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फर्जी मामलों पर अदालत ने जताई नाराजगी
अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 18 Oct 2013 01:44 AM IST
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नई दिल्ली की अदालत ने अपहरण व दुष्कर्म के फर्जी मामले दर्ज करवाने की प्रक्रिया पर नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा ऐसे मामलों के कारण ही दुष्कर्म व अपहरण के असली मामलों में अपराध की गंभीरता कम हो जाती है।
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अदालत ने दुष्कर्म के आरोप से युवक को रिहा करते हुए कहा स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता अपने प्रेमी के साथ स्वेच्छा से गई थी लेकिन माता-पिता की डांट से बचने के लिए फर्जी मामला दर्ज करवा दिया।
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द्वारका अदालत स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विरेंद्र भट्ट ने अपने फैसले में ऐसे मामलों पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि लड़की अपनी इच्छा से अपने प्रेमी के साथ भाग जाती है।
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वे दोनों अपने रिश्ते बनाते है और फिर घर लौट आते हैं। इसके बाद लड़की माता-पिता की डांट से बचने के लिए आसानी से अपने अपहरण व दुष्कर्म की फर्जी कहानी बना देती है।
अदालत ने कहा इस प्रकार के फर्जी मामलों से दुष्कर्म के मामले भी तुच्छ हो जाते है और अपराध की गंभीरता कम हो जाती है।
अदालत ने मामले में आरोपी बनाए गए युवक को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। उस पर अपनी गर्भवती पत्नी की देखभाल के लिए गांव से आई उसकी बहन से दुष्कर्म व अपहरण करने का आरोप था।
अभियोजन पक्ष के अनुसार वर्ष 2008 में आरोपी पीड़िता को जम्मू ले गया व उसकी मांग में सिंदूर भर दिया कि वह उसकी पत्नी हो गई।
पीड़िता ने स्वयं को उसकी पत्नी मान लिया व दोनों ने शारीरिक संबंध बनाए। अदालत ने पीड़िता के बयानों को संदेह के दायरे में लेते हुए आरोपी को बरी कर दिया।