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विरासत बढ़ाने और बचाने की जंग
अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 29 Nov 2013 02:15 AM IST
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नई दिल्ली में भाजपा के दिग्गज नेता रहे साहिब सिंह वर्मा की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने में उनके बेटे प्रवेश वर्मा के पसीने छूटे हुए हैं।
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दिल्ली विधानसभा चुनाव में महरौली क्षेत्र में उनकी टक्कर दिल्ली कांग्रेस के दिग्गज डॉ. योगानंद शास्त्री से है। डॉ. शास्त्री के समक्ष अपनी और अपने ससुर की विरासत बचाने की चुनौती है।
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प्रवेश की नैया पार कराने के लिए पूरा परिवार और रिश्तेदार लगे हुए हैं। वहीं, डॉ. शास्त्री की जीत सुनिश्चित करने के लिए भी कांग्रेसी नेता रिश्तेदार एवं दोस्त पसीना बहा रहे हैं।
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दिल्ली की किसी जमाने में राजधानी रही महरौली में काफी रोचक मुकाबला बन गया है। एक ओर कांग्रेस के लगातार तीन बार से विधायक चुने जा रहे डॉ. योगानंद शास्त्री मैदान में हैं, वहीं दूसरी ओर प्रवेश वर्मा भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं।
प्रवेश वर्मा पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं। खास बात यह है कि चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाने वाले दोनों उम्मीदवारों की ग्रामीणों में करीब-करीब बराबर की पैठ है।
प्रवेश वर्मा को उनके पिता पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह के चलते लाभ मिल रहा है, जबकि डॉ. योगानंद शास्त्री को इस क्षेत्र से वर्तमान में विधायक होने के साथ-साथ पिछले 15 वर्ष से दिल्ली सरकार में महत्वपूर्ण पद रहने का फायदा हो रहा है।
इसके अलावा उनको अपने ससुर चौ. हीरा सिंह की हैसियत का भी लाभ प्राप्त हो रहा है। वह वर्ष 1972 में मंत्री रह चुके हैं।
दोनों उम्मीदवारों को जिताने के लिए उनके करीबी रिश्तेदारों के साथ-साथ करीब-करीब सभी गांवों के प्रमुख लोग जोर लगा रहे हैं।
प्रवेश वर्मा के चुनाव की कमान संभालने के लिए उनके ससुर पूर्व केंद्रीय विक्रम वर्मा, भाजपा के प्रवक्ता एवं उनकी बहन के जेठ कैप्टन अभिमन्यु महरौली में ही डेरा डाले हुए हैं।
वहीं डॉ. योगानंद शास्त्री के चुनाव में उनके समधी पूर्व सांसद चौ. तारीफ सिंह के अलावा हरियाणा के कई बड़े नेता सभाएं कर रहे हैं।
उधर दोनों नेताओं को भितरघात एवं बगावत का सामना करना पड़ रहा है। महरौली से टिकट नहीं मिलने से दक्षिणी दिल्ली नगर निगम की मेयर सरिता चौधरी काफी नाराज हैं।
इसी तरह यहां से पिछला चुनाव लड़े शेर सिंह डागर के समर्थकों ने भी सरिता चौधरी के समर्थकों की तरह प्रवेश वर्मा का काफी विरोध किया।
वहीं कांग्रेस से अलग होकर पिछला चुनाव निर्दलीय के तौर पर लड़े पूर्व मेयर सतवीर सिंह इस बार डॉ. शास्त्री को हरवाने के लिए भाजपा के साथ जुड़ गए हैं।
2008 में परिसीमन के बाद क्या बदला विधानसभा के नक्शे में
विधानसभा क्षेत्र (45)-वर्ष 1993 से दिल्ली विधानसभा के मानचित्र पर स्थापित महरौली क्षेत्र में वर्ष 2008 में परिसीमन के दौरान महिपालपुर क्षेत्र के कुछ इलाके शामिल किए गए थे, जबकि इसके पुराने कुछ इलाकों को शामिल करके छतरपुर नया विधानसभा क्षेत्र बना दिया। इस क्षेत्र में पहले दो बार भाजपा और उसके बाद दो बार कांग्रेस ने जीत हासिल की है।