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दिल्ली हाईकोर्ट : शर्तों का उल्लंघन करने वाली निजी प्रयोगशालाओं का लाइसेंस रद्द करें आईसीएमआर
Tue, 07 Sep 2021 05:31 PM IST
Trainee Trainee
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Trainee Trainee
Updated Tue, 07 Sep 2021 05:31 PM IST
सार
बिना पंजीयन आनलाइन स्वास्थ्य सेवा देने वाले समूहों और घरों से कोविड-19 के सैंपल इकट्ठे करने के खिलाफ हाईकोर्ट की ओर से जारी आदेशों की पालना नहीं करने पर दायर की गई अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस नजमी वजीरी ने कहा, पूरा साल निकल गया, पूरा देश प्रभावित है, पूरा एनसीआर जूझ रहा, लेकिन आपने (आईसीएमआर) कुछ नहीं किया।
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गूगल प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : गूगल प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
राजधानी में निजी जांच प्रयोगशालाओं के खिलाफ लगातार मिल रही शिकायतों के मद्देनजर कड़ा रुख अपनाते हुए हाईकोर्ट ने भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) से कहा कि शर्तों का उल्लंघन करने वाली लैब का लाइसेंस रद्द करें। कोर्ट ने साफ कहा कि आईसीएमआर ही इन प्रयोगशालाओं को लाइसेंस जारी करती है, ऐसे में वह मूकदर्शक बनकर नहीं बैठ सकती। कोर्ट इस मामले में अगली सुनवाई 14 सितंबर को करेगी।
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बिना पंजीयन आनलाइन स्वास्थ्य सेवा देने वाले समूहों और घरों से कोविड-19 के सैंपल इकट्ठे करने के खिलाफ हाईकोर्ट की ओर से जारी आदेशों की पालना नहीं करने पर दायर की गई अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस नजमी वजीरी ने कहा, पूरा साल निकल गया, पूरा देश प्रभावित है, पूरा एनसीआर जूझ रहा, लेकिन आपने (आईसीएमआर) कुछ नहीं किया। आईसीएमआर ने कहा, आनलाइन स्वास्थ्य सेवा समूहों पर निगरानी उनके दायरे में नहीं आती। इस पर याचिकाकर्ता डाक्टर रोहित जैन की ओर से पेश अधिवक्ता शशांक देव ने कहा कि लोग मर रहे हैं। आईसीएमआर गाइडलाइन तय करता है, लेकिन कह रहा है कि यह मुद्दा उनके दायरे में नहीं है।
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आईसीएमआर की ओर से पेश केंद्र सरकार के स्थायी वकील अनुराग अहलुवालिया ने कहा कि उन्होंने केवल यह कहा है कि वे आनलाइन स्वास्थ्य सेवा देने वालों पर निगरानी नहीं करते। जब भी उन्हें निजी लैब के संबंध में शिकायत मिलेंगी, वे तत्काल कार्रवाई करेंगे। अवमानना याचिका के जरिए जैन ने हाईकोर्ट से गुहार लगाई की गैरकानूनी तौर पर चलने वाले आनलाइन स्वास्थ्य सेवा समूहों पर तत्काल लगाम लगाई जाए। क्योंकि ये कोविड जांच सैंपल इकट्ठे करने के लिए अधिकृत नहीं हैं। ऐसा करना कोर्ट के पिछले साल दिए आदेश की अवमानना है।
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मानकों को पूरा करना होगा
कोर्ट ने आईसीएमआर से कहा कि आपको निजी लैब से संबंधित मानकों को पूरा करना होगा। क्योंकि इनके लिए आप ही मानक तय करते हैं और लाइसेंस देते हैं। अवमानना याचिका के जवाब में हलफनामा पेश करते हुए आईसीएमआर ने कहा, निजी लैब को पंजीकरण के लिए कोविड -19 की जांच संबंधी एनएबीएल द्वारा जारी प्रमाणपत्र जरूरी है।
आईसीएमआर द्वारा कोविड जांच की मंजूरी देने पहले एनएबीएल ही निजी लैब में जांच संबंधी तैयारियों को प्रमाणित करता है। 16 अगस्त 2021 तक आईसीएमआर ने आरटीपीसीआर जांच के लिए दिल्ली में 134 प्रयोगशालाओं (35 सरकारी और 99 निजी) को अनुमित दी है। अन्य जांच संबंधी सूचनाएं आईसीएमआर की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
आईसीएमआर मानक संचालन प्रक्रिया बनाता है
आईसीएमआर के उप महानिदेशक (प्रशासन) डाक्टर आर लक्ष्मीनारायण की ओर से पेश हलफनामे में बताया गया कि आईसीएमआर कोविड जांच प्रयोगशालाओं के लिए मानक संचालन प्रक्रिया बनाता है। देश भर में 14 केंद्र स्थापित किए हैं, जो निजी लैब स्थापित करने और तय मानकों की अनुपालना के संबंध में दिशा निर्देशित करते हैं। दिल्ली के लिए एम्स को इसकी जिम्मेदारी दी गई है।
गौरतलब है कि 8 अप्रैल 2020 को सुप्रीम कोर्ट ने साफ तौर पर कहा था कि कोविड जांच करने वाली प्रयोगशालाएं एनएबीएल से या विश्व स्वास्थ्य संगठन या आईसीएमआर से अधिस्वीकृत होनी चाहिए। इसके बाद 6 अगस्त 2020 को हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सभी याचिकाकर्ताओं को सुनते हुए दिल्ली सरकार को गैरकानूनी तौर पर चलने वाले आनलाइन स्वास्थ्य सेवा समूहों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा था।