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भारत में प्रिवेंटिव हेल्थकेयर में ज्यादा निवेश की आवश्यकताः डीएस नेगी
Sat, 16 Jan 2021 10:59 PM IST
प्राची प्रियम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: प्राची प्रियम
Updated Sat, 16 Jan 2021 10:59 PM IST
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DS Negi
- फोटो : अमर उजाला
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बजट की तैयारियां जोरों पर हैं। इस दौरान हर सेक्टर को वित्त मंत्री से कुछ उम्मीदें हैं। हेल्थकेयर सेक्टर को भी इस बार बजट से अधिक अपेक्षा है। राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर (आरजीसीआईआरसी) के सीईओ व सेवानिवृत्त आईएएस डीएस नेगी ने कहा कि मौजूदा महामारी को देखते हुए बजट 2021 से हमारी अपेक्षाएं हेल्थकेयर सेक्टर में खर्च के लिए ज्यादा आवंटन से जुड़ी हैं।
सबको बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने की दिशा में आयुष्मान भारत नि:संदेह बहुत सकारात्मक कदम है और इसे सफल बनाए रखने के लिए बजट में और ज्यादा प्रावधान करने की जरूरत होगी। उन्होंने कहा कि भारत में 60 फीसद से ज्यादा आबादी 35 साल से कम उम्र की है।
इस लिहाज से हम सबसे युवा देश हैं। बावजूद इसके बीमारियों का दबाव भी हम पर ज्यादा है। विशेष तौर पर लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। हम उम्मीद करते हैं कि सरकार प्रिवेंटिव हेल्थ एवं वेलनेस सेक्टर के लिए बजट में अतिरिक्त व्यवस्था करेगी।
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अगर प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप हो और शुरुआती स्टेज में पता चल जाए तो कैंसर के 60 फीसदी मामलों का इलाज संभव है। इससे इस बीमारी के कारण पड़ने वाला खर्च को कम किया जा सकता है। प्रिवेंटिव ओंकोलॉजी के लिए विशेष यूनिट बनाकर आरजीसीआईआरसी जैसे इंस्टीट्यूट सक्रियता से काम कर रहे हैं।
पूर्व में दिल्ली सरकार के प्रिंसिपल सेक्रेटरी (हैल्थ एवं फैमिली वेलफेयर) रहे नेगी ने कहा कि भारत में आबादी के हिसाब से अस्पतालों में बेड की बहुत कमी है। निजी क्षेत्र को चिकित्सा सुविधाएं आधुनिक करने के लिए टैक्स छूट जैसे कदमों से बेहतर स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित हो सकेगी। इससे ज्यादा निवेश भी आएगा और ज्यादा रोजगार भी सृजित होंगे।
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सबको बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने की दिशा में आयुष्मान भारत नि:संदेह बहुत सकारात्मक कदम है और इसे सफल बनाए रखने के लिए बजट में और ज्यादा प्रावधान करने की जरूरत होगी। उन्होंने कहा कि भारत में 60 फीसद से ज्यादा आबादी 35 साल से कम उम्र की है।
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इस लिहाज से हम सबसे युवा देश हैं। बावजूद इसके बीमारियों का दबाव भी हम पर ज्यादा है। विशेष तौर पर लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। हम उम्मीद करते हैं कि सरकार प्रिवेंटिव हेल्थ एवं वेलनेस सेक्टर के लिए बजट में अतिरिक्त व्यवस्था करेगी।
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अगर प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप हो और शुरुआती स्टेज में पता चल जाए तो कैंसर के 60 फीसदी मामलों का इलाज संभव है। इससे इस बीमारी के कारण पड़ने वाला खर्च को कम किया जा सकता है। प्रिवेंटिव ओंकोलॉजी के लिए विशेष यूनिट बनाकर आरजीसीआईआरसी जैसे इंस्टीट्यूट सक्रियता से काम कर रहे हैं।
पूर्व में दिल्ली सरकार के प्रिंसिपल सेक्रेटरी (हैल्थ एवं फैमिली वेलफेयर) रहे नेगी ने कहा कि भारत में आबादी के हिसाब से अस्पतालों में बेड की बहुत कमी है। निजी क्षेत्र को चिकित्सा सुविधाएं आधुनिक करने के लिए टैक्स छूट जैसे कदमों से बेहतर स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित हो सकेगी। इससे ज्यादा निवेश भी आएगा और ज्यादा रोजगार भी सृजित होंगे।