Delhi High Court : अवमानना के दोषी अधिकारियों को 800 से अधिक पौधे लगाने के निर्देश
पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों के आश्वासन पर हाईकोर्ट ने जेल भेजने की सजा स्थगित की।
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उच्च न्यायालय ने बुधवार को अदालत की अवमानना में दोषी ठहराए गए पीडब्ल्यूडी के तीन अधिकारियों को राजधानी में 800 से अधिक पौधे लगाने का निर्देश दिया है। अदालत ने फिलहाल तीनों को जेल भेजने के आदेश को टाल दिया है। न्यायमूर्ति नजमी वजीरी ने इस वर्ष की शुरुआत में पेड़ों की सुरक्षा पर न्यायिक आदेशों का उल्लंघन करने के दोषी अधिकारियों को दो महीने की कैद की सजा सुनाई गई थी। अधिकारियों ने बिना शर्त माफी मांगते हुए पेड़ लगाने और सुरक्षा करने का आश्वासन दिया।
अदालत ने उनके आग्रह को स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई जेल की सजा के अमल पर रोक लगा दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि नीति में प्रतिपूरक वनीकरण के मामले में एक से दस का अनुपात अनिवार्य है। अदालत ने कहा कि पौधे प्रभावित स्थान के पास लगाए जाए न कि शहर की सीमाओं पर किसी क्षेत्र में। न्यायमूर्ति वजीरी ने 3 जून को लोक निर्माण विभाग के तीन अधिकारियों के साथ-साथ दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी को विकास मार्ग पर पेड़ों को हुए व्यापक नुकसान के कारण अदालत की अवमानना का दोषी ठहराया था।
अदालत ने नीरज शर्मा की अवमानना याचिका पर कहा था कि अधिकारियों का आचरण पेड़ों के संरक्षण और संरक्षण से संबंधित न्यायिक आदेशों का उल्लंघन है। याचिकाकर्ता के वकील आदित्य एन प्रसाद ने उनके मुवक्किल अपने गलत काम को कम करने के लिए स्वेच्छा से सुप्रीम कोर्ट के आसपास और साथ ही मथुरा रोड पर 830 पौधे लगाने का वचन देते हैं।
अदालत ने कहा वे केवल अवमानना करने वालों के कारण हुए नुकसान को कुछ हद तक कम करने के आश्वासन के मद्देनजर सजा के आदेश को अगली तारीख तक स्थगित रख रहे है। अदालत ने कहा कि अधिकारियों को 300 पेड़ों से शुरुआत करनी चाहिए, जिनमें से 100 को सुप्रीम कोर्ट के सामने वाले क्षेत्र में लगाया जाना चाहिए और दूसरे में उल्लिखित क्षेत्र का दौरा संबंधित अधिकारियों द्वारा किया जाएगा, जिसमें वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं, और वृक्षारोपण के लिए स्थानों की पहचान की जाएगी।
खरीद कर पौधे लगाने होंगे
अदालत ने अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर पौधों की खरीद करने कर उसे लगाने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अधिकारियों द्वारा स्वैच्छिक आग्रह का वृक्ष अधिकारी द्वारा कानून के तहत जुर्माना या अन्य शर्तों को लागू करने पर कोई असर नहीं पड़ेगा। पिछले साल दिसंबर में अदालत ने मामले में निर्माण कार्य के कारण पेड़ों को हुए नुकसान पर पीडब्ल्यूडी अधिकारियों से कारण बताने के लिए कहा था कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही क्यों शुरू नहीं की जानी चाहिए। 3 दिसंबर 2021 को पारित अपने आदेश में अदालत ने कहा था कि प्रथम दृष्टया अधिकारियों ने अदालत की अवमानना की थी।
नाबालिग के यौन उत्पीड़न के दोषी को 14 साल की सजा बरकरार
उच्च न्यायालय ने बुधवार को नाबालिग लड़की के यौन उत्पीड़न के लिए दोषी को निचली अदालत द्वारा सुनाई गई न्यूनतम 14 साल की सजा को बरकरार रखा है। अदालत ने कहा कि पोस्को मामले में दोषी ठहराए गए अपराधी के पास बच्ची के पिता ने बतौर अभिभावक के रूप में छोड़ा था ,क्योंकि वह दूर रहता था। दोषी ने विश्वास का दुरुपयोग कर पीड़िता के जीवन और भविष्य के साथ खिलवाड़ किया।
न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता और न्यायमूर्ति अनीश दयाल की पीठ ने निचली अदालत द्वारा दोषी की ओर से सजा के खिलाफ अपील को खारिज करते हुए कहा यह अपराध निंदनीय है। पीठ ने अपीलकर्ता के उस तर्क को खारिज कर दिया कि दोषी की उम्र 60 वर्ष है और परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य होने के साथ-साथ एक अविवाहित बेटी है। अदालत ने कहा, अपराध की प्रकृति, गंभीरता को देखते हुए उसे उचित सजा मिली है।
कृपाण रखने वाले अभ्यर्थी एक घंटे पहले परीक्षा केंद्र पहुंचेंगे
हाईकोर्ट ने दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (डीएसएसएसबी) को कृपाण रखने वाले अभ्यर्थियों को परीक्षा के रिपोर्टिंग समय से एक घंटे पहले केंद्र पर पहुंचने के निर्देश जारी करने को कहा है। अदालत ने कहा कि बोर्ड ऐसे अभ्यर्थियों को अग्रिम सूचना दे, ताकि उन्हें कोई परेशानी न हो। न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने एक सिख महिला को कड़ा पहनने के कारण डीएसएसएसबी द्वारा आयोजित परीक्षा में न बैठने देने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया।
अदालत ने कहा यह उम्मीद की जाती है कि न केवल डीएसएसएसबी बल्कि अन्य सभी भर्ती एजेंसियां परीक्षा आयोजित करने से पहले इस संबंध में उचित कदम उठाएंगी। अधिवक्ता कपिल मदन और गुरमुख सिंह के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया कि उपरोक्त कार्रवाई भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत याचिकाकर्ता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है, जिसने उसे सिख धर्म का पालन करने और उसे मानने की अनुमति दी गई है।
याचिकाकर्ता ने तर्क रखा कि अधिकारियों ने प्रवेश पत्र के साथ समय पर पहुंचने के बावजूद याची को पिछले साल जुलाई में आयोजित पीजीटी-अर्थशास्त्र (महिला) के पद पर चयन के लिए परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी थी। उसे बताया गया कि जब तक वह अपना धातु का कड़ा हटा नहीं देती, उसे परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
अदालत ने कहा यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि डीएसएसएसबी जैसी विशेष संस्था ने समय पर इस मामले में कोई कदम नहीं उठाया। बोर्ड को बताना चाहिए था कि यदि वे कड़ा या कृपाण पहनने के इच्छुक हैं तो उन्हें रिपोर्टिंग समय से कम से कम एक घंटे पहले परीक्षा केंद्र पर पहुंचना आवश्यक है।
दूसरी ओर, डीएसएसएसबी ने सभी आरोपों को गलत बताया। बोर्ड ने कहा कि कड़ा या कृपाण पहनने वाले सभी सिख उम्मीदवारों को परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई है, बशर्ते वे रिपोर्टिंग समय से एक घंटे पहले परीक्षा केंद्र पर पहुंचें।