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Delhi Bomb Blast Case: तीन और आरोपियों के खिलाफ एनआईए की चार्जशीट, अब तक 13 नामजद; आतंकी साजिश के नए खुलासे
Sat, 27 Jun 2026 09:55 PM IST
Rahul Kumar Tiwari
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Rahul Kumar Tiwari
Updated Sat, 27 Jun 2026 09:55 PM IST
सार
दिल्ली के लाल किले के पास हुए कार बम धमाके के मामले में एनआईए ने फरार बच्चों के डॉक्टर समेत तीन और आरोपियों के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की है। इसके साथ ही मामले में आरोपियों की संख्या 13 हो गई है। जांच में आतंकी साजिश के नए पहलुओं का भी खुलासा हुआ है।
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दिल्ली में हुए धमाके में जले वाहन
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने पिछले साल दिल्ली के लाल किले के पास हुए कार बम धमाके के मामले में फरार बच्चों के डॉक्टर समेत तीन और आरोपियों के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की है। इसके साथ ही इस मामले में चार्जशीट किए गए आरोपियों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है। इनमें मुख्य आरोपी डॉ. उमर उन नबी भी शामिल हैं, जो विस्फोटकों से भरी कार चला रहा था और धमाके में उसकी मौत हो गई थी। एनआईए ने पटियाला हाउस कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में जम्मू-कश्मीर निवासी जमीर अहमद अहंगर, तुफैल अहमद भट और फरार मुजफ्फर अहमद उर्फ फराज या जफर को आरोपी बनाया है।
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जांच एजेंसी के अनुसार, मुजफ्फर अहमद बच्चों का डॉक्टर है और वह सह-आरोपी डॉ. अदील अहमद राथर का बड़ा भाई है। एनआईए ने उसे अंसार गजवत-उल-हिंद (एजीयूएच) इंटरिम का संस्थापक सदस्य बताया है, जो अल-कायदा से जुड़ा आतंकी संगठन है। जांच में सामने आया है कि मुजफ्फर उन मुख्य साजिशकर्ताओं में शामिल था, जिन्होंने सह-आरोपी डॉ. उमर उन नबी, मुजम्मिल, अदील और मुफ्ती इरफान के साथ मिलकर 10 नवंबर 2025 को लाल किले के पास कार में विस्फोटक लगाकर धमाका करने की साजिश रची थी। इस धमाके में 11 लोगों की मौत हुई थी।
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एनआईए के अनुसार, मुजफ्फर जून 2022 में श्रीनगर में हुई एक गुप्त ईदगाह बैठक में भी शामिल हुआ था, जहां एजीयूएच इंटरिम की स्थापना की गई थी। जांच में यह भी पता चला कि वह फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी में उमर और मुजम्मिल द्वारा संचालित गुप्त ठिकाने पर टीएटीपी आधारित इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईडी) बनाने, उसकी टेस्टिंग और सुरक्षित रखने के काम में सक्रिय रूप से शामिल था। टीएटीपी एक ऐसा विस्फोटक है जिसे घरेलू स्तर पर भी तैयार किया जा सकता है। मुजफ्फर के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया है और उसकी तलाश जारी है।
जांच एजेंसी ने बताया कि जमीर अहमद अहंगर आतंकी मॉड्यूल के ओवरग्राउंड वर्कर के रूप में काम करता था। वह हैंडलर्स के संपर्क में रहकर मॉड्यूल तक हथियार, गोला-बारूद और नकदी पहुंचाने का काम करता था। वहीं तुफैल अहमद भट, जो पहले पाकिस्तान स्थित प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का ओवरग्राउंड वर्कर रह चुका है, इस मॉड्यूल के लिए हथियार सप्लाई करता था। जांच में पता चला कि उसने एक हैंडलर के जरिए 'डेड ड्रॉप' पद्धति से एक एके-47, एक क्रिंकोव राइफल, एक पिस्टल, मैगजीन और कारतूस हासिल किए और उन्हें मुख्य आरोपी डॉ. उमर उन नबी को तीन लाख रुपये में पहुंचाया था।
एनआईए ने बताया कि मामले की जांच अभी जारी है। एजेंसी ने फोरेंसिक जांच, साजिश से जुड़े स्थानों की जियो-लोकेशन मैपिंग और वित्तीय लेनदेन के विश्लेषण के जरिए आरोपियों के बीच संबंधों के महत्वपूर्ण सबूत जुटाए हैं।
एनआईए ने बताया कि मामले की जांच अभी जारी है। एजेंसी ने फोरेंसिक जांच, साजिश से जुड़े स्थानों की जियो-लोकेशन मैपिंग और वित्तीय लेनदेन के विश्लेषण के जरिए आरोपियों के बीच संबंधों के महत्वपूर्ण सबूत जुटाए हैं।