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मानव तस्करी में महिला समेत दो को सात साल कैद
New Delhi
Updated Mon, 24 Sep 2012 12:00 PM IST
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नई दिल्ली। मानव तस्करी हमारे समाज के लिए अभिशाप है। कानून में कोई भी सजा इसके लिए पर्याप्त नहीं है। हैरानी की बात है कि हमारे समाज में ऐसा तबका है, जिसका पेशा आज भी देह व्यापार है। यह टिप्पणी रोहिणी जिला अदालत ने मानव तस्करी के मामले में फैसले के दौरान की है।
मामला बाहरी दिल्ली के सुल्तानपुरी और राजस्थान में अलवर जिले के सोदावाड़ा व गिरीवास गांवों में मासूम बच्चियों को देह व्यापार में धकेलने से जुड़ा है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गुरदीप सिंह सैनी की अदालत ने अशोक उर्फ पप्पू और वीणा को सात साल कैद की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। एक आरोपी की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो चुकी है। आरोपी बिमला, मुकेश, करतार को आरोपमुक्त हो चुके हैं।
मामले के अनुसार सुल्तानपुरी इलाके में रहने वाले एक शख्स ने 18 जुलाई 2009 को अपनी चार साल की बेटी के लापता होने की सूचना दी थी। उसने बताया था कि उसकी बेटी भाभी के साथ बाजार गई थी, लेकिन भीड़ में कहीं गुम हो गई। बच्ची के पिता ने दो महिलाओं बिमला और मुकेश पर शक जाहिर किया था। इसके बाद पुलिस ने मामले को फिरौती के लिए अपहरण की धाराओं में बदल दिया था। इसके बाद पुलिस ने बिमला को गिरफ्तार कर लिया था। इलाके के अन्य लोगों ने बिमला और मुकेश के खिलाफ पहले भी दो बच्चियों को अगवा करने की शिकायत की थी। पुलिस ने एक मामले में अशोक उर्फ पप्पू, श्यामलाल, वीणा और मंगल को आठ मई 2010 को गिरफ्तार किया था। इन आरोपियों ने लड़कियों को अगवा करने का जुर्म स्वीकार किया था। इनके चंगुल से कई लड़कियों को छुड़ाया गया था। श्याम लाल और महिला आरोपी मुकेश ने पुलिस को बताया था कि सुल्तानपुरी इलाके से गायब हुई बच्ची को बिमला की मदद से उन्होंने अगवा किया था। बिमला ने वह बच्ची मुकेश को ढाई हजार रुपये में बेच दी थी। इस सूचना के आधार पर पुलिस ने 16 मई 2010 को करतार और मुकेश को भी गिरफ्तार किया था।
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मामला बाहरी दिल्ली के सुल्तानपुरी और राजस्थान में अलवर जिले के सोदावाड़ा व गिरीवास गांवों में मासूम बच्चियों को देह व्यापार में धकेलने से जुड़ा है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गुरदीप सिंह सैनी की अदालत ने अशोक उर्फ पप्पू और वीणा को सात साल कैद की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। एक आरोपी की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो चुकी है। आरोपी बिमला, मुकेश, करतार को आरोपमुक्त हो चुके हैं।
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मामले के अनुसार सुल्तानपुरी इलाके में रहने वाले एक शख्स ने 18 जुलाई 2009 को अपनी चार साल की बेटी के लापता होने की सूचना दी थी। उसने बताया था कि उसकी बेटी भाभी के साथ बाजार गई थी, लेकिन भीड़ में कहीं गुम हो गई। बच्ची के पिता ने दो महिलाओं बिमला और मुकेश पर शक जाहिर किया था। इसके बाद पुलिस ने मामले को फिरौती के लिए अपहरण की धाराओं में बदल दिया था। इसके बाद पुलिस ने बिमला को गिरफ्तार कर लिया था। इलाके के अन्य लोगों ने बिमला और मुकेश के खिलाफ पहले भी दो बच्चियों को अगवा करने की शिकायत की थी। पुलिस ने एक मामले में अशोक उर्फ पप्पू, श्यामलाल, वीणा और मंगल को आठ मई 2010 को गिरफ्तार किया था। इन आरोपियों ने लड़कियों को अगवा करने का जुर्म स्वीकार किया था। इनके चंगुल से कई लड़कियों को छुड़ाया गया था। श्याम लाल और महिला आरोपी मुकेश ने पुलिस को बताया था कि सुल्तानपुरी इलाके से गायब हुई बच्ची को बिमला की मदद से उन्होंने अगवा किया था। बिमला ने वह बच्ची मुकेश को ढाई हजार रुपये में बेच दी थी। इस सूचना के आधार पर पुलिस ने 16 मई 2010 को करतार और मुकेश को भी गिरफ्तार किया था।
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