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Delhi News: जश्न-ए-आजादी में पक्षियों की जान का दुश्मन बना मांझा

Sat, 16 Aug 2025 07:01 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 16 Aug 2025 07:01 PM IST
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Manjha becomes an enemy of birds' lives in the celebration of independence
हर साल की तरह इस बार भी मांझे की चपेट में आकर 300 से अधिक पक्षी हुए घायल
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90 से अधिक घायल पक्षी चांदनी चौक के अस्पताल में लाए गए
36 कॉल्स प्राप्त हुईं अग्निशमन विभाग को पक्षियों को बचाने के लिए

संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस के उत्सव के बीच राजधानी में आसमान में उड़ान भरते पक्षियों के लिए जानलेवा मांझा किसी अभिशाप से कम नहीं है। यह मांझा न केवल इंसानों के लिए खतरा है बल्कि बेजुबान पक्षियों की जिंदगी को भी छीन रहा है। हर साल की तरह इस बार भी 15 अगस्त को दिल्ली के आसमान में मांझे की चपेट में आकर 300 से अधिक पक्षी घायल हुए। चांदनी चौक के जैन पक्षी अस्पताल में इस दिन 90 से अधिक घायल पक्षी इलाज के लिए लाए गए जिनमें से 15 की हालत गंभीर थी और सात ने दम तोड़ दिया। मृत पक्षियों में एक चील, पांच कबूतर और एक तोता शामिल हैं।

अस्पताल में भर्ती घायल पक्षियों में चील, कौवे, कबूतर और चार तोते शामिल हैं। इनमें से कई पक्षियों के पंख और हड्डियां इस कदर क्षतिग्रस्त हैं कि उनके दोबारा उड़ पाने की संभावना कम है। अग्निशमन विभाग को भी मांझे में फंसे पक्षियों को बचाने के लिए 36 कॉल्स प्राप्त हुईं जिनका दमकलकर्मियों ने तुरंत रेस्क्यू किया। चांदनी चौक में जैन चैरिटेबल अस्पताल के डॉक्टर के अनुसार, इस बार घायल पक्षियों की संख्या पिछले साल की तुलना में थोड़ी कम है। पिछले साल 15 अगस्त को 140 से अधिक पक्षी इलाज के लिए लाए गए थे। उन्होंने बताया कि अगले कुछ दिनों तक घायल पक्षियों के आने का सिलसिला जारी रहेगा।
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पंख या पैर क्षतिग्रस्त होने के कारण काटने पड़ते हैं

डॉक्टर ने बताया कि मांझे में फंसने के बाद पक्षी छटपटाते हैं जिससे उनकी चोटें और गहरी हो जाती हैं। कई पक्षियों के पंख या पैर इतने क्षतिग्रस्त हो जाते हैं कि उन्हें काटना पड़ता है। इलाज में आमतौर पर एक से दो महीने का समय लगता है और इस दौरान पक्षियों को अस्पताल में विशेष देखभाल दी जाती है। राजौरी गार्डन से घायल कबूतर को लेकर आए मोहन लाल ने बताया कि पक्षी उनके घर की बालकनी पर मांझे में उलझा मिला था। उसका एक पंख बुरी तरह कट गया था जिसके कारण वह उड़ नहीं पा रहा था। उन्होंने कहा कि यह देखकर बहुत दुख होता है कि उत्सव के नाम पर इन बेकसूर जीवों की जिंदगी खतरे में पड़ रही है।
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पक्षियों को अस्पताल लाते वक्त इनका रखें ध्यान


-पक्षियों को बहुत टाइट न पकडे, इससे जख्मी पक्षी का खून अधिक बहता है।

-पक्षी के जख्म पर बैंडेज या कपड़ा बांध दें।
-पक्षी को प्लास्टिक के कैरी बैग में लाने की बजाय उसे जूते के डिब्बे या किसी कार्टन में लाएं। इसमें कुछ छेद कर दें ताकि पक्षी को ट्रेवल के दौरान हवा मिलती रहे।
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