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कांग्रेस ने तीस सीटों पर दो से चार का तय किया पैनल
अमर उजाला/ नई दिल्ली
Updated Sat, 02 Nov 2013 01:25 AM IST
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दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर कौन प्रत्याशी मैदान में उतरेगा, इसके लिए स्क्रीनिंग कमेटी ने तीस सीटों पर पैनल तैयार कर लिया है।
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इससे पूर्व वर्तमान विधायक वाली 43 सीट में से 40 पर करीब-करीब सहमति का दावा प्रदेश अध्यक्ष जेपी अग्रवाल कर चुके हैं।
हालांकि दो मंत्री समेत 13 विधायकों का विरोध खुलकर सामने आ चुका है। दो दिन में दो मंत्री समेत सात विधायकों को अन्य दावेदार व संगठन पदाधिकारियों के सामने बैठाकर मामला सुलझाने की कोशिश की जा चुकी है।
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हालांकि शुक्रवार को कराए जाने वाली बैठक टाल दी गई है। सूत्रों के अनुसार बृहस्पतिवार को स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक आधी रात तक चली।
उसमें एक-एक सीट के दावेदारों पर चर्चा हुई। बताते हैं कि नारायण सामी की अध्यक्षता वाली बैठक में प्रदेश प्रभारी शकील अहमद, मुख्यमंत्री शीला दीक्षित व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जेपी अग्रवाल ने दावेदार की क्षमता और कमी पर चर्चा की।
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सूत्रों के अनुसार स्क्रीनिंग कमेटी खूब मशक्कत के बाद भी किसी सीट पर एक नाम तय नहीं कर सकी।
कोशिश की गई कि दो नाम रखे जाएं लेकिन दावेदारों के दबाव और सदस्यों के बीच सहमति नहीं बनने के कारण कई सीटों पर तीन-तीन नाम तो करीब आधा दर्जन सीटों पर चार-चार दावेदारों के नाम केन्द्रीय चुनाव समिति तक बढ़ाने का फैसला किया गया है।
सूत्र बताते हैं कि ओखला से टिकट मांग रहे आसिफ मोहम्मद खान के सामने सांसद परवेज हाशमी अड़े हुए हैं तो दयानंद चंदेला और जसवंत राणा के मामले में भी क्षेत्रीय दबाव है।
वहीं डॉ. हर्षवर्धन के सामने हाल ही में भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए डॉ. वीके मोंगा और तिलक नगर से दलेर मेहंदी को टिकट दिये जाने पर कांग्रेस में विरोधी स्वर सामने आ रहे हैं।
इसके अलावा अपने-अपने आकाओं के पास चक्कर मार रहे दावेदारों के देखते हुए 7 नवंबर को केन्द्रीय चुनाव समिति से पूर्व स्क्रीनिंग कमेटी एक बार और बुलाए जाने की अटकलें भी लगाई जा रही हैं।
रिश्तेदारों के टिकट पर फैसला बाकी
विधायक मंगतराम सिंघल, मालाराम गंगवाल, दयानंद चंदेला, राज्यसभा सांसद परवेज हाशमी, महाबल मिश्रा समेत तमाम नेताओं के बेटे या पत्नी को टिकट दिये जाने के मामले में फैसला सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय चुनाव समिति करेगी।
पैनल बनाने में तय मानकों का रखा है ख्याल
कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि पैनल तैयार करते समय इस बात का ध्यान रखा गया है कि 10 हजार के अधिक अंतर से हारने वाले विधानसभा प्रत्याशी, दो बार निगम चुनाव हारने वाले प्रत्याशी, संज्ञेय अपराध में लिप्त दावेदार को शामिल न किया जाए।
हालांकि अंतिम सूची में नाम जोड़े जाएंगे या नहीं इस पर पार्टी के वरिष्ठ नेता कुछ भी बोलने से इनकार कर रहे हैं।