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सीरियल किलर को अदालत ने दोषी ठहराया
New Delhi
Updated Fri, 25 Jan 2013 05:30 AM IST
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नई दिल्ली। सिरकटी लाशें तिहाड़ जेल के बाहर फेंकने वाले चंद्रकांत झा को अदालत ने दोषी करार दिया है। अदालत ने झा को हत्या व साक्ष्य मिटाने का दोषी माना है। इस मामले में अदालत दो फरवरी को सजा सुनाएगी।
रोहिणी स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कामिनी लाउ की अदालत ने अभियुक्त झा को अमित, उपेंद्र व दलीप की हत्या व साक्ष्य मिटाने का दोषी करार दिया है। पुलिस ने उसे 21 मई 2007 को गिरफ्तार किया था।
सरकार की ओर से चंद्रकांत को मुहैया कराए गए न्याय मित्र दीपक शर्मा ने बताया कि अदालत ने झा को तीन हत्याओं में दोषी माना है। आरोपी ने फैसले की कॉपी हिंदी भाषा में देने की मांग की थी। यह मांग अदालत ने मान ली है। अदालत इसका हाईकोर्ट से अनुवाद करवाएगी। इस संबंध में हाईकोर्ट से बात हो चुकी है।
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अभियोजन पक्ष के मुताबिक चंद्रकांत झा ने अप्रैल 2006 में अमित की हत्या की थी। इसके बाद अप्रैल 2007 में उपेंद्र व दलीप की हत्या कर दी थी। वह इन लोगों की शराब पीने, मांस खाने व औरतों के पास जाने की आदत से परेशान था।
हालांकि पुलिस ने उसे नवंबर 2003 में उसके साथी उमेश की हत्या के मामले में गिरफ्तार किया था। लेकिन जांच में कोई सबूत न मिलने पर जांच अधिकारी ने ही अदालत में उसके पक्ष में गवाही दी थी। इस मामले में वह छह दिसंबर 2007 को आरोपमुक्त हो गया था।
मूल रूप से मधेपुरा बिहार व दिल्ली में अलीपुर निवासी चंद्रकांत झा के खिलाफ आदर्श नगर थाने में आठ मामले दर्ज हुए थे। उसे हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन चार साल बाद वह अदालत से बरी हो गया था।
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रोहिणी स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कामिनी लाउ की अदालत ने अभियुक्त झा को अमित, उपेंद्र व दलीप की हत्या व साक्ष्य मिटाने का दोषी करार दिया है। पुलिस ने उसे 21 मई 2007 को गिरफ्तार किया था।
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सरकार की ओर से चंद्रकांत को मुहैया कराए गए न्याय मित्र दीपक शर्मा ने बताया कि अदालत ने झा को तीन हत्याओं में दोषी माना है। आरोपी ने फैसले की कॉपी हिंदी भाषा में देने की मांग की थी। यह मांग अदालत ने मान ली है। अदालत इसका हाईकोर्ट से अनुवाद करवाएगी। इस संबंध में हाईकोर्ट से बात हो चुकी है।
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अभियोजन पक्ष के मुताबिक चंद्रकांत झा ने अप्रैल 2006 में अमित की हत्या की थी। इसके बाद अप्रैल 2007 में उपेंद्र व दलीप की हत्या कर दी थी। वह इन लोगों की शराब पीने, मांस खाने व औरतों के पास जाने की आदत से परेशान था।
हालांकि पुलिस ने उसे नवंबर 2003 में उसके साथी उमेश की हत्या के मामले में गिरफ्तार किया था। लेकिन जांच में कोई सबूत न मिलने पर जांच अधिकारी ने ही अदालत में उसके पक्ष में गवाही दी थी। इस मामले में वह छह दिसंबर 2007 को आरोपमुक्त हो गया था।
मूल रूप से मधेपुरा बिहार व दिल्ली में अलीपुर निवासी चंद्रकांत झा के खिलाफ आदर्श नगर थाने में आठ मामले दर्ज हुए थे। उसे हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन चार साल बाद वह अदालत से बरी हो गया था।