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Delhi News: कजाकिस्तान के मरीज को कोलन कैंसर सर्जरी के बाद मिला नया जीवन
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फेफड़ों तक फैल चुका था और आंतों में गंभीर रुकावट पैदा कर रहा था
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। कजाकिस्तान के 42 वर्षीय असिलबेक सारियेव को दिल्ली में एक जटिल और खतरनाक कोलन कैंसर सर्जरी के बाद नया जीवन मिला है। असिलबेक को विकसित कोलन कैंसर था, जो फेफड़ों तक फैल चुका था और आंतों में गंभीर रुकावट पैदा कर रहा था।
उनके दोस्त के सुझाव पर वह इलाज के लिए दिल्ली आए, जहां अस्पताल की विशेषज्ञ टीम ने उनकी जान बचाने के लिए जोखिम भरी सर्जरी की। जांच में पता चला कि असिलबेक के शरीर में 9×7 सेंटीमीटर का बड़ा ट्यूमर था, जो पहले से ही फेफड़ों को प्रभावित कर चुका था। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए अस्पताल के सीनियर सर्जन डॉ. सौरभ बंसल और उनकी टीम ने मिनिमली इनवेसिव (न्यूनतम चीरे वाली) लेप्रोस्कोपिक तकनीक का उपयोग किया, जिससे सर्जरी सफल रही और मरीज की रिकवरी तेज हुई।
इस सर्जरी में मोटापे और उच्च बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) के कारण मुश्किलें और बढ़ गई थीं लेकिन डॉक्टरों ने स्मार्ट तकनीक और अनुभव का उपयोग करके ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा किया। सर्जरी के बाद असिलबेक तेजी से ठीक हुए। बिना किसी दर्द के चलने लगे और सामान्य खाना भी खाने लगे। डॉ. सौरभ बंसल ने बताया कि लेप्रोस्कोपिक तकनीक ने सर्जरी का जोखिम कम किया और मरीज की रिकवरी को तेज किया। इस तकनीक से न केवल सर्जरी सुरक्षित रही, बल्कि मरीज को भी जल्दी आराम मिला। डॉ ने बताया कि कोलन कैंसर अब दुनियाभर में पाचन तंत्र से जुड़ा सबसे सामान्य कैंसर बन चुका है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। कजाकिस्तान के 42 वर्षीय असिलबेक सारियेव को दिल्ली में एक जटिल और खतरनाक कोलन कैंसर सर्जरी के बाद नया जीवन मिला है। असिलबेक को विकसित कोलन कैंसर था, जो फेफड़ों तक फैल चुका था और आंतों में गंभीर रुकावट पैदा कर रहा था।
उनके दोस्त के सुझाव पर वह इलाज के लिए दिल्ली आए, जहां अस्पताल की विशेषज्ञ टीम ने उनकी जान बचाने के लिए जोखिम भरी सर्जरी की। जांच में पता चला कि असिलबेक के शरीर में 9×7 सेंटीमीटर का बड़ा ट्यूमर था, जो पहले से ही फेफड़ों को प्रभावित कर चुका था। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए अस्पताल के सीनियर सर्जन डॉ. सौरभ बंसल और उनकी टीम ने मिनिमली इनवेसिव (न्यूनतम चीरे वाली) लेप्रोस्कोपिक तकनीक का उपयोग किया, जिससे सर्जरी सफल रही और मरीज की रिकवरी तेज हुई।
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इस सर्जरी में मोटापे और उच्च बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) के कारण मुश्किलें और बढ़ गई थीं लेकिन डॉक्टरों ने स्मार्ट तकनीक और अनुभव का उपयोग करके ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा किया। सर्जरी के बाद असिलबेक तेजी से ठीक हुए। बिना किसी दर्द के चलने लगे और सामान्य खाना भी खाने लगे। डॉ. सौरभ बंसल ने बताया कि लेप्रोस्कोपिक तकनीक ने सर्जरी का जोखिम कम किया और मरीज की रिकवरी को तेज किया। इस तकनीक से न केवल सर्जरी सुरक्षित रही, बल्कि मरीज को भी जल्दी आराम मिला। डॉ ने बताया कि कोलन कैंसर अब दुनियाभर में पाचन तंत्र से जुड़ा सबसे सामान्य कैंसर बन चुका है।
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