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एक अदद डिग्री कॉलेज की दरकार
New Delhi
Updated Thu, 23 May 2013 05:30 AM IST
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नई दिल्ली। देश के विभिन्न राज्यों से बच्चे राजधानी में उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए आते हैं, लेकिन राजधानी का एक इलाका मीठापुर ऐसा भी है जहां आसपास कॉलेज न होने के कारण बच्चे उच्च शिक्षा पाने से वंचित हैं। परिवहन व्यवस्था भी दुरुस्त न होने के कारण दूर के कॉलेजों में भी नहीं जा पा रहे।
बदरपुर में तीन सीनियर सेकेंडरी स्कूल व मीठापुर में तीन सीनियर सेकेंडरी स्कूल व एक सेकेंडरी स्कूल है। हर वर्ष सैकड़ों की तादाद में छात्र-छात्राएं उत्तीर्ण होकर यहां से निकलते हैं। एक हजार से अधिक ऐसे छात्र-छात्राओं ने सुविधाओं के अभाव में पढ़ाई बीच में रोक दी है। अधूरी पढ़ाई करने वालों में लड़कियाें की तादाद अधिक है। उच्च शिक्षा हर हाल मे पाने की ललक रखने वाले छात्रों ने पत्राचार कोर्स का सहारा लिया है। यहां से देशबंधु कॉलेज, पीजी डीएवी कॉलेज, दयाल सिंह कॉलेज दस से बीस किलोमीटर दूर हैं। एक तो मीठापुर से लचर परिवहन व्यवस्था और सुबह शाम जाम पढ़ाई बीच में छोड़ने की मुख्य वजह मानी जा रही है। मीठापुर गांव निवासी व भारतीय निस्वार्थ जन जागृति संस्थान के अध्यक्ष पंडित शिव दयाल शर्मा मीठापुर-बदरपुर क्षेत्र में कॉलेज खुलवाने के लिए सांसद से लेकर संबंधित केंद्रीय मंत्री तक से गुहार लगा चुके हैं। इसके बावजूद समस्या जस की तस है। हालांकि यहां लंबे समय से कॉलेज नहीं खुलने से लोगों में रोष है। कई स्कूली बच्चाें का भविष्य भी अंधकार होने के साथ ही अधर में लटका है।
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बदरपुर में तीन सीनियर सेकेंडरी स्कूल व मीठापुर में तीन सीनियर सेकेंडरी स्कूल व एक सेकेंडरी स्कूल है। हर वर्ष सैकड़ों की तादाद में छात्र-छात्राएं उत्तीर्ण होकर यहां से निकलते हैं। एक हजार से अधिक ऐसे छात्र-छात्राओं ने सुविधाओं के अभाव में पढ़ाई बीच में रोक दी है। अधूरी पढ़ाई करने वालों में लड़कियाें की तादाद अधिक है। उच्च शिक्षा हर हाल मे पाने की ललक रखने वाले छात्रों ने पत्राचार कोर्स का सहारा लिया है। यहां से देशबंधु कॉलेज, पीजी डीएवी कॉलेज, दयाल सिंह कॉलेज दस से बीस किलोमीटर दूर हैं। एक तो मीठापुर से लचर परिवहन व्यवस्था और सुबह शाम जाम पढ़ाई बीच में छोड़ने की मुख्य वजह मानी जा रही है। मीठापुर गांव निवासी व भारतीय निस्वार्थ जन जागृति संस्थान के अध्यक्ष पंडित शिव दयाल शर्मा मीठापुर-बदरपुर क्षेत्र में कॉलेज खुलवाने के लिए सांसद से लेकर संबंधित केंद्रीय मंत्री तक से गुहार लगा चुके हैं। इसके बावजूद समस्या जस की तस है। हालांकि यहां लंबे समय से कॉलेज नहीं खुलने से लोगों में रोष है। कई स्कूली बच्चाें का भविष्य भी अंधकार होने के साथ ही अधर में लटका है।
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