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दरवाजे तक आएगी दांत वाली वैन
New Delhi
Updated Tue, 11 Dec 2012 05:30 AM IST
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नई दिल्ली। दिल्ली में दंत रोगियों की बढ़ती संख्या और बीमारी के प्रति लोगों की उदासीनता को देखते हुए मोबाइल डेंटल क्लीनिक स्कीम की शुरुआत की जा रही है। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत योजना की शुरुआत सबसे पहले उत्तर-पूर्वी जिले से हो रही है। मौलाना आजाद इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंस (एमएआईडीएस) में मंगलवार को मुख्यमंत्री शीला दीक्षित इसकी शुरुआत करेंगी। स्कीम के तहत मोबाइल डेंटल क्लीनिक आपके द्वार तक पहुंच कर आपके दांतों की समस्या दूर करेगा। मोबाइल क्लीनिक दो चरणों में काम करेगा। पहले चरण में स्क्रीनिंग, जबकि दूसरे चरण में इलाज किया जाएगा। क्लीनिक के अंतर्गत छह वाहन होंगे। दो वाहनों में तमाम आधुनिक चिकित्सीय सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इसमें वातानुकूलित मिनी ऑपरेशन थियेटर, पावर बैकअप, वाटर टैंक और टॉयलेट के अलावा एलसीडी टेलीविजन लगा होगा। वाहन से पानी निकासी की भी व्यवस्था होगी। मरीज के ट्रीटमेंट के लिए दो डेंटल सर्जन के अलावा अन्य कर्मी की भी ड्यूटी रहेगी। सर्जन प्रतिदिन छह से आठ मरीज देखेंगे।
वहीं चार वाहनों में नियुक्त कर्मी इलाके में घूम-घूम कर दंत रोगियों की स्क्रीनिंग और पंजीकरण का काम करेंगे। एक घंटे में करीब 15 मरीजों की स्क्रीनिंग और दिन भर में औसतन 60 मरीजों की स्क्रीनिंग की जाएगी। महीने में 1200 से 1300 मरीजों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य रखा गया है। सप्ताह में पांच दिन सुबह साढ़े नौ से दोपहर ढाई बजे तक इलाज की सुविधा उपलब्ध होगी। मोबाइल डेंटल क्लीनिक इलाकों के डिस्पेंसरी के साथ मिलकर काम करेगा।
एमएआईडीएस के निदेशक डॉक्टर महेश वर्मा ने बताया कि मौलाना आजाद इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंस में प्रतिवर्ष तीन लाख मरीज इलाज के लिए आते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक 70 से 80 प्रतिशत बच्चे, 25 से 30 प्रतिशत वयस्क और 12 प्रतिशत बुजुर्ग कभी भी दंत चिकित्सक के पास नहीं पहुंचते।
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वहीं चार वाहनों में नियुक्त कर्मी इलाके में घूम-घूम कर दंत रोगियों की स्क्रीनिंग और पंजीकरण का काम करेंगे। एक घंटे में करीब 15 मरीजों की स्क्रीनिंग और दिन भर में औसतन 60 मरीजों की स्क्रीनिंग की जाएगी। महीने में 1200 से 1300 मरीजों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य रखा गया है। सप्ताह में पांच दिन सुबह साढ़े नौ से दोपहर ढाई बजे तक इलाज की सुविधा उपलब्ध होगी। मोबाइल डेंटल क्लीनिक इलाकों के डिस्पेंसरी के साथ मिलकर काम करेगा।
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एमएआईडीएस के निदेशक डॉक्टर महेश वर्मा ने बताया कि मौलाना आजाद इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंस में प्रतिवर्ष तीन लाख मरीज इलाज के लिए आते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक 70 से 80 प्रतिशत बच्चे, 25 से 30 प्रतिशत वयस्क और 12 प्रतिशत बुजुर्ग कभी भी दंत चिकित्सक के पास नहीं पहुंचते।
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