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डूसू चुनाव को लेकर आरोप-प्रत्यारोप शुरू

Fri, 09 Aug 2013 05:33 AM IST
New Delhi
New Delhi Updated Fri, 09 Aug 2013 05:33 AM IST
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नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संगठन चुनाव में नामांकन से पहले ही आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। छात्र संगठन अपनी उपलिब्धयों को गिनाने के बजाय दूसरों की खामियों को गिनाने में लग गए हैं। जीतने की आस लगाए एबीवीपी सुरक्षित कैंपस, शिक्षकों की नियुक्ति और नए कॉलेज खोलने के मुद्दे को लेकर मैदान में उतरेगी।
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एबीवीपी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए बताया कि किस तरह से एनएसयूआई महज वादा करती आई है। संगठन ने आरोप लगाया कि सत्ता में रहने केबावजूद एनएसयूआई ने छात्रों के हित के लिए कुछ नहीं किया। एनएसयूआई के छात्र नेता पूरे साल कैंपस से नदारद रहते हैं और चुनाव के समय इन्हें बसें चलाने की याद आती है। इतना ही नहीं, चार वर्षीय डिग्री प्रोग्राम को बिना चर्चा किए लागू कर दिया गया और डूसू सोता रहा।
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एबीवीवी के राष्ट्रीय महामंत्री उमेश दत्त ने कहा कि संगठन छात्र हित से जुड़े छोटे-छोटे मुद्दों के साथ छात्रों के बीच जाएगा। उन्होंने बताया कि एबीवीपी सुरक्षित कैंपस, नए कॉलेज खुलवाने, सांध्य कालीन कॉलेज खुलवाने, एकेडमिक स्तर को बेहतर बनाने जैसे मुद्दों पर चुनाव लड़ेगी। पिछले कुछ समय से भले ही कैंपस में छेड़छाड़ की घटनाओं में कमी आ रही हो फिर छात्रों की सुरक्षा एक अहम मुद्दा है।
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13 को करेगी प्रदर्शन करेगी एबीवीपी
एबीवीपी के राष्ट्रीय महामंत्री उमेश दत्त ने बताया कि 13 अगस्त को संगठन ने राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार देश की सबसे बड़ी बीमारी है। सरकार लगातार भ्रष्टाचारियों को बचा रही है, लेकिन देश का युवा वर्ग के खिलाफ खड़ा होगा।


मुख्य चुनाव अधिकारी को सुझाव
डूसू चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराने के लिए एबीवीपी के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य चुनाव अधिकारी प्रोफेसर अशोक वोहरा को सुझाव दिया। दिल्ली प्रदेश मंत्री रोहित चहल ने बताया कि सुझाव पत्र में कहा गया है कि लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों का सख्ती का पालन हो, जिससे पैसे और बाहुबल का इस्तेमाल न हो, वोटों की गिनती के समय हर संगठन के एजेंटों को वहां जाने की इजाजत मिले और वोटिंग मशीनों को सभी संगठनों के उम्मीदवारों के सामने बंद और खोला जाए।
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