दिल, दिमाग और फेफड़ों को खराब कर रहा जूल, उपराष्ट्रपति भी पूछ चुके हैं इसे लेकर सवाल
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करीब 8 माह पहले स्वास्थ्य विभाग ने जिस जूल को राजधानी में आने से रोका था, अब वह बाजार में धड़ल्ले से बिक रहा है। बैटरी चालित यह उत्पाद फ्लैवरयुक्त है जोकि सिगरेट की तरह इस्तेमाल में लाया जाता है।
यह उत्पाद फिलहाल दिल्ली में प्रतिबंधित नहीं है। लेकिन सवाल यह है कि पहले प्रतिबंधित क्यों था और अब क्यों नहीं है? इस पर सरकारी तंत्र बेशक खामोश है, लेकिन जब अमर उजाला ने पड़ताल की तो पाया कि कई दुकानदारों ने उत्पाद को ऑर्डर देने पर उपलब्ध कराने का दावा किया।
लक्ष्मी नगर से लेकर कनॉट प्लेस और चांदनी चौक बाजार तक में यह उपलब्ध है। लक्ष्मी नगर से जब पड़ताल शुरू हुई तो दुकानदारों ने ब्लैक में मिलने का हवाला दिया।
पड़ताल में यह भी सामने आया कि इसकी शुरुआती कीमत करीब ढाई सेे 10 हजार रुपये तक है। दुकानदारों का कहना है कि मुंबई से दिल्ली आने के बाद ये माल पंजाब, हरियाणा और यूपी तक पहुंच रहा है। हालांकि पंजाब और यूपी समेत 14 राज्यों में यह उत्पाद प्रतिबंधित है।
एम्स के डॉक्टरों के अनुसार इस तरह के उत्पाद से दिल, दिमाग और फेफड़े को खतरा है। पल्मोनरी विशेषज्ञ डॉ. करण मदान का कहना है कि गर्भवती महिलाओं को इसके सेवन से सीधे तौर पर नुकसान हो सकता है।
चूंकि इसमें निकोटिन भी होता है। वहीं आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव कह चुके हैं कि इस तरह के उत्पाद किशोरावस्था में ही मस्तिष्क के विकास को प्रभावित करता है।
हाल ही में केंद्र सरकार की ड्रग टेक्नोलॉजी एडवाइजरी बोर्ड (डीटीएबी) और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने इस उत्पाद पर प्रतिबंध की पैरवी की है।
रोका था दिल्ली आने से
सूत्रों की मानें तो करीब 8 माह पहले तक चीन और कोरिया से आने वाले इस जूल उत्पाद को दिल्ली में आने नहीं दिया गया था। उस वक्त दिल्ली सरकार के अतिरिक्त निदेशक डॉ. एसके अरोड़ा ने कस्टम और दिल्ली पुलिस को पत्र लिखकर ई सिगरेट और जूल की खेप को रोक दिया था। लेकिन इसके बाद यह कैसे बाजार तक पहुंचा? इसके बारे में कोई भी खुलकर बोलने को तैयार नहीं।
प्रतिबंधित होने चाहिए उत्पाद: डॉ. अरोड़ा
डॉ. एसके अरोड़ा ने बताया कि ई सिगरेट या उस जैसे उत्पाद लोगों के लिए सुरक्षित नहीं है। इस पर प्रतिबंध लगना चाहिए। अगर सिगरेट या बीड़ी की लत छुड़ाना है तो उसके लिए डॉक्टर उपलब्ध हैं। ई सिगरेट के जरिए लत छुड़ाने का दावा करना गलत है।
कोर्ट ने भी मांगा जवाब, कर रहे हैं तैयारी
स्वास्थ्य सचिव संजीव खैरवार ने बताया कि ई सिगरेट और उससे जुड़े उत्पादों को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में मामला विचाराधीन है। कोर्ट में जवाब दाखिल कर रहे हैं।
जल्द ही ठोस कदम उठाए जाएंगे। हालांकि जानकारों की मानें तो इन उत्पादों के निर्माण, बिक्री और वितरण पर नियंत्रण की कोई पॉलिसी नहीं है। पिछली बार भी सरकार ने यही दावे किए थे, लेकिन सुधार न होने पर कोर्ट ने हाल ही में फटकारते हुए दोबारा जवाब मांगा है।
वालंटरी एसोसिएशन ऑफ ट्रेड रिप्रजेंटेटिव ऑफ ईएनडीएस इन इंडिया (ट्रेंड्स) की कन्वीनर प्रवीण रिखी बताती हैं कि वे इसी माह दो बार केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री, स्वास्थ्य सचिव, दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस बाबत अपनी मांग रखने का प्रयास कर चुकी हैं, लेकिन कोई भी सुनवाई नहीं हो रही है। रिखी का मानना है कि इन उत्पादों पर प्रतिबंध की जगह नियंत्रण होना चाहिए और सख्ती के साथ लागू कराना चाहिए।
उपराष्ट्रपति ने पूछा था, क्या है ये उत्पाद
दिसंबर 2017 में राज्यसभा में बतौर सभापति उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने पहले ही दिन ई सिगरेट के बारे में पूछा था। उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए स्कूली बच्चों तक में प्रसिद्ध होने की बात कही थी। इस पर तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने ठोस पॉलिसी बनाने का वादा किया था। मंत्रालय की ओर से कवायद शुरू हुई। फिलहाल मंत्रालय पूरी तरह से इन उत्पादों पर प्रतिबंध के पक्ष में है।र्भय