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Delhi News: भाटी माइंस को दो माह में पर्यटन गंतव्य बनाने के निर्देश, उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने किया निरीक्षण

Thu, 02 Jun 2022 06:33 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला ब्यूरो. नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो. नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Thu, 02 Jun 2022 06:33 AM IST
सार

उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने बुधवार को भाटी माइंस का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने दो माह के भीतर भाटी माइंस को पर्यटन गंतव्य बनाने के निर्देश दिए हैं। 

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Instructions to make Bhati Mines a tourist destination in two months Lt Governor VK Saxena inspected
विनय कुमार सक्सेना - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने भाटी माइंस को दो माह के भीतर पर्यटन गंतव्य बनाने के निर्देश दिए हैं। वहीं, अधिकारियों से आसपास के इलाकों में जलजमाव के पानी को भाटी माइंस तक पहुंचाने के लिए योजना बनाने के लिए भी कहा गया है। अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर ऐसे इलाकों की पहचान करनी होगी, जहां अक्सर जलजमाव की वजह से परेशानी होती है। इस पानी को माइंस के गड्ढों तक पहुंचाकर पानी की सरंक्षण किया जा सकेगा।

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उपराज्यपाल ने वन विभाग समेत अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ भाटी माइंस का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान एलजी ने पाया कि भाटी माइंस में बने गड्ढों की गहराई 80 फीट तक थी, लेकिन उनकी क्षमता का उपयोग नहीं किया जा रहा था। अधिकारियों की ओर से एलजी को सूचित किया कि इन गड्ढों में जलस्तर चार फीट से अधिक नहीं पहुंचता है। इसको देखते हुए उन्होंने दक्षिणी जिला अधिकारी को एक सप्ताह में इलाके की जलजमाव क्षेत्रों की पहचान करने के निर्देश दिए हैं, जिससे गड्ढों तक एक जोड़ने वाली लाइन तैयार किया जा सके। एलजी ने कहा कि यह न केवल इन गड्ढों को प्राकृतिक पर्यावरण के अनुकूल जल निकायों के रूप में विकसित करने में मदद करेगा, बल्कि पक्षियों और विभिन्न प्रकार के जीवों को आकर्षित करने का काम करेगा। इस संबंध में एलजी ने अधिकारियों को क्षेत्र का एक सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया है।
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उपराज्यपाल ने आरक्षित वन की लगभग 340 हेक्टेयर भूमि पर कब्जा होने के कारण राजस्व एवं वन विभाग द्वारा प्राथमिकता के आधार पर अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए हैं। सक्सेना ने कहा कि भाटी माइंस आरक्षित वन क्षेत्र को स्थानीय निवासियों के साथ-साथ पर्यटकों के लिए एक इको-पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित किया जा सकता है। उन्होंने अधिकारियों को दो महीने के भीतर इस संबंध में एक योजना प्रस्तुत करने के लिए कहा है। 
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साथ ही उन्होंने अधिकारियों को विलायती कीकर के रोपण से बचने और क्षेत्र की समग्र पारिस्थितिकी के साथ देशी प्रजातियों के रोपण को सुनिश्चित करने की सलाह दी है। इसके तहत फूल वाले पौधे, मोरिंगा और बांस की विशेष किस्में जैसे बंबुसा टुल्डा और बंबुसा पॉलीमोर्फा को शामिल करने के लिए कहा है। यह समृद्ध और विविध वनस्पतियों और जीवों को सुनिश्चित करने के साथ राजस्व सृजन के अवसर भी प्रदान करेगा। उन्होंने निर्देश दिया है कि क्षेत्र में जहां तक संभव हो उपचारित पानी का उपयोग बागवानी के लिए किया जाए और जल बोर्ड एक सप्ताह के भीतर इस कार्ययोजना को तैयार करे। व्यापक योजना तैयार करने और उसका कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए एक मल्टी टास्किंग बल का गठन करने का भी निर्णय लिया गया है।

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