{"_id":"60a5711fbf4504270c4e4453","slug":"kisan-morcha-said-government-should-not-test-our-patience","type":"story","status":"publish","title_hn":"दिल्ली : किसान मोर्चा ने कहा- हमारे धैर्य की परीक्षा न ले सरकार, मान ले मांगें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दिल्ली : किसान मोर्चा ने कहा- हमारे धैर्य की परीक्षा न ले सरकार, मान ले मांगें
Thu, 20 May 2021 01:42 AM IST
दुष्यंत शर्मा
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 20 May 2021 01:42 AM IST
सार
एसकेएम ने बयान जारी कर कहा कि किसान आंदोलन में 470 से अधिक किसानों की मौत हो चुकी है। सरकार अगर अपने किसानों की चिंता करती है और उनका कल्याण चाहती है तो उनकी मांगें माननी चाहिए।
विज्ञापन
file pic...
- फोटो : amar ujala
विस्तार
राष्ट्रीय राजधानी में हो रही बारिश के कारण बढ़ती मुश्किलों के बीच दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे किसानों के संगठन संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने बुधवार को केंद्र सरकार से कहा कि हमारे धैर्य की परीक्षा नहीं लें, वार्ता की शुरुआत करें और हमारी मांगों को मान लें।
विज्ञापन
पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्से से हजारों की संख्या में किसान दिल्ली के तीन सीमा बिंदुओं -- सिंघू, टीकरी और गाजीपुर में करीब छह महीने से धरना दे रहे हैं। वे तीन कृषि कानूनों को वापस लेने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी की मांग कर रहे हैं।
विज्ञापन
एसकेएम ने बयान जारी कर कहा कि किसान आंदोलन में 470 से अधिक किसानों की मौत हो चुकी है। कई आंदोलनकारियों को अपनी नौकरियां, पढ़ाई एवं दूसरे काम छोड़ने पड़े और सरकार अपने नागरिकों, अन्नदाताओं के प्रति ही कितना अमानवीय एवं लापरवाह रुख दिखा रही है।
विज्ञापन
सरकार अगर अपने किसानों की चिंता करती और उनका कल्याण चाहती तो उसे किसानों से वार्ता शुरू करनी चाहिए और उनकी मांगें माननी चाहिए। मोर्चा ने सरकार को चेतावनी दी कि किसानों के धैर्य की परीक्षा न लें।
बता दें कि प्रदर्शनकारी किसानों और सरकार के बीच अभी तक 11 दौर की वार्ता हो चुकी है लेकिन गतिरोध बना हुआ है क्योंकि दोनों पक्ष अपने रुख पर अड़े हुए हैं। आंदोलनरत किसान संगठनों के समूह एसकेएम ने कहा कि यह सरकार किसानों की हितैषी होने का बहाना करती है और जब किसी राज्य में फसल के उत्पादन या निर्यात में बढ़ोतरी का पूरा श्रेय लेती है तो इसे प्रत्येक नागरिक की क्षति और दूसरे नुकसानों की जिम्मेदारी भी लेनी चाहिए। किसानों ने कहा कि बारिश के कारण भोजन एवं आवास की स्थिति खराब हो रही है। सड़कें एवं प्रदर्शन स्थल के कई हिस्से बारिश के पानी से भर गए हैं।