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'हर्ष' के साथ्ा मान गए ‘विजय’
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Thu, 24 Oct 2013 01:30 AM IST
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शह और मात के खेल में ‘हर्ष’ के साथ ‘विजय’ मान गए हैं, लेकिन अपनी राजनीति को उन्होंने जिंदा रखा है।
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पिछले आठ महीने से सीएम पद के उम्मीदवारी का दावा करने वाले विजय गोयल अब केंद्र की राजनीति का रुख कर सकते हैं।
लंबी जद्दोजहद के बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विजय गोयल पार्टी नेतृत्व के सामने हार गए।
बुधवार को जब डॉ. हर्षवर्धन के नाम की घोषणा हो रही थी तो वे राजनीति के मझे हुए खिलाड़ी के रूप में अपने को पेश किया। जबकि इस खींचतान में कई बार ऐसा लगा कि गोयल पार्टी अध्यक्ष पद छोड़ सकते हैं।
गोयल ने लड्डू खिलाकर हर्षवर्धन को बधाई दी। दरअसल अंदरखाने उन्हें इस बात का आश्वासन दिया गया कि उनकी राजनीति दिल्ली तक ही सीमित नहीं है।
इससे आगे आसमां और भी हैं की राह पर पार्टी नेतृत्व ने उनके लिए केंद्र में जगह देने का आश्वासन दिया है।
सूत्रों की अगर मानें तो आडवाणी, राजनाथ, रामलाल ने उन्हें इसके लिए मनाया। आडवाणी जब प्रेस को संबोधित कर रहे थे तो वे गोयल की तारीफ में कई बातें कह गए।
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वहीं, राजनाथ के साथ मिलकर उन्होंने कहा कि गोयल ने की थी हर्षवर्धन के नाम पर सहमति।
पार्टी सूत्रों की अगर मानें तो वे राज्यसभा में भी जा सकते हैं। हालांकि उनके टीम नेतृत्व को आकलन कर ही उन्हें केंद्र की राजनीति में तरजीह दी जाएगी।
लिहाजा विजय गोयल के लिए यह भी चुनौती है कि वे सबसे पहले दिल्ली फतह कराएं।
यही वजह है कि विजय गोयल डॉ. हर्षवर्धन की ताजपोशी के समय कूल-कूल दिखें।
हालांकि अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी के सामने हार स्वीकार करना गोयल के लिए बेहद ही मुश्किल साबित हो सकता है।