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जेएनयू: कुलपति बोले- कोरोना महामारी के चलते परिसर में हुई हिंसा की जांच में हुई देरी, ऑनलाइन बयान के लिए यह उचित समय नहीं
Sat, 11 Sep 2021 03:50 PM IST
सुशील कुमार कुमार
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: सुशील कुमार कुमार
Updated Sat, 11 Sep 2021 03:50 PM IST
सार
लाठी और रॉड से लैस नकाबपोश लोगों के एक समूह ने 5 जनवरी 2020 को जेएनयू परिसर में छात्रों और शिक्षकों पर हमला किया था। साथ ही विश्वविद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया था।
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जेएनयू के कुलपति एम जगदीश कुमार
- फोटो : facebook.com/mamidalajagadesh.kumar
विस्तार
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के कुलपति एम जगदीश कुमार ने कहा कि कोरोनो महामारी के चलते पिछले साल जनवरी में कैंपस में हुई हिंसा की जांच में देरी हुई। हिंसा में करीब 35 लोग घायल हुए थे।
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कुलपति से जब यह पूछा गया कि घटना की जांच के लिए विश्वविद्यालय द्वारा गठित समिति ने ऑनलाइन बयान क्यों नहीं दिया, उन्होंने कहा कि छात्र पहले से ही बहुत तनाव में हैं और उन्हें ऑनलाइन बयान के लिए नोटिस भेजने का यह सही समय नहीं है।
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लाठी और रॉड से लैस नकाबपोश लोगों के एक समूह ने 5 जनवरी 2020 को जेएनयू परिसर में छात्रों और शिक्षकों पर हमला किया था। साथ ही विश्वविद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया था। जिसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन को पुलिस बुलानी पड़ी थी। हिंसा में जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष आइशी घोष भी घायल हुई थीं।
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वहीं दूसरी तरफ पांच सालों से एनआईआरएफ रैंकिंग में देश का दूसरा सर्वश्रष्ठ संस्थान का दर्जा प्राप्त जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय इन दिनों इंजीनियरिंग के छात्रों को प्रौद्योगिकी के साथ इंटरनेशनल स्ट्डीज में 'काउंटर टेररिज्म' यानी आतंकवाद विरोध नया कोर्स पढ़ाने के चलते विवादों में है। कोर्स का विषय बेशक देश-दुनिया के आज के माहौल को देखकर चौंकाने वाला नहीं है, लेकिन इंजीनियरिंग के छात्रों को इस कोर्स से जोड़ने का सवाल बार-बार उठता है।
आखिर बीटेक डिग्री पाने वाले छात्रों को इस कोर्स को पढ़ाने की क्या जरूरत पड़ी, क्या छात्र पढ़ना पसंद करेंगे, इस विषय की पढ़ाई के बाद आखिर उनको भविष्य में क्या फायदा होगा आदि सवाल हर किसी के जेहन में हैं। एम जगदीश कुमार ने इसको लेकर विस्तार से जवाब दिया।
बीटेक ड्यूअल डिग्री प्रोग्राम किस तरह से डिजाइन किया गया है?
देश में सामान्य बीटेक डिग्री प्रोग्राम के तहत इंजीनियरिंग की पढ़ाई करवायी जाती है। हालांकि, अधिकतर छात्र इंजीनियरिंग के बाद मैनेजमेंट समेत अन्य क्षेत्रों में अपनी मास्टर डिग्री पूरी करते हैं। नई शिक्षा नीति के तहत अब बहुविषयक पढ़ाई होगी। इसी को ध्यान में रखकर 2018 में बीटेक-एमएस ड्यूअल डिग्री प्रोग्राम का प्रस्ताव आया। इसके बाद अकेडमिक और एग्जीक्यूटिव काउंसिल में पास होने के बाद पहला बैच चल रहा है। इसमें पहले चार साल छात्र इंजीनियरिंग के विषयों को ही पढ़ेंगे। इसके बाद पांचवां साल एमएस के तहत पढ़ाई होगी। एमएस में ह्यूमेनेटीज, सोशल साइंस, लैंग्वेज, इंटरनेशनल रिलेशन आदि क्षेत्र में अपनी स्पेशलाइजेशन कर सकते हैं। फिलहाल एमएस में छात्रों के पास 11 कोर्स का विकल्प है। इसमें ही इंटरनेशनल रिलेशन कोर्स में काउंटर टेररिज्म विषय नाम से कोर्स को जोड़ा गया है।