते हुए हमेशा अलग रखा जाता है।


व्यवहार पर उठते रहे हैं सवाल
जीबी पंत अस्पताल की घटना इसलिए सामने आई क्योंकि किसी ने स्वास्थ्य सचिव को शिकायत की। वहां से आदेश निदेशक को मिला और उन्होंने अपने अधीन अधिकारी को सौंप दिया। अधिकारी ने भी अलग ही परिचय देते हुए सख्त आदेश जारी कर दिया। यह पूरी घटना इसलिए है क्योंकि अस्पतालों में अक्सर कर्मचारी एक दूसरे से क्षेत्रीय भाषाओं में बात करने लगते हैं। कई बार यहां तक शिकायत हुई है कि मरीज से क्षेत्रीय भाषा में अभद्रता की गई हो। जबकि इसके पीछे और भी कई कारण हैं। दिल्ली में हरियाणा, राजस्थान, पश्चिम उत्तर प्रदेश, पंजाब के अलावा दक्षिण और उत्तर पूर्वी राज्यों से नर्सिंग कर्मचारी हैं। दिल्ली के आसपास इलाकों के कर्मचारियों की मातृभाषा की झलक उनकी आवाज में साफ सुनाई देती है। कई बार यह भी नोंकझोक का एक कारण बनता है। मरीजों से तू-तड़ाक के मामले भी अक्सर सामने आते हैं। 

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