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प्लेटलेट्स कम हैं तो तरल पदार्थ पिएं

Sun, 22 Sep 2013 01:45 AM IST
संतोष कुमार/नई दिल्ली
संतोष कुमार/नई दिल्ली Updated Sun, 22 Sep 2013 01:45 AM IST
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drink fluids when platelets are low

नई दिल्ली फिलहाल डेंगू से खौफजदा है। प्लेटलेट्स का डाटा सिर चढ़कर बोल रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि डेंगू के अधिकांश मामलों में प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत ही नहीं होती।

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साथ ही किसी अन्य बुखार में भी प्लेटलेट्स कम हो सकती हैं। ऐसे में जाहिर है कि निजी अस्पताल व पैथोलॉजी का मुनाफे का खेल भी प्लेटलेट्स की मांग बढ़वा रहा है।
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डॉक्टरों के अनुसार, डेंगू के मरीज को नियमित तौर पर हर घंटे तरल पदार्थ दिया जाना चाहिए। ब्लड प्रेशर, मधुमेह, हार्ट अटैक जैसे रोगियों और बुजुर्गों व नवजात शिशुओं पर थोड़ा ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।
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डॉक्टरों के अनुसार, डेंगू के एक हजार मामलों में सिर्फ चार गंभीर होते हैं। जबकि सटीक इलाज न मिलने से 100 सीरियस मरीजों में से चार की मौत हो सकती है।

डॉ. केके अग्रवाल के मुताबिक, डेंगू से ज्यादा लोग निमोनिया की चपेट में आने से जान गंवा देते हैं। डेंगू हर चौथे साल में महामारी का रूप लेता है।

हो सकता है कि अक्तूबर के आखिर तक डेंगू मरीजों की संख्या एक लाख तक पहुंच जाए, लेकिन इससे डरने की जरूरत नहीं। बुखार उतरने के दो दिन के भीतर सेहत एकदम ठीक हो जाएगी।

निजी अस्पताल व पैथोलॉजी उठा रहे फायदा
चिकित्सकों का कहना है कि प्लेटलेट्स के लिए मची मारामारी का फायदा कई निजी अस्पताल व पैथोलॉजी उठा रहे हैं। पैथोलॉजी के साथ मिलीभगत कर चिकित्सक सामान्य मरीजों को भी गंभीर बताने में नहीं चूकते।

जबकि डेंगू के 95 फीसदी मामलों को तरल और प्लाज्मा से ठीक किया जा सकता है। इन्हें प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ती। लिहाजा बेवजह घबराकर प्लेटलेट्स चढ़वाने की जिद करना हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों को दावत दे सकता है।

मशीन से गिनती हमेशा नहीं रहती ठीक
मैक्स हॉस्पिटल के डॉ. मुकेश मेहरा का कहना है कि अगर प्लेटलेट्स खत्म हो रही हैं तो जरूरी नहीं कि ऊपरी डोज ज्यादा फायदेमंद हो। कुछ घंटे के अंदर वह भी टूट जाएगी।

मशीन से प्लेटलेट्स की गिनती बहुत भरोसेमंद नहीं होती। इसी कारण बड़े अस्पताल इसे मैनुअली भी चेक करते हैं। लिहाजा प्लेटलेट्स कम होने पर आतंकित होने की जगह डॉक्टर की निगरानी में तरल पदार्थ लेते रहें।


पपीते के पत्ते की मांग बढ़ी
डॉक्टरों का नजरिया बेशक साफ न हो, लेकिन डेंगू के बढ़ते मामलों के बीच पपीते के पत्ते की मांग बढ़ गई है। लोगों का मानना है कि पपीते का पत्ता रोग ठीक करने में मदद करता है।

आनंद विहार नर्सरी के एक कर्मचारी ने बताया कि इस समय रोजाना करीब तीस लोग पपीते का पौधा खरीद रहे हैं, जो इस समय 15 की जगह 30 रुपये का बिक रहा है।

इस बारे में डॉ. मुकेश ने बताया कि आंवला, तुलसी व दूसरे रंगीन फलों से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। पपीते के साथ भी यही संभव है।

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