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Delhi News: साइबर ठगी का बड़ा नेटवर्क ध्वस्त, छह गिरफ्तार
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दिल्ली के बैंक खाते और सिम बन रहे थे साइबर जालसाजों का हथियार
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। दिल्ली में बैठकर कोई बैंक खाते बेच रहा था, कोई ग्राहकों की जानकारी से चोरी-छिपे सिम निकलवा रहा था और कोई एपीके फाइल के जरिये लोगों के बैंक खाते खाली कर रहा था। इन अलग-अलग दिखने वाली घटनाओं की कड़ियां जब पुलिस ने जोड़नी शुरू कीं तो साइबर ठगी का एक बड़ा नेटवर्क सामने आया, जिसकी पहुंच दिल्ली से हैदराबाद, जामताड़ा, गुजरात और पंजाब तक मिली। आउटर नॉर्थ साइबर थाना पुलिस की चार अलग-अलग जांच में छह आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ करीब 70 बैंक खाते, 187 संदिग्ध सिम कार्ड और 125 एनसीआरपी शिकायतों का लिंक सामने आया है। इन शिकायतों में करीब 1.59 करोड़ रुपये की रकम शामिल है।
पुलिस की जांच में सामने आया कि साइबर ठगों के लिए सबसे जरूरी चीज केवल तकनीक नहीं, बल्कि दूसरों के नाम पर खुले बैंक खाते और सिम कार्ड थे। शाहबाद डेयरी इलाके में लोगों को बीमा, नौकरी, वेतन या दूसरे आर्थिक लाभ का लालच देकर बैंक खाते खुलवाए जाते थे। इसके बाद बैंक किट, एटीएम कार्ड, चेकबुक और पासबुक लेकर कथित तौर पर इन खातों को हैदराबाद में बैठे नेटवर्क तक पहुंचाया जाता था।
पुलिस के अनुसार 19 वर्षीय देवेंद्र उर्फ सचिन और उसका सहयोगी मोहित एक साल से इस नेटवर्क के लिए काम कर रहे थे। दोनों ने शाहबाद डेयरी इलाके में 70 बैंक खाते उपलब्ध कराए। खातों में आने वाली रकम को आगे ट्रांसफर कराने के बदले 10 प्रतिशत कमीशन रखा जाता था। पुलिस ने देवेंद्र को 24 अक्तूबर को गिरफ्तार कर उसके पास से पांच मोबाइल फोन, आठ डेबिट कार्ड, सात चेकबुक, दो पासबुक, 10,030 रुपये नकद, पीओएस उपकरण और लग्जरी बाइक बरामद की।
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एक फोटो दो सिम और ग्राहक को खबर तक नहीं
जांच की दूसरी कड़ी फर्जी सिम कार्ड नेटवर्क तक पहुंची। पुलिस के अनुसार, सिम डीलर अतुल ग्राहक से जारी करने के नाम पर दो बार फोटो खिंचवाता था। पहली फोटो को खराब बताकर दूसरी फोटो ली जाती और ग्राहक की जानकारी का इस्तेमाल कर उसके नाम पर अतिरिक्त सिम जारी कराया जाता था। ग्राहक को इसकी जानकारी तक नहीं होती थी। ये कथित तौर पर समीर उर्फ सैम और पंकज को करीब 1,500 रुपये प्रति सिम में बेचे जाते थे। जांच में 2026 के दौरान करीब 187 ऐसे सिम उपलब्ध कराने की बात सामने आई है।
20 हजार में बैंक खाते, ठगी की रकम पहुंचती थी आगे
तीसरे मामले में पुलिस को पता चला कि बैंक खाते भी साइबर ठगों के लिए बिकाऊ माल बन चुके थे। सुमित ने कथित तौर पर अपना बैंक खाता, बैंक किट और सिम 20 हजार रुपये में विक्की चौहान को सौंप दिया था। उसके नाम से तीन बैंक खातों का पता चला, जिनका इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम के लिए किए जाने की जांच चल रही है। इन खातों से जुड़े दो साइबर ठगी के मामलों में करीब 4.5 लाख रुपये की संदिग्ध वित्तीय कड़ी मिली है। एमसीडी इंस्पेक्टर से करीब 6.5 लाख रुपये की एपीके फाइल आधारित ठगी का मामला में सामने आया। एपीके फाइल मोबाइल में डाउनलोड होते ही पीड़ित की बैंकिंग जानकारी आरोपियों के हाथ लग जाती थी। इसके बाद रकम अलग-अलग माध्यमों से ट्रांसफर कर दी गई।
जामताड़ा, गुजरात और जालंधर तक फैला था जाल
साइबर ठगों का जाल जामताड़ा, गुजरात और जालंधर तक फैला हुआ था। पुलिस को जालंधर से गिरफ्तार सौरव के मोबाइल की जांच में 29 बैंक खातों, 85 डेबिट, क्रेडिट कार्ड और 10 मास्क्ड कार्ड समेत 124 बैंक अकाउंट और कार्ड की जानकारी मिली। सौरव जामताड़ा और गुजरात के नेटवर्क के लिए वित्तीय हैंडलर की भूमिका निभाता था। वह ठगी की रकम को आगे खपाने के लिए करीब 30 प्रतिशत कमीशन लेता था। जांच में करीब 3.73 करोड़ रुपये की संदिग्ध ठगी की रकम उसके जरिये हैंडल किए जाने की बात सामने आई है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। दिल्ली में बैठकर कोई बैंक खाते बेच रहा था, कोई ग्राहकों की जानकारी से चोरी-छिपे सिम निकलवा रहा था और कोई एपीके फाइल के जरिये लोगों के बैंक खाते खाली कर रहा था। इन अलग-अलग दिखने वाली घटनाओं की कड़ियां जब पुलिस ने जोड़नी शुरू कीं तो साइबर ठगी का एक बड़ा नेटवर्क सामने आया, जिसकी पहुंच दिल्ली से हैदराबाद, जामताड़ा, गुजरात और पंजाब तक मिली। आउटर नॉर्थ साइबर थाना पुलिस की चार अलग-अलग जांच में छह आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ करीब 70 बैंक खाते, 187 संदिग्ध सिम कार्ड और 125 एनसीआरपी शिकायतों का लिंक सामने आया है। इन शिकायतों में करीब 1.59 करोड़ रुपये की रकम शामिल है।
पुलिस की जांच में सामने आया कि साइबर ठगों के लिए सबसे जरूरी चीज केवल तकनीक नहीं, बल्कि दूसरों के नाम पर खुले बैंक खाते और सिम कार्ड थे। शाहबाद डेयरी इलाके में लोगों को बीमा, नौकरी, वेतन या दूसरे आर्थिक लाभ का लालच देकर बैंक खाते खुलवाए जाते थे। इसके बाद बैंक किट, एटीएम कार्ड, चेकबुक और पासबुक लेकर कथित तौर पर इन खातों को हैदराबाद में बैठे नेटवर्क तक पहुंचाया जाता था।
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पुलिस के अनुसार 19 वर्षीय देवेंद्र उर्फ सचिन और उसका सहयोगी मोहित एक साल से इस नेटवर्क के लिए काम कर रहे थे। दोनों ने शाहबाद डेयरी इलाके में 70 बैंक खाते उपलब्ध कराए। खातों में आने वाली रकम को आगे ट्रांसफर कराने के बदले 10 प्रतिशत कमीशन रखा जाता था। पुलिस ने देवेंद्र को 24 अक्तूबर को गिरफ्तार कर उसके पास से पांच मोबाइल फोन, आठ डेबिट कार्ड, सात चेकबुक, दो पासबुक, 10,030 रुपये नकद, पीओएस उपकरण और लग्जरी बाइक बरामद की।
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एक फोटो दो सिम और ग्राहक को खबर तक नहीं
जांच की दूसरी कड़ी फर्जी सिम कार्ड नेटवर्क तक पहुंची। पुलिस के अनुसार, सिम डीलर अतुल ग्राहक से जारी करने के नाम पर दो बार फोटो खिंचवाता था। पहली फोटो को खराब बताकर दूसरी फोटो ली जाती और ग्राहक की जानकारी का इस्तेमाल कर उसके नाम पर अतिरिक्त सिम जारी कराया जाता था। ग्राहक को इसकी जानकारी तक नहीं होती थी। ये कथित तौर पर समीर उर्फ सैम और पंकज को करीब 1,500 रुपये प्रति सिम में बेचे जाते थे। जांच में 2026 के दौरान करीब 187 ऐसे सिम उपलब्ध कराने की बात सामने आई है।
20 हजार में बैंक खाते, ठगी की रकम पहुंचती थी आगे
तीसरे मामले में पुलिस को पता चला कि बैंक खाते भी साइबर ठगों के लिए बिकाऊ माल बन चुके थे। सुमित ने कथित तौर पर अपना बैंक खाता, बैंक किट और सिम 20 हजार रुपये में विक्की चौहान को सौंप दिया था। उसके नाम से तीन बैंक खातों का पता चला, जिनका इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम के लिए किए जाने की जांच चल रही है। इन खातों से जुड़े दो साइबर ठगी के मामलों में करीब 4.5 लाख रुपये की संदिग्ध वित्तीय कड़ी मिली है। एमसीडी इंस्पेक्टर से करीब 6.5 लाख रुपये की एपीके फाइल आधारित ठगी का मामला में सामने आया। एपीके फाइल मोबाइल में डाउनलोड होते ही पीड़ित की बैंकिंग जानकारी आरोपियों के हाथ लग जाती थी। इसके बाद रकम अलग-अलग माध्यमों से ट्रांसफर कर दी गई।
जामताड़ा, गुजरात और जालंधर तक फैला था जाल
साइबर ठगों का जाल जामताड़ा, गुजरात और जालंधर तक फैला हुआ था। पुलिस को जालंधर से गिरफ्तार सौरव के मोबाइल की जांच में 29 बैंक खातों, 85 डेबिट, क्रेडिट कार्ड और 10 मास्क्ड कार्ड समेत 124 बैंक अकाउंट और कार्ड की जानकारी मिली। सौरव जामताड़ा और गुजरात के नेटवर्क के लिए वित्तीय हैंडलर की भूमिका निभाता था। वह ठगी की रकम को आगे खपाने के लिए करीब 30 प्रतिशत कमीशन लेता था। जांच में करीब 3.73 करोड़ रुपये की संदिग्ध ठगी की रकम उसके जरिये हैंडल किए जाने की बात सामने आई है।