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बेचैनी में गुजरी निर्भया के चारों गुनहगारों की रात, छोड़ दिया है खाना-पीना

Thu, 09 Jan 2020 02:00 AM IST
नोएडा ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: नोएडा ब्यूरो Updated Thu, 09 Jan 2020 02:00 AM IST
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Nirbhaya's culprits went on a night of restlessness
nirbhaya accused - फोटो : अमर उजाला

मौत की तारीख मुकर्रर होने के साथ ही निर्भया के चारों गुनहगारों की रात बेचैनी में गुजरी। मंगलवार रात को सभी दोषी रात भर जागते रहे। चारों ने मंगलवार रात से ही एक हद तक खाना-पीना छोड़ दिया है। सजा की सूचना मिलने के बाद से ही सभी दोषी किसी से बातचीत तक नहीं कर रहे हैं। मंगलवार रात को सोने से पहले सभी सेल की तलाशी ली गई।

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जेल सूत्रों के अनुसार अक्षय तो सारी रात बैठा रहा। वहीं बाकी तीनों मुकेश, पवन और विनय लेट तो गए, लेकिन उनको नींद नही आई। रातभर करवटें बदलते रहे। सुबह के समय उनको सेल में ही नाश्ता दिया गया।
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लेकिन सभी ने नाश्ता भी ठीक से नहीं किया। दिन में कुछ देर के लिए अक्षय की आंख जरूर लग गई। लेकिन बाकी तीनों दोषी बिल्कुल नहीं सोए। जेल अधिकारियों का कहना है कि फांसी की तारीख का पता चलने के बाद कैदियों का बर्ताव ऐसा ही होता है। मंगलवार शाम को चारों ने न के बराबर खाना खाया। बुधवार को भी इनकी यही हालत रही।

बुधवार सुबह और शाम चारों दोषियों की हुई मेडिकल जांच
बुधवार सुबह आठ और शाम को छह बजे सभी दोषियों की मेडिकल जांच की गई। जांच के दौरान मनोचिकित्सक भी मौजूद रहे। जेल सूत्रों का कहना है कि चारों दोषियों में सबसे ज्यादा अक्षय भयभीत है। अक्षय की ओर से कहा जा रहा है कि वह 22 जनवरी से पहले सुप्रीम कोर्ट में अपनी क्यूरेटिव पिटीशन फाइल करेगा।


उम्मीद की जा रही है कि बाकी दोषी भी ऐसा कर सकते हैं। क्यूरेटिव पिटीशन के अलावा इन सभी के पास अभी राष्ट्रपति के पास दया याचिका भेजने का भी मौका है।

जानकारी के अनुसार चारों दोषियों में अक्षय ही शादीशुदा है। उसके बच्चे भी हैं। जेल मैनुअल के हिसाब से डेथ वारंट जारी होने के बाद फांसी से पहले की सभी तरह की कार्रवाई शुरू कर दी जाती हैं। इसमें परिजनों को भी दोषियों से मिलवाया जाता है। उनकी अंतिम इच्छा भी पूरी करने की बात होती है।

मनोचित्किसक दोषियों से मिलकर उनकी मनोदशा की पड़ताल करते हैं। दूसरी ओर जेल सूत्रों का कहना है कि क्यूरेटिव पिटीशन के बाद यदि इनकी फांसी की तारीख टल जाती है तो दोबारा फांसी के लिए इनका डेथ वारंट लिया जाएगा। इसके लिए जेल प्रशासन की ओर से दोबारा कोर्ट में नई तारीख ली जाएगी।

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