{"_id":"77bf2002f5c290d221b5edd318b7baa3","slug":"vote-against-entrance-test-today-in-jnu","type":"story","status":"publish","title_hn":"एंट्रेंस टेस्ट के विरोध में मतदान आज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एंट्रेंस टेस्ट के विरोध में मतदान आज
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Mon, 07 Oct 2013 01:29 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के लाल दुर्ग में छात्रों ने अपनी मांग रखने के लिए अनोखी पहल शुरू की है।
विज्ञापन
छात्र लैंग्वेज प्रोग्राम में एंट्रेंस टेस्ट बंद करवाने के लिए प्रदर्शन नहीं, बल्कि मतदान के जरिय पक्ष रखेंगे। इसके आधार पर आगे फैसला लिया जाएगा।
जेएनयू कैंपस में सोमवार को लैंग्वेज प्रोग्राम के 25 सौ छात्र मतदान करेंगे। लैंग्वेज डिपार्टमेंट में सुबह 9 से 5 बजे के बीच वोटिंग होगी।
इसमें बीए व एमए लैंग्वेज प्रोग्राम के छात्र शामिल होंगे। सोमवार देर रात मतदान के नतीजे आ जाएंगे।
जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष अकबर चौधरी के अनुसार, यूनिवर्सिटी में चार साल पहले तक बीए-एमए लैंग्वेज प्रोग्राम में दाखिले एंट्रेंस से नहीं होते थे, बल्कि बीए के छात्रों को तीसरे वर्ष की परीक्षा पास करते ही सीधे एमए लैंग्वेज में एडमिशन मिल जाता था।
चार साल पहले जब जेएनयू में छात्रसंघ चुनाव पर रोक लगी थी तो प्रबंधन ने नया नियम लागू करते हुए एमए में एंट्रेंस टेस्ट शुरू कर दिया।
छात्रसंघ अध्यक्ष के अनुसार, बीए व एमए लैंग्वेज प्रोग्राम में कुल 25 सौ सीट हैं। एंट्रेंस टेस्ट काफी मुश्किल होने के चलते सीट भर ही नहीं पाती हैं और जो छात्र जेएनयू में बीए लैंग्वेज में पढ़ाई करते हैं, वे टेस्ट पास न कर पाने के चलते उच्च शिक्षा से वंचित रह जाते हैं।
विज्ञापन
वे अपनी बात प्रबंधन तक पहुंचाने के लिए मतदान का प्रयोग कर रहे हैं। इसका नतीजा मंगलवार को स्कूल ऑफ लैंग्वेज बोर्ड ऑफ स्ट्डीज की बैठक में रखा जाएगा, जिसमें सभी विभागों के प्रोफेसर, डीन व चेयरपर्सन शामिल होंगे।
विज्ञापन
इसके बाद नतीजे को 24 अक्टूबर को होने वाली एकेडमिक काउंसिल की बैठक में उठाया जाएगा।
छात्र पीयूष राज के अनुसार, आरटीआई में उन्होंने प्रबंधन से जानकारी मांगी थी, जिसमें साफ हुआ कि स्कूल ऑफ लैंग्वेज में अरेबिक और पारसी विभाग को छोड़कर अन्य सभी में 40 से 50 फीसदी सीट खाली रह जाती हैं। जबकि ड्रॉप आउट आंकड़ा भी 30 से 40 फीसदी पहुंच गया है।