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Delhi News: आईआईटी दिल्ली ने बनाया सौर ऊर्जा संयंत्रों के लिए हाइब्रिड शील्ड कवच
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कॉन्क्लेव में शोधकर्ताओं ने 12 अत्याधुनिक तकनीकी प्रोटोटाइप किए प्रदर्शित
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। आईआईटी दिल्ली ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर अलग-अलग नवाचार तैयार किए हैं। इसमें सौर ऊर्जा संयंत्रों को तेज हवा से सुरक्षित रखने वाली हाइब्रिड शील्ड से लेकर स्वच्छ बायोमास कुकस्टोव शामिल है।
शुक्रवार को परिसर में आयोजित पर्यावरण एवं सतत विकास विषय पर सीएसआर कॉन्क्लेव-2026 में 12 नवाचारों को प्रदर्शित किया गया। इसमें फ्रॉम वेस्ट टू वेल्थ तकनीक ने कपड़ा उद्योग के अपशिष्ट जल को शुद्ध कर उससे बायोपॉलिमर और उपयोगी संसाधन तैयार करने का समाधान प्रस्तुत किया। एडवांस्ड फंक्शनल मैटेरियल्स परियोजना में कृषि और वस्त्र अपशिष्ट से कार्बन डाइऑक्साइड कैप्चर, जल शोधन और सुपरकैपेसिटर जैसे उच्च मूल्य के उत्पाद विकसित किए गए हैं। सूर्य-वायु हाइब्रिड शील्ड सौर ऊर्जा संयंत्रों को तेज हवाओं से सुरक्षित रखने के साथ पवन ऊर्जा उत्पादन का भी अवसर देती है। वहीं एरोजेल आधारित शीतकालीन वस्त्र और यू-कूल स्मार्ट टेक्सटाइल कम ऊर्जा में बेहतर ताप नियंत्रण और आराम उपलब्ध कराने के लिए विकसित किए गए हैं।
कॉन्क्लेव में हाइड्रोजन पीईएम फ्यूल सेल के लिए नई इलेक्ट्रोड तकनीक, जीरो-हेड हाइड्रोकाइनेटिक टरबाइन, पेंटाफुल्वीन आधारित हरित रसायन तकनीक, 75 फीसदी से अधिक दक्षता वाला मल्टी-फ्यूल कुकस्टोव, ई-मोबिलिटी के लिए हाई-पावर इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, गजगामिनी हाथी पहचान प्रणाली, स्वच्छ बायोमास कुकस्टोव सहित कई दूसरे नवाचार शामिल है। ऊर्जा दक्ष गुड़ उत्पादन प्रणाली जैसे नवाचारों ने भी विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित किया। इन तकनीकों का उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता, ग्रामीण विकास और सतत औद्योगिक उत्पादन को बढ़ावा देना है।
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आईआईटी दिल्ली के निदेशक प्रो. रंगन बनर्जी ने कहा कि भारत के सतत और समावेशी विकास के लिए शिक्षा संस्थानों, उद्योग, सरकार और समाज के बीच मजबूत साझेदारी आवश्यक है। आईआईटी ऐसी तकनीकों का विकास कर रहा है जो प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहकर समाज और उद्योग की वास्तविक समस्याओं का समाधान बनें। सीएसआर सहयोग के माध्यम से शोध को बड़े स्तर पर लागू कर देश के सतत विकास लक्ष्यों को गति दी जा सकती है। कार्यक्रम के दौरान निदेशक ने सीएसआर प्रोजेक्ट संग्रह का भी विमोचन किया। कॉन्क्लेव में कॉर्पोरेट साझेदारों को सीएसआर एक्सीलेंस अवार्ड से भी सम्मानित किया गया।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। आईआईटी दिल्ली ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर अलग-अलग नवाचार तैयार किए हैं। इसमें सौर ऊर्जा संयंत्रों को तेज हवा से सुरक्षित रखने वाली हाइब्रिड शील्ड से लेकर स्वच्छ बायोमास कुकस्टोव शामिल है।
शुक्रवार को परिसर में आयोजित पर्यावरण एवं सतत विकास विषय पर सीएसआर कॉन्क्लेव-2026 में 12 नवाचारों को प्रदर्शित किया गया। इसमें फ्रॉम वेस्ट टू वेल्थ तकनीक ने कपड़ा उद्योग के अपशिष्ट जल को शुद्ध कर उससे बायोपॉलिमर और उपयोगी संसाधन तैयार करने का समाधान प्रस्तुत किया। एडवांस्ड फंक्शनल मैटेरियल्स परियोजना में कृषि और वस्त्र अपशिष्ट से कार्बन डाइऑक्साइड कैप्चर, जल शोधन और सुपरकैपेसिटर जैसे उच्च मूल्य के उत्पाद विकसित किए गए हैं। सूर्य-वायु हाइब्रिड शील्ड सौर ऊर्जा संयंत्रों को तेज हवाओं से सुरक्षित रखने के साथ पवन ऊर्जा उत्पादन का भी अवसर देती है। वहीं एरोजेल आधारित शीतकालीन वस्त्र और यू-कूल स्मार्ट टेक्सटाइल कम ऊर्जा में बेहतर ताप नियंत्रण और आराम उपलब्ध कराने के लिए विकसित किए गए हैं।
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कॉन्क्लेव में हाइड्रोजन पीईएम फ्यूल सेल के लिए नई इलेक्ट्रोड तकनीक, जीरो-हेड हाइड्रोकाइनेटिक टरबाइन, पेंटाफुल्वीन आधारित हरित रसायन तकनीक, 75 फीसदी से अधिक दक्षता वाला मल्टी-फ्यूल कुकस्टोव, ई-मोबिलिटी के लिए हाई-पावर इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, गजगामिनी हाथी पहचान प्रणाली, स्वच्छ बायोमास कुकस्टोव सहित कई दूसरे नवाचार शामिल है। ऊर्जा दक्ष गुड़ उत्पादन प्रणाली जैसे नवाचारों ने भी विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित किया। इन तकनीकों का उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता, ग्रामीण विकास और सतत औद्योगिक उत्पादन को बढ़ावा देना है।
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आईआईटी दिल्ली के निदेशक प्रो. रंगन बनर्जी ने कहा कि भारत के सतत और समावेशी विकास के लिए शिक्षा संस्थानों, उद्योग, सरकार और समाज के बीच मजबूत साझेदारी आवश्यक है। आईआईटी ऐसी तकनीकों का विकास कर रहा है जो प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहकर समाज और उद्योग की वास्तविक समस्याओं का समाधान बनें। सीएसआर सहयोग के माध्यम से शोध को बड़े स्तर पर लागू कर देश के सतत विकास लक्ष्यों को गति दी जा सकती है। कार्यक्रम के दौरान निदेशक ने सीएसआर प्रोजेक्ट संग्रह का भी विमोचन किया। कॉन्क्लेव में कॉर्पोरेट साझेदारों को सीएसआर एक्सीलेंस अवार्ड से भी सम्मानित किया गया।