फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   level of investigation in a large number of riot cases is very poor court seeks intervention of Commissioner of Police

दिल्ली दंगा: जांच का स्तर बेहद खराब, हस्तक्षेप करें पुलिस आयुक्त, जज ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर जताई नाराजगी

Sun, 29 Aug 2021 04:25 PM IST
सुशील कुमार कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: सुशील कुमार कुमार Updated Sun, 29 Aug 2021 04:25 PM IST
सार

अदालत ने यह निष्कर्ष दंगों के दौरान 25 फरवरी 2020 को पुलिस अधिकारियों पर तेजाब, कांच की बोतलों और ईंटों से हमले के मामले में अशरफ अली के खिलाफ आरोप तय करते समय दिया।

विज्ञापन
level of investigation in a large number of riot cases is very poor court seeks intervention of Commissioner of Police
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social Media

विस्तार

अतिरिक्त सेशन जज विनोद यादव ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि उत्तर पूर्वी दिल्ली में वर्ष 2020 में हुए दंगों के काफी मामलों मे जांच का स्तर ‘बेहद खराब’ है। इसलिए पुलिस आयुक्त को इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए।

विज्ञापन


अदालत ने यह निष्कर्ष दंगों के दौरान 25 फरवरी 2020 को पुलिस अधिकारियों पर तेजाब, कांच की बोतलों और ईंटों से हमले के मामले में अशरफ अली के खिलाफ आरोप तय करते समय दिया। उन्होंने कहा कि यह देखना काफी पीड़ादायक है कि दंगों के काफी मामलों में जांच का स्तर काफी खराब है। यहां तक कि ज्यादातर मामलों में जांच अधिकारी (आईओ) अदालत के सामने पेश भी नहीं होते। 
विज्ञापन


आधा-अधूरा आरोप पत्र पेश करने के बाद पुलिस जांच को तर्कपूर्ण अंत तक पहुंचने के लिए बामुश्किल ही चिंता करती है। इस कारण काफी केसों में नामजद किए गए आरोपी जेलों में सड़ रहे हैं। अदालत ने शनिवार को दी अपनी टिप्पणी में आगे कहा कि यह केस इसका ज्वलंत उदाहरण है, जहां पीड़ित खुद पुलिसकर्मी हैं। इसके बावजूद आईओ ने अब तक तेजाब के सैंपल लेकर इसका कैमिकल एनालिसिस कराने तक की जहमत नहीं उठाई।
विज्ञापन
विज्ञापन


यहां तक कि आईओ ने पीड़ितों को पहुंची चोटों की प्रकृति के बारे में राय लेने की भी जरूरत नहीं समझी। इसके अलावा, आईओ ने अभियोजन पक्ष को आरोपों पर रखे जाने वाले तर्कों की भी जानकारी नहीं दी। बस उन्हें आरोप-पत्र की पीडीएफ भेजकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली। उन्होंने अपने आदेश की प्रति पुलिस आयुक्त को भेजने का निर्देश देते हुए उन्हें इस मामले में जरूरी कदम उठाने को कहा। 


अन्य अधिकारियों के भी जागने का समय
सेशन जज ने साथ ही कहा कि उत्तर पूर्वी जिले के डीसीपी और अन्य अधिकारियों के लिए भी यह जागने का समय है। उन्हें अदालत की टिप्पणी पर गौर करते हुए इस मामले में तत्काल जरूरी कदम उठाने चाहिए। इस मामले में वे विशेषज्ञों की भी राय ले सकते हैं। ऐसा न करने पर इन मामलों में आरोपी लोगों के साथ अन्याय होता रहेगा। उत्तर पूर्वी दिल्ली में वर्ष 2020 में नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर के विरोध के नाम पर शुरू हुए सांप्रदायिक दंगों में 53 लोगों की मौत हो गई थी और 700 घायल हुए थे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed