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सीबीआई के पूर्व डीआईजी को जेल
New Delhi
Updated Tue, 26 Mar 2013 05:30 AM IST
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नई दिल्ली। वर्ष 1991 के जैन हवाला कांड में तीस हजारी अदालत ने सीबीआई के पूर्व डीआईजी को एक साल कैद की सजा सुनाई है। डीआईजी ने आरोपी जैन बंधुओं पर टाडा नहीं लगाने के लिए रिश्वत ली थी। दोषी अधिकारी की आयु और पृष्ठभूमि को देखते हुए अदालत ने उसे 25 मई तक 30 हजार के निजी मुचलके और एक जमानती की शर्त पर जमानत दी है। स्पेशल सीबीआई जज प्रदीप चड्ढा ने पूर्व सीबीआई डीआईजी ओपी शर्मा (75) को एक साल कैद और एक लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। अदालत ने ओपी शर्मा को सुरेंद्र जैन और जनेंद्र जैन को गिरफ्तार न करने के लिए रिश्वत मांगने का दोषी करार दिया। अदालत ने कहा कि दोषी ने रिश्वत लेकर देश की सुरक्षा के साथ समझौता किया, क्योंकि हवाला कारोबारी आतंक फैलाने वालों को धन उपलब्ध करवा रहे थे। सीबीआई ने अप्रैल 1991 में हिजबुल मुजाहिद्दीन के खुफिया विभाग के डिप्टी चीफ अशफाक हुसैन लोन के खिलाफ टाडा व फेरा में मामला दर्ज किया था। उसकी गिरफ्तारी के बाद हवाला कारोबारी जैन बंधु सामने आए थे। तत्कालीन डीआईजी ओपी शर्मा की निगरानी में सीबीआई ने जैन बंधुओं के घर व दफ्तर पर छापेमारी की थी। इस दौरान उन्हें एक डायरी भी मिली थी, जिसमें उन राजनेताओं व सरकारी बाबुओं के नाम थे, जिन्हें जैन बंधुओं ने हवाला का पैसा दिया था। सीबीआई का आरोप था कि जैन बंधुओं ने ओपी शर्मा को 19 लाख रुपए दिए थे।
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